ब्रह्मोस का अपग्रेडेड वैरिएंट, जिसे दागो और भूल जाओ, घबराहट में चीन जारी कर रहा प्रोपेगेंडा वीडियो

तीन टन वजन वाली इस मिसाइल की रेंज 450 किलोमीटर है. ये 200 किलो तक के वारहेड ले जा सकती है और 20 किलोमीटर पर ये मिसाइल रास्ता बदलने की क्षमता रखती है.

ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल (FILE)

चीन से तनातनी के बीच गुरुवार को भारतीय विदेश मंत्रालय ने दो बड़ी बातें कहीं. पहला ये कि लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश हिंदुस्तान का अभिन्न हिस्सा है और दूसरा ये कि दोनों ही मुल्क बातचीत की वर्तमान गति को बनाए रखें. इसका मतलब ये कि भारत सख्ती से चीन के सामने इस बात के लिए अड़ा है कि वो मई से पहले वाली स्थिति में लौट जाए. इस बीच DRDO ने सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस के एक्सटेंडेड वैरिएंट का वीडियो जारी किया है.

तीन टन वजन वाली इस मिसाइल की रेंज 450 किलोमीटर है. ये 200 किलो तक के वारहेड ले जा सकती है और 20 किलोमीटर पर ये मिसाइल रास्ता बदलने की क्षमता रखती है. 30 सितंबर को एक्सटेंडेड रेंज वाली ब्रह्मोस मिसाइल का परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर में किया गया था. इस मिसाइल को तीनों सेनाओं में शामिल किया गया है. दुनिया की सबसे तेज ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल के बारे में कहा जाता है. दागो और भूल जाओ यानी अगर हिमालय के इस पार से भारत ये मिसाइल फायर करे, तो उस पार तबाही पसर जाएगी.

ब्रह्मोस मिसाइल की शक्ति का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि चीन की सेना कहती है कि LAC पर ब्रह्मोस की तैनाती के बाद से उनके तिब्बत और यूनान प्रांत पर खतरा मंडराने लगा है और इन सबके बीच लद्दाख का मौसम चीनी सैनिकों को मारने लगा है. हिमालय पर खून जमाने वाली सर्दी में लाल सेना की लाशें बिछने लगी हैं.

इसे चीन का शक्ति प्रदर्शन कहें या ड्रैगन की बौखलाहट? इसे जिनपिंग का एजेंडा कहें या उनके भोंपू मीडिया का प्रोपेंगेंडा? इसमें दोराय नहीं कि विश्व में अगर वीडियो वॉर कॉम्पिटिशन हो जाए, तो चोरी की तकनीक से ही सही. चीन बाजी मार लेगा.

ड्रैगन का एक और प्रोपेगेंडा वीडियो

भारत चीन तनातनी के बीच ड्रैगन का एक और प्रोपेगेंडा वीडियो आया है, जिसमें एक खास लॉन्चर से ड्रोन को लॉन्च किया जा रहा है. इसके अलावा हेलिकॉप्टर से भी ड्रोन को गिराया जा रहा है, मतलब चीन ये बताना चाह रहा है कि UAV यानी मानवरहित विमानों के मामले भी वो कितना ताकतवर है. अब उसे कौन समझाए कि जब चीन की सेना की ही ताकत लद्दाख में जवाब दे रही है. तो ये खिलौने वाले हथियार कितनी देर टिक पाएंगे?

इस बीच सूत्रों के हवाले से खबर आई कि LAC पर तैनात PLA के 80 जवानों की ठंड से मौत हो चुकी है. LAC के पास नॉर्थ पैंगोंग से PLA के सैनिकों के शवों को निकाला गया है. स्ट्रेचर के जरिए बीमार सैनिकों को पास के अस्पताल में शिफ्ट किया गया है. अभी भी कई चीनी सैनिकों की ठंड से हालत खराब है. जवानों की मौत से घबराये PLA ने सैनिकों की रोटेशन प्रक्रिया अपनाई है. हर दो हफ्ते में LAC पर सैनिक बदले जा रहे हैं.

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