सौर्यमंडल से बाहर इस ग्रह पर मिला पानी! पृथ्वी से दूर मानव अब रखेगा यहां कदम

वैज्ञानिकों ने के2-18 नामक बौने तारे का चक्कर लगाने वाले एक और ग्रह की भी खोज की है.

नई दिल्ली: खगोलविदों ने पहली बार एक्सोप्लेनेट के वातावरण में झांका है और पाया है कि सौर्यमंडल से बाहर एक प्लेनेट ऐसा भी है जहां जीवन की संभावना है. वैज्ञानिकों ने इस ग्रह पर भाप (यानी की पानी) और जीवन पनपने के अनुसार तापमान पाया है.

इस एक्सोप्लेनेट को ‘के2-18बी’ के नाम से जाना जाता है. यह ग्रह पृथ्वी जैसा ही है जबकि आकार में यह कई गुना ज़्यादा बड़ा है. इस कारण इसे सुपर अर्थ भी कहा जाता है. टोरंटो यूनिवर्सिटी, कनाडा के वैज्ञानिकों का कहना है कि पथरीली सतह वाले इस ग्रह पर जीवन होने की संभावना अधिक है.

2015 में के2-18 बी की खोज के वक्त पाया गया था कि यह ग्रह अपने तारे से ठीक उतनी दूरी पर है, जितना रहने योग्य वातावरण के लिए जरूरी है. यहां पर पानी भी होने की संभावना है जो जीवन के लिए सबसे महत्वपूर्ण तत्व है.’ शोधकर्ताओं के अनुसार के2-18 बी अब वायुमंडलीय अध्ययन के लिहाज से अहम हो जाएगा.

समझते हैं कि एक्सोप्लेनेट क्या होता है? वो ग्रह जो सूर्य के अलावा किसी और तारे के चारों ओर घूमता है. यह ग्रह हमारे सौरमंडल के बाहर किसी तारे की परिक्रमा करता है उसे एक्सोप्लेनेट कहते हैं.

यह ख़बर इसलिए भी है महत्वपूर्ण क्योंकि धरती पर जलस्तर कम होता जा रहा है. ऐसा में वैज्ञानिक दूसरे ग्रह पर जीवन की संभावना तलाश रहे हैं.

यह ग्रह पृथ्वी से 110 प्रकाश वर्ष दूर स्थित है. वैज्ञानिकों ने के2-18 नामक बौने तारे का चक्कर लगाने वाले एक और ग्रह की भी खोज की है. मुख्य शोधकर्ता रेयान क्लोटियर ने कहा, ‘के2-18बी के भार और घनत्व का पता लगाने में सफल होने के साथ अन्य ग्रह को ढूंढ़ निकालना रोमांचकारी था.