कम से कम 50 फीसदी मामलों में प्रभावी हो कोरोना वैक्सीन, तभी मिलेगा भारत में अप्रूवल

दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि ज़रूरी हुआ तो ड्रग रेगुलेटर (दवा नियामक) सुरक्षा के नज़रिए से इन कंपनियों को भारतीय आबादी पर अतिरिक्त परीक्षणके लिए कह सकता है.

  • TV9 Hindi
  • Publish Date - 12:15 pm, Tue, 22 September 20
Corona Vaccine
सांकेतिक तस्वीर

भारत में कोविड 19 वैक्सीन (COVID 19 Vaccine) पर काम करने वाली कंपनियों को ये सिद्ध करना होगा कि जिन्हें वैक्सीन दी गई है उसके कम से कम आधे लोग संक्रमण से सुरक्षित हैं. टीके की मंजूरी के लिए ज़रूरी है कि वो बेहतर एंटीबॉडी और सेलुलर प्रतिक्रियायों को बढ़ावा देते हों.

भारत के ड्रग्स कंट्रोलर जनरल द्वारा सोमवार को जारी किए गए कोविद -19 वैक्सीन के लिए दिशा-निर्देशों के अनुसार भारत के बाहर विकसित वैक्सीन क्लीनिकल ट्रायल डाटा के आधार पर मार्केटिंग ऑथराइजेशन के लिए आवेदन कर सकती हैं. अगर ज़रूरी हुआ तो ड्रग रेगुलेटर (दवा नियामक) सुरक्षा के नज़रिए से इन कंपनियों को भारतीय आबादी पर अतिरिक्त परीक्षण के लिए कह सकता है.

तत्काल ज़रूरत के चलते प्रत्याशित था ये दिशा-निर्देश

विश्व स्वास्थ्य संगठन और अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन से प्रेरणा लेते हुए ये दिशा-निर्देश काफी वक्त से प्रत्यशित हैं. 39 पेजों के दस्तावेज़ में कई सुरक्षा प्रोटोकॉल को सूचीबद्ध किया गया है, जिनका कंपनियों को पालन करना है. कोविड-19 वैक्सीन की तत्काल ज़रूरत को देखते हुए संक्रमण के खिलाफ अल्पकालिक या दीर्घकालिक सुरक्षा के लिए वैक्सीन की जांच की जा सकती है.

तब होगा अप्रूवल जब..

दिशा-निर्देशों के मुताबिक वैक्सीन के अनुमोदन (अप्रूवल) के बाद SARS-CoV-2 संक्रमण या बीमारी से सुरक्षा में वैक्सीन की प्रभावकारिता के प्रत्यक्ष प्रमाण को पोस्ट मार्केटिंग में सही तरीके से एक्सेस किया जाना चाहिए. टीकों के लिए मार्केंटिंग अप्रूवल उसी स्थिति में होगा जब ये प्राइमरी एंड पॉइन्ट पर 50 फीसदी जबकि सेकेंड्री एंड पॉइन्ट पर 30 फीसदी प्रभावकारिता (इफिसियेंसी) वाली हों.

इसका मतलब यह है कि टीका कम से कम 50% लोगों को टीकाकरण में बीमारी की गंभीरता को रोकने या कम करने में कारगर हो. दिशानिर्देशों के अनुसार, वैक्सीन जो अनुमोदन के लिए जाएगी उसे कोविद -19 के खिलाफ टीकाकरण की तुलना में बेहतर प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया प्राप्त करनी होगी. वैक्सीन प्राप्त करने वाले व्यक्ति को कम से कम एक वर्ष के लिए पुन: संक्रमण से बचाए जाने की क्षमता हो.