उन्नाव केसः गैंगरेप के दिन आरोपी के अस्पताल में भर्ती होने का दावा, डॉक्टर बोले- मेडिकल स्लिप फर्जी

पीएचसी, समरपुर के इंचार्ज मेडिकल अफसर (आयुष) डॉ. जितेंद्र यादव ने बताया कि उन्होंने रिकॉर्ड की जांच की है. उन्होंने पूरे यकीन के साथ कहा कि इस तारीख में शुभम त्रिवेदी नाम का कोई मरीज आईपीडी में भर्ती नहीं किया गया था.

उन्नाव में गैंगरेप और पीड़िता जलाकर मार देने के पांच आरोपियों में एक शुभम त्रिवेदी के बीमार और अस्पताल में भर्ती होने की बात झूठी पाई गई है. त्रिवेदी की ओर से बीते महीने कोर्ट में दस्तावेज पेश कर बताया गया था कि वह रेप की बताई जा रही तारीख पर अस्पताल में भर्ती था.

इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी), समरपुर के अधिकारियों ने दस्तावेज के झूठे होने की पुष्टि की है. उन्होंने कहा कि शुभम त्रिवेदी के नाम से पेश की गई मेडिकल रजिस्ट्रेशन स्लिप फर्जी है. बताए जा रहे उन दिनों में शुभम त्रिवेदी नाम का कोई भी मरीज भर्ती नहीं किया गया था.

उन्नाव की 23 साल की युवती के गैंगरेप और मारने के आरोपियों में एक शुभम ने कोर्ट में रजिस्ट्रेशन स्लिप को बतौर सबूत पेश कर कहा था कि वह बीते साल 10 दिसंबर को पीएचसी में भर्ती हुआ था और पांच दिन के बाद वहां से डिस्चार्ज किया गया था. पीड़िता ने पुलिस को बताया था कि बीते साल 12 दिसंबर को उसके साथ शुभम त्रिवेदी और उनके दोस्त शिवम ने गैंगरेप किया था.

इस साल पांच मार्च को मामले की एफआईआर दर्ज की गई थी. शुभम के पिता हरिशंकर भी पीड़िता को जलाकर मार देने के मामले में पांच आरोपियों में शामिल हैं. उन्होंने हाई कोर्ट में मेडिकल रजिस्ट्रेशन स्लिप पेश कर कहा था कि बताई जा रही तारीख पर शुभम बीमार और अस्पताल में भर्ती था. इसलिए उसका नाम गैंगरेप के एफआईआर से हटा दिया जाए.

मेडिकल रजिस्ट्रेशन स्लिप के मुताबिक मरीज शुभम हाइड्रोसिल में सूजन की बीमारी से पीड़ित था और ऑपरेशन के लिए उसे भर्ती किया गया था. स्लिप के दूसरे पन्ने पर मरीज के अलग-अलग दिनों के इलाज के बारे में बताया गया था.

पीएचसी, समरपुर के इंचार्ज मेडिकल अफसर (आयुष) डॉ. जितेंद्र यादव ने बताया कि उन्होंने रिकॉर्ड की जांच की है. उन्होंने पूरे यकीन के साथ कहा कि इन तारीखों में शुभम त्रिवेदी नाम का कोई मरीज आईपीडी में भर्ती नहीं किया गया था. उन्होंने कहा कि पेश की गई स्लिप ओपीडी की है और किसी भी अस्पताल में ओपीडी में कोई मरीज भर्ती नहीं किया जाता.

ओपीडी स्लिप में साफ दिख रहा है कि उसमें किसी डॉक्टर का नाम दर्ज नहीं है. वहीं स्लिप पर पीएचसी के स्टांप के साथ तत्कालीन मेडिकल अफसर (प्रथम) डॉ. राहुल वर्मा या मेडिकल अफसर (द्वितीय) डॉ. सागर सिंह का दस्तखत भी नहीं है. सबसे अहम बात मेडिकल स्लिप पर दर्ज रजिस्ट्रेशन नंबर 28290 को माना जा रहा है. अफसरों के मुताबिक किसी भी पीएचसी में साल भर में इतने मरीजों का रजिस्ट्रेशन होना मुमकिन नहीं है.

डॉ. यादव ने बताया कि बताए जा रहे दिनों में 24 घंटे के दौरान इस तरह के किसी मरीज या उसके इलाज से जुड़ी फैसलिटी मुहैया या एक्सपर्ट डॉक्टर की तैनाती भी नहीं की गई थी. उन्होंने बताया कि पीएचसी में 6 बेड हैं और लगभग 14-15 मेडिकल स्टाफ हैं. इनमें चार डॉक्टर हैं पर कोई सर्जन नहीं हैं. यहां का ऑपरेशन थियेटर मंथली स्टर्लाइजेशन कैंप के दौरान ही इस्तेमाल किया जाता है.

इसी पीएचसी में पीड़िता पहली बार 5 दिसंबर को जली हुई हालत में लाई गई थी. यहां से पीड़िता को उन्नाव जिला अस्पताल में रेफर कर दिया गया था. डॉ. यादव ने बताया कि उन्हें मेडिकल रजिस्ट्रेशन स्लिप के बारे में मीडिया रिपोर्ट्स से पता चला. किसी भी अधिकारी ने उनसे इस बारे में जांच या पुष्टि के लिए कोई संपर्क नहीं किया गया.

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