जब तक जारी न हो निर्देश तब तक ऑनलाइन क्लासेज पर लगाई जाए रोक, सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल

याचिका में कहा गया है इन स्कूलों में 25 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं, जो EWS कैटेगरी में आते हैं जिनके पास ऑनलाइन क्लासेस करने के लिए जरूरी स्मार्ट फोन, टैबलेट या लैपटॉप नहीं है. इनकी शिक्षा की जिम्मेदारी पूरी तरह सरकार की है. ऑनलाइन क्लासेज की वजह से ऐसे स्टूडेंटन शिक्षा से वंचित हो रहे हैं.
online classes in lockdown, जब तक जारी न हो निर्देश तब तक ऑनलाइन क्लासेज पर लगाई जाए रोक, सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल

लॉकडाउन के चलते सभी स्कूल बंद हैं. पढ़ाई ऑनलाइन हो रही है. फिर भी स्कूल अभिभावकों से पूरी फीस वसूल रहे हैं. इस मामले लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर हुई है. आठ राज्यों के पेरेंट्स ने फीस वसूली के मामले में स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट से दिशानिर्देश जारी करने की मांग की है.

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याचिका में लॉकडाउन के दौरान निजी स्कूलों की अप्रैल से जून तक की तीन महीने की फीस माफ करने और नियमित स्कूल शुरू होने तक फीस रेगुलेट किए जाने की मांग की गई है. यह भी मांग है कि फीस न देने के कारण बच्चों को स्कूल से न निकाला जाए, क्योंकि कोरोना महामारी के चलते हुए राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन में रोजगार बंद होने से बहुत से अभिभावक फीस देने में असमर्थ हो गए हैं.

ऑनलाइन क्लासेस पर लगाई जाए रोक

याचिका में कहा गया है कि जब तक ऑनलाइन क्लासेस को लेकर कोई दिशानिर्देश जारी नहीं हो जाता, तब तक सभी ऑनलाइन क्लासेज पर रोक लगाई जानी चाहिए. याचिकाकर्ताओं ने अपने-अपने राज्य सरकारों को प्रतिवादी बनाते हुए सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि सभी आठ राज्यों राजस्थान, ओडिशा, गुजरात, पंजाब, दिल्ली, महाराष्ट्र, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश को या फिर सभी राज्यों को इस बारे में आदेश दे.

कई राज्यों के रहने वाले कुल दस अभिवावकों की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया है कि वे लोग जीवन और शिक्षा के मौलिक अधिकार की रक्षा के लिए मिल कर सुप्रीम कोर्ट आए हैं. कोरोना महामारी के चलते स्कूलों में पढ़ रहे बारहवीं तक के छात्रों के बहुत से अभिवावकों की फीस देने की आथिर्क क्षमता नही रही है, उन्हें बच्चों को स्कूल से निकालने पर मजबूर होना पड़ रहा है.

शिक्षा से वंचिर हो रहे हैं छात्र

याचिका में कहा गया है इन स्कूलों में 25 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं, जो EWS कैटेगरी में आते हैं जिनके पास ऑनलाइन क्लासेस करने के लिए जरूरी स्मार्ट फोन, टैबलेट या लैपटॉप नहीं है. इनकी शिक्षा की जिम्मेदारी पूरी तरह सरकार की है. ऑनलाइन क्लासेज की वजह से ऐसे स्टूडेंटन शिक्षा से वंचित हो रहे हैं.

याचिका में कहा गया कि अभी बोर्ड के नतीजे नहीं आए हैं, बच्चे ये नहीं जानते कि उन्हें किस स्ट्रीम में जाना है. बच्चों के पास किताबें और स्टेशनरी नहीं हैं इसलिए वे पढ़ाई के दौरान संदर्भ नहीं समझ पाते. बहुतों के पास लैपटाप, स्मार्ट फोन नहीं है. जिन घरों में दो या ज्यादा बच्चे हैं उन्हें ऐसे ज्यादा उपकरण चाहिए होते हैं. नेटवर्क चला जाता है. पढ़ाई का कोई प्रभावी तंत्र नहीं है. याचिका में यह भी कहा गया है कि स्कूल तो ऑनलाइन क्लास के लिए अतिरिक्त शुल्क भी वसूल रहे हैं. इस याचिका पर इसी हफ़्ते सुनवाई होने की उम्मीद है.

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