हंगामे के बाद अनिश्चितकाल के लिए राज्यसभा स्थगित, ट्रिपल तलाक-सिटिजन बिल लटका

Share this on WhatsAppनयी दिल्ली राज्यसभा का पूरा सत्र विभिन्न दलों के हंगामे की भेंट चढ़ गया और पूरे सत्र में महज तीन घंटे से कुछ अधिक समय ही काम हो पाया. हंगामे के चलते नागरिकता संशोधन विधेयक-2019 और मुस्लिम महिला बिल-2018 राज्यसभा में आज पेश ही नहीं हो सके. गौरतलब है कि सरकार के […]

नयी दिल्ली

राज्यसभा का पूरा सत्र विभिन्न दलों के हंगामे की भेंट चढ़ गया और पूरे सत्र में महज तीन घंटे से कुछ अधिक समय ही काम हो पाया. हंगामे के चलते नागरिकता संशोधन विधेयक-2019 और मुस्लिम महिला बिल-2018 राज्यसभा में आज पेश ही नहीं हो सके. गौरतलब है कि सरकार के पास ये बिल पास कराने के लिए आखिरी मौका था, जिसमें वो नाकाम रही. ये बिल लोकसभा में पास हो चुके हैं जबकि राज्यसभा में लंबित थे.

राज्यसभा ने लेखानुदान, वित्त विधेयक और विनियोग विधेयक को बगैर किसी चर्चा के लोकसभा को लौटा दिए, जबकि दो अन्य विधेयक पारित कर दिए. सरकार विवादास्पद तीन तलाक विधेयक और नागरिकता संशोधन विधेयक पारित नहीं करा सकी. सदन को अंतिम दिन भी बार-बार स्थगन का सामना करना पड़ा.

हालांकि, सदन ने पर्सनल लॉ (संशोधन) विधेयक व संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश (तीसरा संशोधन) विधेयक को पारित कर दिया. केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान ने उपभोक्ता संरक्षण विधेयक पर चर्चा करने और उसे पारित करने के लिए पेश किया. लेकिन, कुछ सांसदों ने इस पर आपत्ति की और इस विधेयक को संघीय स्वतंत्रता का अतिक्रमण बताया. इस विधेयक को पारित नहीं किया जा सका.

बजट सत्र 31 जनवरी को शुरू हुआ था और इसमें 10 बैठकें हुईं. हालांकि, इसका 44 घंटों से ज्यादा समय पश्चिम बंगाल में सीबीआई के कथित तौर पर दुरुपयोग व उत्तर प्रदेश में विश्वविद्यालयी अध्यापकों की नियुक्तियों में 13 पॉइंट रोस्टर, राफेल सौदे, कर्नाटक में कथित तौर पर विधायकों की खरीद-फरोख्त व असम में एनसीआर मुद्दे: नागरिकता संशोधन विधेयक में आपत्ति पर, आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग व उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों जैसे मुद्दों पर बर्बाद हुआ.

बजट सत्र के दौरान ऊपरी सदन में सिर्फ 4.9 फीसदी कामकाज हुआ और ज्यादातर समय हंगामे की भेंट चढ़ गया. इस सत्र के दौरान छह सरकारी विधेयक पेश किए गए. किसी भी दिन प्रश्नकाल नहीं चल सका और शून्य काल के दौरान सिर्फ 16 मुद्दे उठाए जा सके.