PM Modi को डिवाइडर इन चीफ बताए जाने को तारीफ समझ बैठे BJP वाले, लोगों ने लिए मजे

टाइम के लेख के मुताबिक, नरेंद्र मोदी का सत्ता में आना इस बात को दिखाता है कि भारत में जिस उदार संस्कृति की चर्चा की कथित रूप से चर्चा की जाती थी वहां पर दरअसल धार्मिक राष्ट्रवाद, मुसलमानों के खिलाफ भावनाएं और जातिगत कट्टरता पनप रही थी.

नई दिल्ली: अमेरिका की मशहूर पत्रिका ‘TIME’ ने अपने कवर पेज पर एक बार फिर से भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जगह दी है. मैगजीन ने इससे पहले मार्च 2012 और मई 2015 में भी अपने कवर पेज पर पीएम को जगह दी थी लेकिन इस बार चर्चा की वजह कुछ और है. TIME मैगजीन ने कवर पेज पर पीएम मोदी को ‘इंडियाज डिवाइडर इन चीफ़’ कहकर बुलाया है यानी की ‘भारत का प्रमुख विभाजनकारी’.

इस टैगलाइन की वजह से देश के अंदर एक नई तरह की चर्चा शुरु हो गई है. कुछ लोग पत्रकार की नागरिकता को कोस रहे हैं तो कुछ लोगों का कहना है कि कवर पेज पर जगह देने का निर्णय पत्रिका प्रमुख यानी एडिटर इन चीफ़ का होता है इसलिए पत्रकार को कोसना क्योंकि वो पाकिस्तान मूल का है सही नहीं है.

यहां यह तर्क-वितर्क चल ही रहा था कि अचानक से सोशल साइट्स पर एक नई बहस शुरू हो गई. दरअसल उमेश ने शुक्रवार (10 मई) रात को अपने ट्विटर और फेसबुक अकाउंट से एक तस्वीर पोस्ट की . इस तस्वीर में TIME मैगजीन का कवर दिखाई दे रहा था जिसके ऊपर की तरफ लिखा गया था ‘मोदी है तो नामुमकिन मुमकिन है’ और नीचे दाईं तरफ उमेश की तस्वीर थी जिसके साथ लिखा गया था, “अमेरिका की विश्व प्रसिद्ध मैगजीन TIME ने मोदी को ‘Divider In Chief’ के उपाधि से सम्मानित किया गया. इस सम्मान के लिए समस्त देशवासियों की ओर सम्माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को अनंत शुभकामनाएं.”

फिर क्या था सोशल मीडिया पर लोगों ने इस पोस्ट को लेकर उमेश को ट्रोल करना शुरू कर दिया. उमेश रंजन साहू को जब इस बात की जानकारी मिली तो इसे ट्विटर और फेसबुक अकाउंट से डिलीट कर दिया. हालांकि, उमेश का पोस्ट करीब दो घंटे तकसोशल मीडिया पर रहा और पोस्ट डिलीट होने के बाद भी स्क्रीनशॉट्स शेयर होते रहे.

उमेश रंजन साहू के अलावा महाराष्ट्र के एक अन्य बीजेपी कार्यकर्ता ने भी बधाई देते हुए लिखा पीएम मोदी का डंका पूरी दुनिया में..

पोस्ट को लेकर सोशल साइट्स पर हंसी-ठिठोली

इस पोस्ट को लेकर उमेश रंजन साहू जो ख़ुद को बीजेपी कार्यकर्ता बता रहा है की खिल्ली उड़ाई जा रही है. कुछ लोग उनकी अंग्रेज़ी के ज्ञान पर सवाल खड़े कर रहे हैं. तो कुछ लोग इस मोदी की अंधभक्ति बता रहे हैं. एक युजर ने फेसबुक पोस्ट को अपने वॉल पर शेयर करते हुए लिखा है कि टाइम मैगजीन ने मोदीजी पर बहुत बड़ी कवर स्टोरी छापी “डिवाइडर ऑफ इंडिया”. बीजेपी के एक नेता को लगा कि यह डिवाइडर ऑफ इंडिया कोई ग्लोबल सम्मान टाइप है. बस तुरंत “मोदी है तो मुमकिन है” के नारे के साथ उसे गौरव के रूप में बांटने लगे.

