भारत के अहम राजनेताओं और अधिकारियों की जासूसी कराकर क्या हासिल करना चाहता चीन

लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) पर जारी तनाव के बीच ड्रैगन (china) के निशाने पर सरहद से सटे भारतीय राज्यों के बड़े नेता और ब्यूरोक्रेट हैं. 

लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) पर जारी तनाव के बीच ड्रैगन (china) के निशाने पर सरहद से सटे भारतीय राज्यों के बड़े नेता और ब्यूरोक्रेट हैं.  इंडियन एक्सप्रेस की तहकीकात के पार्ट-2 में खुलासा किया गया है कि चीन भारत के नॉर्थ ईस्ट से लेकर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के इलाकों में हाइब्रिड वॉर की तैयारी कर रहा है.

ड्रैगन बड़े पॉलिटिकल लीडर्स और अफसरों पर नजर रख रहा है और इंटरनेट के जरिए उनकी जासूसी करा रहा है. इनवेस्टिगेटिव रिपोर्ट के मुताबिक चीनी सरकार और सेना की शह पर झेन्हुआ आईटी इंफो कंपनी जिन 180 लोगों की इंटरनेट एक्टिविटी पर निगरानी रख कर उनकी डेटा प्रोफाइलिंग कर रहा है. उनमें से 12 वर्तमान या भूतपूर्व मुख्यमंत्री और उनके रिश्तेदार और 10 मौजूदा मंत्री हैं.

ड्रैगन के निशाने पर हैं इन राज्यों के राजनेता

जम्मू कश्मीर में ड्रैगन पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, पूर्व केंद्रीय मंत्री सैफुद्दीन सोज और कांग्रेस नेता करण सिंह जैसी राजनीतिक शख्सियतों की गतिविधियों पर नजर रख रहा है. नॉर्थ ईस्ट के बड़े राजनेताओं में केंद्रीय मंत्री किरन रिजिजू, मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा और नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफियू रियो समेत अरुणाचल के सीएम पेमा खांडू के पूर्व सलाहकार जैसे नौकरशाह भी ड्रैगन के निशाने पर हैं.

गौर करने की बात ये है कि पिछले साल अगस्त में जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा वापस लिए जाने के बाद पाकिस्तान के साथ-साथ चीन भी कई बार संयुक्त राष्ट्रसंघ में इस मसले पर बहस की मांग उठा चुका है. इसके अलावा भारत का हिस्सा रहे अक्साई चिन के चीन के कब्जे में होने की वजह से भी जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक हलचलों में ड्रैगन की हमेशा से रुचि रही है.

जहां आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के चीफ मसूद अजहर के वैश्विक आतंकवादी घोषित किए जाने की कोशिशों का यूएनएससी में विरोध तक कर चुका है. वहीं नॉर्थ ईस्ट में सीमा से सटे भारतीय राज्यों में चीन की हमेशा से रुचि रही है, चाहे वो अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में घुसपैठ की कोशिशें रही हों या फिर चीन से निकलने वाली ब्रह्मपुत्र नदी पर एक के बाद एक डैम बनाकर नॉर्थ ईस्ट के इलाकों में पानी के बहाव को प्रभावित कर विवाद खड़ा करने की कोशिश रही हो. सवाल ये है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख से लेकर नॉर्थ ईस्ट तक बड़े-बड़े नेताओं और अफसरों की जासूसी कर ड्रैगन क्या हासिल करना चाहता है?

भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने शुरू की पड़ताल

इंडियन एक्सप्रेस की इस तहकीकात के बाद भारत की सुरक्षा एजेंसियों चौकन्नी हो गई हैं. राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से लेकर भारत के 10 हजार अहम राजनेताओं, अधिकारियों और कारोबारियों की डेटा प्रोफाइलिंग से देश की सुरक्षा को कितना बड़ा खतरा है? हाइब्रिड वॉर की तैयारी में अब तक जुटाए गए डेटा से चीन क्या और कितना गहरा नुकसान पहुंचा सकता है? भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने इसकी पड़ताल शुरू कर दी है. इसकी जांच रिपोर्ट राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल को सौंपी जाएगी, जिसके बाद भारत सरकार की कार्रवाई की रूपरेखा तैयार की जाएगी.

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