मिडिल क्‍लास को टैक्‍स में छूट नहीं, वित्त मंत्री ने दिया संगम साहित्य का हवाला

इतना ही नहीं इस बार आयकर चुकाने के तरीके को भी आसान कर दिया है.

नई दिल्ली: इस बार मिडिल क्लास के लोगों को इनकम टैक्स में कोई छूट नहीं दी गई है. फरवरी में अंतरिम बजट में ऐलान किया गया था कि पांच लाख से कम आय वालों को इनकम टैक्स से छूट दी गई है.

हालांकि अगर आपकी आय 5 लाख से एक रुपये भी अधिक हुई तो आपको टैक्स देना होगा. यानी कि आप जीरो टैक्स का फायदा तो उठा सकते हैं लेकिन फिर भी आपको इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करना ही होगा.

बता दें कि 60 साल से कम उम्र के लोगों को इनकम टैक्स छूट की सीमा 2.5 लाख और वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह सीमा 3 लाख रुपये तक है.

यह छूट क्यों नहीं दी गई है इस बारे में समझाते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संगम साहित्य का जिक्र करते हुए कहा, ‘क्या हाथियों के लिए छोटी भूमि से निकले चावल काफी होंगे? नहीं..  और अगर उस जमीन पर हाथी ही घुस जाए तो क्या खाने से ज्यादा चावल कुचले नहीं जाएंगे.’

वित्त मंत्री ने कहा, ‘मैं करदाताओं का धन्यवाद करती हूं. उनके योगदान से सरकार विकास के कार्यों को गति देने में सफल रही है. डायरेक्ट टैक्स – पिछले कुछ सालों में बढ़ा है. 11.73 लाख करोड़ रूपए पिछले साल आया है. डबल डिजिट ग्रोथ दिख रहा है. छोटे कारोबारियों और वेतनभोगियों को टैक्स से छूट दी गई है. पांच लाख से ज्यादा की आमदनी पर ही टैक्स लगता है.’

वहीं दूसरी ओर इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद को लेकर लिये गये कर्ज पर ब्याज भुगतान में 1.5 लाख रुपये की आयकर छूट दी जाएगी. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश करते हुए ऐलान किया कि दो करोड़ से पांच करोड़ रुपये और पांच करोड़ रुपये से अधिक की कर योग्य आय वाले करदाताओं पर अधिभार बढ़ाया गया. इस वृद्धि से उनकी प्रभावी कर दर क्रमश: तीन प्रतिशत और सात प्रतिशत बढ़ जायेगी.

बजट में ई-व्हीकल खरीदने वालों को 1.50 लाख रुपये तक के लोन पर ब्याज में आयकर छूट का प्रस्ताव किया गया है.

वित्त मंत्री ने कहा कि 4000 करोड़ टर्नओवर वाली कंपनी पर 25 फीसदी की दर से टैक्स लगेगा. सस्ते मकान की खरीद पर 3.5 लाख रुपये की छूट मिलेगी. यह छूट 45 लाख रुपये तक का मकान खरीदने वालों को मिलेगी. पहले इस छूट की सीमा 2 लाख रुपये तक थी. अब 3.5 लाख रुपये तक के ब्याज पर टैक्स नहीं लगेगा. साल में एक करोड़ रुपये से अधिक निकालने पर 2 फीसदी टीडीएस लगेगा.

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इतना ही नहीं इस बार आयकर चुकाने के तरीके को भी आसान कर दिया है. अब टैक्स भरते समय सैलरी इनकम, बैंकों से मिले ब्याज, अन्य कारोबार से इनकम की डिटेल पहले से भरी हुई मिलेगी.