social media reaction on divider in chief, PM Modi को डिवाइडर इन चीफ बताए जाने को तारीफ समझ बैठे BJP वाले, लोगों ने लिए मजे

क्या लिखा था मैगजीन में

टाइम मैगजीन ने अपने एशिया एडिशन में भारत के लोकसभा चुनाव 2019 पर एक लीड स्टोरी की है. साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिछले पांच साल के कार्यकाल पर भी विस्तार से लिखा गया है. पत्रिका ने इसे “Can the World’s Largest Democracy Endure Another Five Years of a Modi Government?” शीर्षक दिया है.

आतिश तासीर नाम के पत्रकार ने लिखा है कि पीएम मोदी कांग्रेस मुक्त भारत की बात करते हैं लेकिन उन्होंने कभी भी हिन्दू-मुसलमानों के बीच भाईचारे की भावना को मजबूत करने के लिए कोई इच्छाशक्ति नहीं दिखाई है.

टाइम के इस लेख के मुताबिक, नरेंद्र मोदी का सत्ता में आना इस बात को दिखाता है कि भारत में जिस उदार संस्कृति की चर्चा की कथित रूप से चर्चा की जाती थी वहां पर दरअसल धार्मिक राष्ट्रवाद, मुसलमानों के खिलाफ भावनाएं और जातिगत कट्टरता पनप रही थी.

टाइम के इस लेख में 1984 के सिख दंगों और 2002 के गुजरात दंगों की तुलना की गई है. इसके मुताबिक, ये बात सही है कि कांग्रेस के कार्यकाल में 1984 के दंगे हुए थे. लेकिन इस दौरान पार्टी ने खुद को उन्मादी भीड़ से अलग रखा था. वहीं, नरेंद्र मोदी के गुजरात का मुख्यमंत्री रहते 2002 में दंगे हुए. लेकिन मोदी अपनी चुप्पी से ‘दंगाइयों के लिए दोस्त’ साबित हुए.

तासीर ने लिखा है कि 2014 में लोगों के बीच पनप रहे गुस्से को नरेंद्र मोदी ने आर्थिक वायदे में बदल दिया. उन्होंने नौकरी और विकास की बात की, लेकिन अब ये विश्वास करना मुश्किल लगता है कि ये उम्मीदों का चुनाव था. आलेख में कहा गया है कि मोदी द्वारा आर्थिक चमत्कार लाने के वायदे फेल हो गये, यही नहीं उन्होंने देश में जहर भरा धार्मिक राष्ट्रवाद का माहौल तैयार करने में जरूर मदद की.

इस लेख में लिंचिंग और गाय के नाम पर हुई हिंसा का भी जिक्र किया गया है. लेखक आतीश तासीर ने कहा है कि गाय को लेकर मुसलमानों पर बार-बार हमले हुए और उन्हें मारा गया. एक भी ऐसा महीना न गुजरा हो जब लोगों के स्मार्टफोन पर वो तस्वीरें न आई जिसमें गुस्साई हिन्दू भीड़ एक मुस्लिम को पीट न रही हो.

लेख में कहा गया है कि 2017 में उत्तर प्रदेश में जब बीजेपी चुनाव जीती तो भगवा पहनने वाले और नफरत फैलाने वाले एक महंत को सीएम बना दिया.

इस लेख में तीन तलाक बिल को लेकर भी पीएम मोदी पर निशाना साधा गया है. इसके मुताबिक, भारतीय मुसलमानों को शरिया पर आधारित फैमिली लॉ मानने का अधिकार मिला था. इसमें तलाक देने का उनका तरीका तीन बार तलाक बोलकर तलाक लेना भी शामिल था जिसे नरेंद्र मोदी ने 2018 में एक आदेश जारी कर तीन तलाक को कानूनी अपराध करार दे दिया दिया.

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