Tv9bharatvarshEconclave: ट्रेड के लिए दुनिया की हम पर नजर, अब चीन से सबका हो रहा मोह भंग- गडकरी

रोटी-रोजगार और पगार के मसलों का आम लोगों के जीवन पर सीधा असर पड़ता है. ऐसे में इन महत्वपूर्ण विषयों पर सरकार की तैयारी क्या है. इसके बारे में Tv9 bharatvarsh Econclave में चर्चा की सड़क यातायात मंत्री नितिन गडकरी ने.
Tv9 bharatvarsh E conclave Nitin Gadkari, Tv9bharatvarshEconclave: ट्रेड के लिए दुनिया की हम पर नजर, अब चीन से सबका हो रहा मोह भंग- गडकरी

कोरोनावायरस महामारी (Coronavirus Pandemic) के दौर में सबसे बड़ा सवाल रोटी-रोजगार और पगार का है. कोरोना के संक्रमण को लेकर लगाए गए लॉकडाउन का असर सीधे इन चीजों पर पड़ा है, जिसने आम लोगों के जीवन को प्रभावित किया है. ऐसे में इन महत्वपूर्ण विषयों पर सरकार की तैयारी क्या है. इसके बारे में Tv9 bharatvarsh Econclave में बातचीत की सड़क यातायात और MSME मंत्री नितिन गडकरी ने.

सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना होगा

  • कोरोनावायरस के वैक्सीन के लिए रिसर्च चल रही है. इसके लिए वैक्सीन जैसे ही बन जाएगी तो हमें कोई तकलीफ नहीं होगी. हमें कोरोनावायरस के साथ जीने की पद्धति को विकसित करना होगा. हमें मास्क लगाना होगा, लाइन में खड़ा होना होगा, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना होगा.

1200 की पीपीई किट साढ़े 600 में मिल रही है

  • पहली बार हमारे पास पीपीई किट स्पेशल विमान के जरिए भारत आई. मैंने लोकल लोगों से कहा कि आप क्यों नहीं बनाते. उन्होंने बनाना शुरू किया तो 1200 रुपए की पीपीई किट देश में 650 की मिल रही है. 1200 का सैनेटाइजर अब 160 में बिक रहा है. अब इतना प्रोडक्शन होने लगा है कि मैंने पीयूष गोयल जी से बात की है कि इन्हें एक्सपोर्ट करना शुरू करो. अब भारत खुद बनाएगा, चीन से नहीं लाएगा. साथ ही एक्सपोर्ट भी करेगा.

चीन की जगह झुकाव भारत की ओर

  • सच्चाई ये है कि विश्व का कोई भी देश चीन से डील करना नहीं चाहता है. कोई भी इंडस्ट्री सेट अप होती है तो उसके प्रोडक्ट को मार्केट चाहिए. भारत सबसे बड़ा मार्केट है तो उन्हें यहां आना ही पड़ेगा. दूसरा हमारे पास स्किल एम्पॉवरमेंट भी है.
  • जापानी प्रधानमंत्री ने कहा कि चीन में मौजूद अपनी कंपनियों को कहा है कि अगर वह चीन से बाहर निकलेंगी तो उन्हें आर्थिक सहायता दी जाएगी. जर्मनी, फ्रांस समेत कई देश ऐसे हैं जो अब चीन के साथ आर्थिक संबंध बनाना नहीं चाहते हैं.
  • 22 प्रतिशत लोन की एप्लिकेशन पेंडिंग हैं. मैंने इस मुद्दे पर बैंक से चर्चा की तो उन्होंने तुरंत एक्शन लिया. 11 प्रतिशत के कागज कंप्लीट नहीं हैं तो मैंने उन्हें बोला कि लोगों को सूचित करें. हम तमाम लोन की मॉनिटरिंग कर रहे हैं. लाल फीताशाही इस तरह से खत्म हो रही है. जिससे विदेशों का इनवेस्टमेंट भारत में बढ़ेगा और हम उनसे चर्चा करेंगे और उनके लिए रेड कारपेट डालेंगे.

कैसी रही सेकंड इनिंग?

    • गांव और शहर की इकोनॉमी को एक-दूसरे के लिए कोऑर्डिनेट करना है. ग्रामीण विकास और शहरी विकास के बीच की दूरी को खत्म करना पड़ेगा, ताकि गांव से शहरों का पलायन रुक सके.
    • समाजवाद, साम्यवाद और पूंजीवाद तीनों विचारधाराएं खत्म हो गई हैं. ऐसे में गांधी जी, लोहिया जी के अंत्योदय के विचार को लेकर लिबरल इकोनॉमी के आधार से सामाजिक आर्थिक चिंतन कर रहे हैं.
    • गांधीवादी इकोनॉमिक मॉडल के मुताबिक ज्यादा से ज्यादा लोगों के साथ ज्यादा से ज्याद प्रोडक्शन करना होगा. हमारी इकोनॉमी का जो केंद्र है वो है अंत्योदय. ये गांधी जी, राममनोहर लोहिया के विचारों पर आधारित है.
    • पहले मछुआरे सिर्फ 6 नॉटिकल तक समुद्र में मछली पकड़ने जा सकते थे, लेकिन अब 100 नॉटिकल माइल्स तक मछली पकड़ने जा सकेंगे. इस क्षेत्र में हमारी प्रोडक्टिविटी 6-7 गुना बढ़ेगी. शहद को लेकर भी हम आगे बढ़ रहे हैं.
    • हमारे पास काफी चावल है, जिनसे हम एथेनॉल बनाएंगे और इससे 1 लाख करोड़ की इकोनॉमी हासिल करने में मदद होगी.
    • सेकंड इनिंग की शुरुआत में ही पीएम मोदी ने हमारे सामने एक रोडमैप रखा जिसमें भारत को आत्मनिर्भर बनाने की बात कही गई थी.
    • हैंडलूम, हैंडमेड, आयुर्वेद से लेकर कई मसलों पर काम किया गया गया. कई लाभकारी योजनाएं बनाई गईं. इन सबके कारण ईज ऑफ बिजनेस में भारत की रैंकिंग सुधरी. इसी बीच कोरोना का कहर बरपा, लेकिन निश्चित ही हम इस से निपट लेंगे और 5 ट्रिलियन इकोनॉमी की ओर बढ़ेंगे.

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