सावरकर को लेकर मनमोहन सिंह और अमित शाह आमने-सामने

सत्‍ताधारी भाजपा सावरकर को स्‍वतंत्रता संग्राम का नायक बताते हुए 'भारत रत्‍न' देने की मांग कर रही है. वहीं कांग्रेस का कहना है कि वह उनकी हिंदुत्व आइडियोलॉजी के पक्ष में नहीं है.

विनायक दामोदर सावरकर के व्‍यक्तित्‍व को लेकर सत्‍ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने है. सत्‍ताधारी भाजपा उन्‍हें स्‍वतंत्रता संग्राम का नायक बताते हुए ‘भारत रत्‍न’ देने की मांग कर रही है. वहीं विपक्षी कांग्रेस का कहना है कि वह सावरकर की हिंदुत्व आइडियोलॉजी के पक्ष में नहीं है.

भाजपा अध्‍यक्ष और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने गुरुवार को बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में सावरकर की खूब तारीफ की. उन्‍होंने भारत के स्‍वतंत्रता आंदोलन के इतिहास को फिर से लिखने की जरूरत बताई. दूसरी तरफ, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मुंबई में राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ के स्‍वतंत्रता आंदोलन में योगदान पर सवाल उठाए.

सावरकर पर क्‍या बोले अमित शाह

“वीर सावरकर न होते तो 1857 की क्रांति को पहले स्वतंत्रता आंदोलन का नाम नहीं मिलता और वह बगावत में ही रह जाता. अंग्रेजों के जाने के बाद इतिहासकारों के साथ इतिहास नए दृष्टिकोण से लिखने की जरूरत है.”

“भारतीय इतिहास के पुनर्लेखन की जरूरत है. इसके लिए हमें ही आगे आना होगा. इसमें इतिहासकारों की बड़ी भूमिका है. अगर हम अब तक अपने इतिहास की दोबारा समीक्षा नहीं कर सके तो यह हमारी कमजोरी है.”

मनमोहन ने सावरकर पर क्‍या कहा

“इंदिरा गांधी ने वीर सावरकर के पोस्टर स्टैम्प जारी किए थे. हम सावरकर जी के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन सावरकर जी की हिंदुत्व आइडियोलॉजी के पक्ष में नहीं हैं.”
“बीजेपी ने सावरकर को भारत रत्न देने की बात अपने घोषणा पत्र में कही है.
“कांग्रेस पार्टी से ज्यादा देशभक्त नही है. बीजेपी और आरएसएस का नाम तक आज़ादी की लड़ाई में नज़र नही आता.”

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