‘अपने देश को पश्चिम की नजर से न देखें,’ लॉ फैकल्टी-DU और शिक्षण मंडल का अंतरराष्ट्रीय वेबिनार

'हमें अपनी मातृभाषा (Mother Tongue) का उपयोग करना और हमारे देश को 'India' के बजाय 'भारत' कहना जरूरी है.' भारतीय शिक्षण मंडल के ऑनलाइन आयोजन में इस बात पर जोर दिया गया कि भारतीय सभ्यताओं को पश्चिमी संस्कृति की नजर से नहीं देखा जाना चाहिए.
Delhi University international webinar, ‘अपने देश को पश्चिम की नजर से न देखें,’ लॉ फैकल्टी-DU और शिक्षण मंडल का अंतरराष्ट्रीय वेबिनार

अपने देश को ‘इंडिया’ के बजाय ‘भारत’ कहना जरूरी है. भारतीय शिक्षण मंडल (BSM) से जुड़े शिक्षाविद (Educationist) मुकुल कानिटकर ने रविवार को आयोजित वेबिनार में ये विचार रखे. उन्होंने लोगों से अपनी मातृभाषा में बात करने-पढ़ाई करने और उसके विकास में योगदान करने पर जोर दिया है.

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दिल्ली विश्वविद्यालय के लॉ सेंटर कैम्पस की लॉ फैकल्टी और भारतीय शिक्षण मंडल (Indian Board of Education) ने मिलकर ‘हाउ भारत परसिव इंडिया- ए ज्यूरिसप्रुडशियल इनसाइट’ पर तीनों दिनों के अंतरराष्ट्रीय वेबिनार (Webinar) का आयोजन किया. इसमें देश के मशहूर न्यायाधीशों, वरिष्ठ अधिवक्ताओं (Advocates) और शिक्षाविदों ने लोगों को संबोधित किया.

देश को ‘इंडिया’ के बजाय कहना होगा ‘भारत’

USA के डेनवर विश्वविद्यालय के कानून के प्रोफेसर वेद पी नंदा समावेशी (Inclusive) और भारतीय दर्शन के सामने खड़ीं चुनौतियों और उसके समाधान के विषय पर बोले. सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस ए आर दवे, वर्धा के केंद्रीय विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर प्रो. रजनीश शुक्ला ने भी इस दौरान अपनी बातें रखी.

सत्य बनाम कानून पर चर्चा

डॉ. सीमा सिंह ने बताया कि उन्होंने इस विषय को क्यों चुना. प्रोफेसर रमन मित्तल ने धर्म, कानून, सत्य, न्याय आदि मुद्दों पर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि कानून के मुकाबले सत्य ज्यादा शक्तिशाली है.

भारतीय संविधान के निर्माण पर की गई चर्चा

वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन परासरन ने सबरीमाला (Sabarimala) मामले को लेकर धर्म के महत्व पर चर्चा की. जस्टिस इकबाल अंसारी ने कानून और धर्म पर प्रकाश डाला. DSNLU के वीसी प्रोफेसर सूर्य प्रकाश ने भारतीय संविधान के निर्माण और भारतीय दर्शन के साथ इसके संबंध पर जानकारी दी. रिटायर्ड जस्टिस परमोद कोहली, नेपाल के सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता डॉ. रामाकृष्ण तिमलेसेना और बिहार के MGCUB विश्वविद्यालय के VC प्रो संजीव शर्मा ने भी धर्म और भारत के साथ इसके संबंधों पर अपने विचार रखे.

भारत को पश्चिम की नजर से न देखें

देश के पूर्व सीजेआई आर. सी लाहोटी ने कहा कि कानून प्रणाली की बुनियादी नींव की रक्षा करने की जरूरत है. ASG विक्रमजीत बनर्जी ने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय सभ्यताओं को पश्चिमी संस्कृति की नजर से नहीं देखा जाना चाहिए. साथ ही, प्रोफेसर ए पी सिंह, गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय के वीसी प्रो बी पी शर्मा और श्री लक्ष्मी नारायण भाला जैसे मशहूर लेखकों ने भी लोगों को संबोधित किया. प्रोफेसर रमन मित्तल और डॉ. सीमा सिंह ने तीनों दिनों में हुई चर्चाओं के आधार पर तैयार की रिपोर्ट को पढ़ा.

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