LIVE: लोकसभा में गूंजा CCD फाउंडर वीजी सिद्धार्थ की ‘आत्‍महत्‍या’ का मुद्दा

सिद्धार्थ भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और यूपीए-2 सरकार में विदेश मंत्री रह चुके एसएम कृष्णा के सबसे बड़े दामाद हैं.

कर्नाटक: कैफे कॉफी डे (सीसीडी) के संस्थापक वीजी सिद्धार्थ का शव मंगलुरु के पास नेत्रवती नदी से बरामद हुआ है. वीजी सिद्धार्थ सोमवार शाम से लापता थे.

लोकसभा में कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने सिद्धार्थ की मौत का मुद्दा उठाया. उन्‍होंने सरकार से पूरे मामले की जांच कराने की मांग करते हुए सदन में कहा कि सिद्धार्थ को खुदकुशी के लिए मजबूर किया गया. उन्‍होंने कहा कि आयकर विभाग ने सिद्धार्थ को परेशान किया. बीजेपी सांसद सुब्रमण्‍यम स्‍वामी ने भी कांग्रेस जैसे सुर अपनाए और कहा कि आयकर अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए.

वीजी सिद्धार्थ का शव पोस्टमॉर्टम के बाद उनके गांव चीकानहल्लि लाया जाएगा जो चिकमंगलुरू के पास है.

श्रीनगेरी विधायक टीडी राजेगौड़ा ने कहा, ‘परिवारवालों ने तय किया है कि उनका अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव बेलुर तालुक में किया जाएगा.’

पुलिस पहले से ही नेत्रवती नदी में कूदकर आत्महत्या करने का संदेह जता रही थी. मंगलवार से ही पुलिसकर्मी, तटरक्षक बल, गोताखोर और मछुआरे सहित लगभग 200 लोग नदी के उस इलाके में खोजबीन में लगे हुए थे जहां सिद्धार्थ के कूदने की आशंका थी.

इससे पहले सिद्धार्थ (60) के कार चालक बसवराज पाटिल ने मंगलुरू में एक पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कराया कि उनके मालिक पुल से लापता हो गए थे, जहां वह कार से उतरे थे और कुछ देर टहलना चाहते थे.

चालक द्वारा दर्ज मामले के अनुसार, “सिद्धार्थ नेत्रवती नदी के पुल पर कार से उतर गए और यह कहकर कि वह थोड़ी देर सैर करना चाहते हैं, उसे पुल के दूसरे छोर पर इंतजार करने के लिए बोलकर चले गए, लेकिन एक घंटे बाद भी नहीं लौटे.”

पुलिस को शक है कि सिद्धार्थ बहती नदी में कूद गए होंगे तभी ड्राइवर को वहां नहीं मिले.

सिद्धार्थ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ नेता और यूपीए-2 सरकार में विदेश मंत्री (2009-2012) रह चुके एसएम कृष्णा के सबसे बड़े दामाद हैं. कृष्णा 1999 से 2004 के बीच कर्नाटक के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं.

सिद्धार्थ ने 18 मार्च को 10 रुपये की फेस वैल्यू पर 980 रुपये प्रति शेयर की दर से शहर में सॉफ्टरवेयर कंपनी माइंडट्री लिमिटेड में अपने कुल 20 प्रतिशत शेयर मुंबई की कंपनी लार्सन एंड टॉब्रो (एल एंड टी) को 3,300 करोड़ रुपये में बेच दिए थे. वह अपनी कंपनी पर चढ़े कर्ज को चुकाना चाह रहे थे.

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