हैप्पी न्यू ईयर वाले ग्रीटिंग कार्ड को डाक से नहीं भेजेंगे रामविलास, कॉस्ट कटिंग या सियासी कवायद?

कार्ड्स को डाक से भेजे जाने की जगह इस बार पार्टी पदाधिकारी एक साथ सारा कार्ड पटना ले जाएगा. इसके बाद स्थानीय नेता और कार्यकर्ता इसे सही लोगों तक पहुंचाएंगे.
ramvilas paswan postal cost cutting, हैप्पी न्यू ईयर वाले ग्रीटिंग कार्ड को डाक से नहीं भेजेंगे रामविलास, कॉस्ट कटिंग या सियासी कवायद?

नए साल और ग्रिटिंग कार्ड (Greeting card) को लेकर केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान (Ramvilas paswan) ने कॉस्ट कटिंग की ओर कदम बढ़ाया है. लोक जनशक्ति पार्टी के प्रमुख रामविलास पासवान के इस फैसले के बाद पटना में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं का काम बढ़ गया है. उनके दशकों की इस रवायत को बदले जाने के साथ ही राजनीतिक सरगर्मी भी बढ़ गई है.

दरअसल रामविलास पासवान बीते कई वर्षों से अपने लोकसभा क्षेत्र के सभी समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं को बड़ी संख्या में हैप्पी न्यू ईयर (Happy New year) वाला ग्रीटिंग कार्ड भेजते थे. हर साल की तरह इस बार ये हजारों कार्ड्स साधारण डाक से नहीं भेजे जाएंगे. इसके पीछे डाक खर्च कम करने और समय की किल्लत का हवाला दिया गया है.

केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री ने फैसला किया है कि पार्टी का एक पदाधिकारी इस बार नए साल के ग्रीटिंग कार्ड बांटे जाने का काम देखेगा. कार्ड्स को डाक से भेजे जाने की जगह इस बार पार्टी पदाधिकारी एक साथ सारा कार्ड पटना ले जाएगा. इसके बाद स्थानीय नेता और कार्यकर्ता इसे सही लोगों तक पहुंचाएंगे.

राम विलास पासवान के इस फैसले के बाद लोगों में राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है. सवाल उठने लगे हैं कि क्या वाकई यह डाक खर्च को कम करने के लिए उठाया गया कदम है या फिर कोई राजनीतिक कवायद है. बिहार में इस साल विधानसभा चुना होनेवाले हैं. वहीं सीट बंटवारे को लेकर एनडीए के दो बड़े दल बीजेपी और जेडीयू के बीच बयानबाजी हो रही है. एनडीए के घटक लोजपा प्रमुख के इस कदम को पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश बढ़ाने की कोशिश से भी जोड़कर देखा जा रहा है.

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