सुरक्षा एजेंसियों की बढ़ी चिंता, पूर्वोत्तर में उग्रवादी समूह कर रहे बेरोजगार युवाओं की भर्ती

राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने सरकार से कहा है कि भारत-म्यांमार सीमा (India-Myanmar) पर एक्टिव उग्रवादी समूह कोरोना महामारी और लॉकडाउन (Coronavirus, Lockdown) की वजह से बेरोजगार हुए युवाओं को आसानी से समूह में भर्ती कर सकता है.

भारत में Covid-19 महामारी की वजह से लगाया गया लॉकडाउन अब राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों (National Security Agencies) के लिए सिरदर्द बन रहा है. एजेंसियों को सूचना मिली है कि महामारी के दौरान नौकरी गवां चुके युवा बड़ी संख्या में, प्रतिबंधित उग्रवादी समूहों जैसे यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (ULFA) में शामिल हो रहे हैं.

इसके साथ ही रिपोर्ट के मुताबिक, चीन (China) के बनाए गए हथियारों की एक बड़ी खेप म्यांमार के अलगाववादी कट्टरपंथी समूहों के हाथों में पहुंच रही है, जिनका भारत के पूर्वोत्तर में आतंकवादी समूहों (Terrorist Groups) के साथ घनिष्ठ संबंध है.

राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारियों ने सरकारी सुरक्षा नियमों का हवाला देते हुए, नाम जाहिर न करने की शर्त पर कहा कि इस तरह के मामले देश के ऐसे संतुलन के लिए खतरा बन सकते हैं जिसे भारतीय सुरक्षा और खुफिया अधिकारियों ने सालों की कड़ी मेहनत से बनाया है.

AA करता है पूर्वोत्तर भारत के विद्रोही समूहों को हथियारों की सप्लाई

म्यांमार के रखाइन राज्य (Rakhine, Myanmar) में एक्टिव अराकन आर्मी (AA) को चीनी हथियारों की ताजी खेप मिल चुकी है और यह पूर्वोत्तर भारत में विद्रोही समूहों (Militant Groups, Northeast) को हथियारों और गोला-बारूद के मुख्य आपूर्तिकर्ताओं में से एक माना जाता है.

अधिकारियों ने कहा कि AA भारत के कलादान मल्टी मॉडल प्रोजेक्ट का विरोध करता है, जो मिजोरम जैसे राज्यों को म्यांमार में सिट्टवे बंदरगाह (Sittwe Port) के जरिए समुद्र के लिए एक आउटलेट देता है. दिलचस्प बात यह है कि AA ने चीन-म्यांमार इकोनॉमिक कॉरिडोर का विरोध नहीं किया है.

AA कर रहा बेरोजगार युवाओं की समूह में भर्ती, सुरक्षा पर पड़ेगा असर

सुरक्षा एजेंसियों ने सरकार से कहा है कि भारत-म्यांमार सीमा (India-Myanmar) पर एक्टिव उग्रवादी समूह कोरोना महामारी और लॉकडाउन (Corona, Lockdown) की वजह से बेरोजगार हुए युवाओं को आसानी से समूह में भर्ती कर सकता है. अधिकारी ने कहा, “चीन के बने हथियारों का AA के हाथ लगने से भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में सुरक्षा स्थिति पर असर पड़ेगा, क्योंकि इनमें से अधिकतर हथियार पूर्वोत्तर के कुछ उग्रवादी समूहों तक पहुंचने के लिए अपना रास्ता तलाश रहे हैं.”

उन्होंने आगे कहा, “नए हथियार पूर्वोत्तर समूहों को हमले की क्षमता देते हैं, जिनकी संख्या महामारी की वजह से बेरोजगार हुए युवाओं को भर्ती करने से बढ़ती जा रही है.”

NSCN-K बना रहा भारतीय सेना के खिलाफ हमलों की योजना

म्यांमार से बाहर स्थित पूर्वोत्तर का प्रतिबंधित उग्रवादी समूह खापलांग गुट नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड (NSCN-K) नई भर्तियों से मजबूत और एक्टिव  हो रहा है और भारत-म्यांमार बॉर्डर पर भारतीय सेना के खिलाफ हमलों की योजना बना रहा है. बता दें कि साल 2016 में NSCN (K) ने भारतीय सेना के 18 सैनिकों को मार डाला था और भारत को म्यांमार में शरण लेने वाले आतंकवादी ठिकानों पर हमला करने के लिए मजबूर किया.

भारत के लिए चिंता की बात यह है कि नरेंद्र मोदी सरकार (Narendra Modi Government) की कोशिशों के बाद भी नागा उग्रवादी समूहों के साथ शांति वार्ता असफल रही है.

कई प्रतिबंध उग्रवादी समूह कर रहे फिर से एक्टिव होने की कोशिश

एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि पीपुल्स डेमोक्रेटिक काउंसिल ऑफ कार्बी लोंगरी (PDCK) जैसे समूहों ने असम में 15 नए कैडर नियुक्त किए हैं. सूत्रों ने कहा, “आउटफिट में कार्बी पीपुल्स लिबरेशन टाइगर ने 10-15 कैडर की भर्ती की है.” इसके अलावा यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (ULFA) ने मेघालय के संगठन में 15-20 युवाओं की भर्ती की है.

वहीं खुफिया इनपुट ने बताया कि त्रिपुरा में नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (NLFT) के चरमपंथी परिमल देबब्रमा अपने समूह को फिर से एक्टिव करने की कोशिश कर रहे हैं और संगठन में शामिल हुए कुछ नए सदस्यों ने बांग्लादेश के खगरात्रि जिले के एक ठिकाने में अपनी बेसिक ट्रेनिंग पूरी कर ली है.

म्यांमार में डेरा डाले हुए उग्रवादी समूह कर रहे घुसपैठ की कोशिश

सूत्रों ने आगे कहा, “ये कैडर ऑपरेशन के लिए भारत में घुसपैठ करने की योजना बना रहे हैं.” खुफिया एजेंसियों ने यह भी कहा कि उग्रवादी समूहों की उपस्थिति की वजह से खतरे के मद्देनजर भारत-म्यांमार सीमा बेहद संवेदनशील है. सूत्रों ने कहा, “कई उग्रवादी समूह म्यांमार (Myanmar) में डेरा डाले हुए हैं और अरुणाचल प्रदेश के तिरप, लोंगडिंग और चांगलांग जिलों और नगालैंड के मोन जिले और असम के चराइदेव जिले के जरिए घुसपैठ करने की कोशिश कर रहे हैं.” (IANS)

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