UAPA में हुए बदलाव को SC में चुनौती, याचिकाकर्ता ने कहा- मूल अधिकारों के खिलाफ है ये कानून

याचिका में कहा गया है कि इस कानून से सरकार को यह शक्ति मिल गई है कि वो किसी भी व्यक्ति को जांच के आधार पर आतंकवादी घोषित कर सकती है.

नई दिल्ली: करीब एक हफ्ते पहले संसद से पास किए गए गैरकानूनी गतिविधि निवारण अधिनियम (यूएपीए) कानून में संशोधन को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है. सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जनहित याचिका में मांग की गई है कि ये कानून संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के खिलाफ है. संसद से पास किए गए कानून के मुताबिक केन्द्र सरकार किसी भी व्यक्ति को आतंकवादी की श्रेणी में डाली सकती है, चाहे उसके साथ कोई समूह जुड़ा हो या न हो.

‘मूल अधिकारों का उल्लंघन होगा’
दिल्ली के रहने वाले सजल अवस्थी ने याचिका दाखिल करते हुए कहा है कि ये यूएपीए 2019 संविधान में दिए गए मूलभूत अधिकारों के खिलाफ है. याचिका में कहा गया है कि इस कानून से सरकार को यह शक्ति मिल गई है कि वो किसी व्यक्ति को जांच के आधार पर आतंकवादी घोषित कर सकती है. ऐसे में मूल अधिकारों का उल्लंघन और दुरूपयोग होगा.

इस बिल के क्लॉज नंबर पांच और छह पर विपक्षी दल कांग्रेस को आपत्ति थी, लेकिन ये आपत्ति संसद में संख्याबल के सामने नहीं टिकी. इस बिल के समर्थन में 147 वोट पड़े जबकि विपक्ष में महज 42 वोट पड़े.

‘सरकार घोषित कर देगी आतंकवादी’
याचिका में कहा गया है कि यूएपीए के तहत कोई भी व्यक्ति अगर आतंकवादी गतिविधियों को प्रोत्साहित या उसमें लिप्त पाया जाता है तो सरकार उसे आतंकवादी घोषित कर देगी.

इस बिल के दुरुपयोग को लेकर विपक्षी पार्टी कांग्रेस और अन्य दलों ने सवाल खड़ा किया था. गौरतलब है कि लोकसभा में गृह मंत्री अमित शाह ने जवाब में कहा था कि सरकार की प्राथमिकता आतंकवाद को जड़ से मिटाना है.

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