बालाकोट एयर स्‍ट्राइक के पायलट ने कहा- सिर्फ 90 मिनट में निपटाया मिशन, परिवार तक को नहीं थी भनक

हमले की सटीकता पर एयर स्ट्राइक को अंजाम देने वाले पायलट ने कहा, 'बेशक, हमने उन्हें मारा. हमारा निशाना बिलकुल सटीक था.'

नई दिल्ली: पाकिस्तान के बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ठिकानों पर भारतीय एयर स्ट्राइक को अंजाम देने में सिर्फ 90 सेकेंड का ही समय लगा था और मिशन को इतनी गोपनीयता के साथ किया गया कि हमले की जानकारी टीम के करीबियों को भी नहीं थी. यह कहना है 26 फरवरी को इस ऑपरेशन को अंजाम देने वाले दो पायलटों का.

एयर स्ट्राइक में शामिल मिराज 2000 लड़ाकू विमान के एक पायलट ने कहा, ‘यह 90 सेकंड में खत्म हो गया था. हमने हमला किया और फिर हम वापस आ गए.’ इस मिशन के बारे में किसे जानकारी थी इस पर भारतीय वायुसेना के एक पायलट ने कहा, ‘किसी को भी नहीं, यहां तक की मेरे करीबी और परिवार को भी इसके बारे में पता नहीं था.’ उन्होंने कहा, ‘अगले दिन, जब यह खबर सामने आई, तो मेरी पत्नी ने मुझसे पूछा कि क्या मैं हमले में शामिल था. तब मैं चुप रहा और सो गया.’

भारतीय वायुसेना के हवाई हमले के बारे में सोमवार को बोलते हुए एक अन्य स्क्वाड्रन लीडर ने गोपनीय ऑपरेशन के बारे में कई जानकारी दीं. उन्होंने कहा, “हमने बहुत कॉम्बैट एयर पैट्रोल्स (CAP) को लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) पर उड़ाया.” LoC के पास कई CAPS उड़ाना भारत की एक चाल थी जो पाकिस्तान की हवाई सुरक्षा को भेदने के लिए चली गई थी.

एयर स्ट्राइक के दौरान बिछाया था हवाई जाल

एयर स्ट्राइक के दो दिन पहले ही हमें इसके बारे में संकेत मिले थे. दूसरे पायलट ने बताया, ‘हमें पता था कि कुछ हो रहा है, लेकिन किसी को स्पष्ट जानकारी नहीं थी. उड़ानो की संख्या कई गुना बढ़ गई थी. हम में से कई लोग कई उड़ानें भर रहे थे.

उन्होंने आगे कहा, ‘पिछली CAP और उड़ानें बिना हथियारों की थी, जबकी फरवरी 25 को लगभग 4 बजे, स्पाइस-2000 मिसाइल को मिराज 2000 लड़ाकू विमान पर लोड किया गया था. आतंकी ट्रेनिंग कैंप के स्पेशिफिक कोऑर्डिनेट्स को मिसाइल सिस्टम में फीड किया गया था. स्ट्राइक को अंजाम देने वाले पायलट ने बताया कि “हमने उस रात 2 बजे उड़ान भरी थी.”

26 फरवरी को भारतीय वायु सेना के ऑपरेशन में मिराज 2000 और 2000 आई शामिल थे, जिन्होंने एयर स्ट्राइक को अंजाम दिया. सुखोई 30एस एमकेआई, जो डिकॉय के रूप में काम कर रहे थे, साथ ही मिराज को कवर भी दे रहे थे. फाल्कन एडब्लूएसीएस और एम्ब्रेयर एईडब्लूएस मिड-एयर रिफ्यूएलर्स थे और हेरॉन ड्रोन को हमले के बाद टारगेट की तस्वीर खींचने के लिए तैनात किया गया था.

लंबा रास्ता तय करना भी हमारी रणनीति का हिस्सा था

पायलट ने बताया कि ‘हमने जानबूझकर लंबा रास्ता तय किया, देश के पूर्वी हिस्से में उड़ान भरते हुए जब हम कश्मीर पहुंचे, तो हम रेडियो साइलेंस में चले गए.’ पायलट ने कहा, “महत्वपूर्ण रूप से, पाकिस्तानी लड़ाके हमारे पास कहीं से कहीं तक नहीं थे.’ हमले की सटीकता पर उन्होंने कहा, ‘बेशक, हमने उन्हें मारा. हमारा निशाना सटीक था.’

मालूम हो कि जम्मू कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के दस्ते पर हुए आतंकी हमले में 40 जवानों की शहादत के बाद भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमानों ने 48 साल में पहली बार पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र में प्रवेश किया और पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में जैश के आतंकी शिविरों को तबाह कर दिया था.

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