तीन तलाक पर बहस के बीच रविशंकर प्रसाद और ओवैसी में हुई तू-तू मैं-मैं, देखें VIDEO

ओवैसी के मुताबिक अगर कोई गैर-मुस्लिम ऐसा अपराध करता है तो उसे एक साल की ही सजा होगा. जबकि यही अपराध कोई मुस्लिम पति करता है तो उसे सजा 3 साल की होगी.

नई दिल्ली: 17वीं लोकसभा के पहले सत्र में कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बहुचर्चित तीन तलाक बिल सभा में पेश किया. जिसका कड़े हंगामे के साथ कांग्रेस पार्टी समेत कई विपक्षी दलों ने विरोध किया. वहीं कानून मंत्री और एआईएमएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के बीच नोंक-झोंक भी हुई.

कानून मंत्री रविंशंकर प्रसाद ने ‘मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक- 2019’ पेश करते हुए कहा कि यह मुस्लिम महिलाओं के हितों की रक्षा करेगा और तीन बार तलाक कहने (तलाक-ए-बिद्दत) पर शादी खत्म करने पर रोक भी लगाएगा. हालांकि ओवैसी ने इस बिल को असंवैधानिक करार दिया.

ओवैसी ने कहा कि ये बिल संविधान के आर्टिकल 14 और 15 का उल्लंघन करता है. उन्होंने तर्क दिया कि ट्रिपल तलाक बिल मुस्लिमों के साथ भी भेदभाव करने वाला कानून है. ओवैसी के मुताबिक अगर कोई गैर-मुस्लिम ऐसा अपराध करता है तो उसे एक साल की ही सजा होगा. जबकि यही अपराध कोई मुस्लिम पति करता है तो उसे सजा 3 साल की होगी.

उन्होंने इस भेदभाव को संविधान के खिलाफ बताया. एआईएमआईएम प्रमुख ने कहा कि ये बिल महिलाओं की मदद करने की जगह उन के हितों को नुकसान पहुंचाएगा. औवेसी ने बहुचर्चित बिल पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि अगर सजा के बाद पति जेल में रहा तो महिला को मैंटिनेंस कौन देगा? उन्होंने कहा कि क्या महिला का खर्चा सरकार उठाएगी?

मालूम हो कि पिछले साल भी लोकसभा में ये बिल पारित किया गया था. जबकि राजसभा में ये लटक गया. अब जब कार्यकाल समाप्त हो चुका है तो संविधान की प्रक्रिया के तहत नई लोकसभा में नए सिरे से नया बिल लाया जा रहा है. केंद्रीय कानून मंत्री ने यह जानकारी सदन में दी.

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