जयंत सिन्हा बोले- मैं और बीजेपी नेता करेंगे झारखंड लिंचिंग आरोपियों की आर्थिक मदद

ये वही मंत्री हैं, जो कि उस समय विवादों में घिर गए थे, जब जमानत पर छूटने के बाद इस मामले के छह आरोपियों को सीधे हजारीबाद स्थित मंत्री के आवास पर ले जाया गया था.

रांची: केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा ने कहा कि वे और अन्य भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेता साल 2017 में झारखंड के रामगढ़ में मीट व्यापारी की हत्या के आरोपियों की आर्थिक रूप से सहायता करेंगे, ताकि वे कोर्ट में अपनी कानूनी मदद कर सकें.

बीबीसी हिंदी से बातचीत के दौरान जयंत सिन्हा ने कहा, “वे एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखते हैं. उनके परिवार ने हमसे आर्थिक रूप से मदद करनेे की गुहार लगाई है ताकि वे अपने लिए कोई अच्छा वकील कर सकें. मैं और मेरे साथ पार्टी के अन्य नेता उन्हें आर्थिक मदद देंगे ताकि वे वकील की फीस दे सकें.”

ये वही मंत्री हैं, जो कि उस समय विवादों में घिर गए थे, जब जमानत पर छूटने के बाद इस मामले के छह आरोपियों को सीधे हजारीबाद स्थित मंत्री के आवास पर ले जाया गया था.

इसके साथ ही सिन्हा ने कहा, “मुझे पीड़ित के परिवार से सहानुभूति है और लिंचिंग की निंदा करता हूं. जो भी हुआ वह नहीं होना चाहिए था लेकिन जो लोग मेरे घर आए वो निर्दोष थे. आपने यह धारणा बना ली है कि वे अपराधी थे. आपकी यह धारणा त्रुटिपूर्ण है.”

इसके आगे केंद्रीय मंत्री ने कहा, “अगर कोई इस केस को स्टडी करता है, इसके बारे में सोचता है और हाई कोर्ट के दिए बेल ऑर्डर को पढ़ता है, तो उससे साबित होता है कि जो लोग मेरे घर आए वे निर्दोष थे. जब मैं पूर्ण न्याय की बात करता हूं, तो मेरा मतलब है कि पीड़ित को न्याय जरूर मिलना चाहिए, लेकिन जो लोग निर्दोष थे, उन्हें गलत तरीके से सजा देना गलत है, एक साल के लिए जेल भेज देना गलता है और उन्होंने भी सही न्याय मिलना चाहिए.”

इसके साथ ही सिन्हा ने यह दावा भी किया कि अगर पीड़ित परिवार उनसे मदद मांगने आता है तो वे उनकी आर्थिक रूप से मदद जरूर करेंगे.

गौरतलब है कि 2017 में रामगढ़ में अलीमुद्दीन अंसारी की कुछ लोगों ने गोमांस ले जाने के शक में पीट-पीटकर हत्या कर दी थी. इतना ही नहीं आरोपियों ने अंसारी की गाड़ी को आग भी लगा दी थी. अंसारी को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जिसके बाद वे जिंदगी की जंग हार गए थे.

पुलिस ने इस मामले में 12 लोगों को गिरफ्तार किया था. 21 मार्च, 2018 को रामगढ़ में फास्ट ट्रेक कोर्ट ने आरोपियों को दोषी मानते हुए उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी. तीन महीने बाद इनमें से आठ आरोपियों को सबूत के आभाव में झारखंड हाई कोर्ट ने बेल दे दी थी.