सरकार का हवाला देकर नहीं मिले अधिकारी तो गवर्नर बोले- पश्चिम बंगाल में सेंसरशिप है क्या?

गवर्नर धनखड़ ने नॉर्थ 24 परगना में जन प्रतिनिधियों से मिलने की इच्छा जताई थी, जिसके जवाब में जिला प्रशासन ने लिखा कि इस सत्र के लिए आमंत्रितों को बंगाल सरकार की अनुमति चाहिए.
गवर्नर, सरकार का हवाला देकर नहीं मिले अधिकारी तो गवर्नर बोले- पश्चिम बंगाल में सेंसरशिप है क्या?

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने मंगलवार को नॉर्थ 24-परगना जिला प्रशासन के खिलाफ नाखुशी जताई है. दरअसल जिला प्रशासन ने राजभवन को सूचित किया था कि जिला अधिकारियों, सांसदों और विधायकों को निमंत्रण भेजना राज्य सरकार की अनुमति के बिना संभव नहीं है.

मालूम हो कि राज्यपाल ने अपनी पत्नी सुदेश धनखड़ के साथ मंगलवार की सुबह लगभग 8 बजे नॉर्थ 24-परगना के धामाखाली का दौरा किया था. जहां वह प्रशासनिक अधिकारियों, स्थानीय सांसद, विधायक और स्थानीय पंचायत के नेताओं से मिलना चाहते थे.

धनखड़ ने पिछले सप्ताह जिले के अधिकारियों, डीएम और नॉर्थ और दक्षिण 24 परगना जिलों के प्रतिनिधियों के साथ धामाखाली और सजनाखली में बैठक करने की इच्छा व्यक्त की थी. हालांकि, जिला प्रशासन ने सोमवार को उनके सचिव को सूचित किया कि प्रतिनिधियों को निमंत्रण राज्य सरकार की अनुमति के बिना संभव नहीं है.

सरकार की इजाजत के बिना नहीं कर सकते प्रतिनिधियों से अनुरोध

जिला प्रशासन द्वारा लिखे पत्र के मुताबिक, “10 अक्टूबर, 2019 को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल को लिखे एक पत्र के संदर्भ में, आपको सूचित करना है कि जिला परिषद गेस्ट हाउस, धमखली, नॉर्थ 24 परगना में होने वाले इंटरैक्टिव सत्र के लिए आमंत्रितों (सार्वजनिक प्रतिनिधियों) से अनुरोध करने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार की अनुमति आवश्यक है.”

प्रशासन द्वारा भेजे गए पत्र में आगे यह भी जोड़ा गया था कि, “सभी वरिष्ठ सरकारी अधिकारी नॉर्थ बंगाल के कुछ जिलों के लिए मुख्यमंत्री की प्रशासनिक समीक्षा बैठकों के लिए 21 से 23 अक्टूबर तक नॉर्थ बंगाल में होंगे.”

मुझसे मिलने के लिए सरकार की अनुमति की क्या जरुरत

जिले के अधिकारियों के मौजूद न होने से नाखुश गवर्नर धनखड़ ने इसे “असंवैधानिक’ करार दे दिया. उन्होंने कहा, “मुझे समझ नहीं आया कि उन्हें मुझसे मिलने के लिए राज्य सरकार की अनुमति की आवश्यकता क्यों है? मैं हैरान हूं. मुझे नहीं पता कि क्या पश्चिम बंगाल में किसी तरह की सेंसरशिप लागू है.”

नाखुशी जताते हुए उन्होंने राज्य सरकार पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा, “कहने के माफी चाहूंगा, लेकिन ऐसा लगता है कि वे फ्रस्ट्रेटेड (निराश) हैं. मुझसे मिलने से इनकार करने के बावजूद भी मैं जिलों में अपना दौरा जारी रखूंगा.” यह पहला मौका नहीं है जब राज्यपाल धनखड़ और राज्य सरकार के बीच में तनातनी हुई हो.

सिलीगुड़ी में भी नहीं मिलने पहुंचे थे जन प्रतिनिधि

24 सितंबर को धनखड़ भारतीय चैंबर ऑफ कॉमर्स के नए भवन का उद्घाटन करने के लिए सिलीगुड़ी गए थे. जहां उन्होंने जिला प्रशासन और दार्जिलिंग जिले के सांसद, विधायकों के साथ बातचीत करने की इच्छा व्यक्त की थी. हालांकि, उनमें से ज्यादातर ‘बेवजाह के कारणों’ का हवाला देते हुए नहीं आए.’

उसके बाद गवर्नर ने कहा था, “मैं भविष्य में भी उनसे मिलने के लिए तत्पर रहूंगा. केवल सिलीगुड़ी में ही नहीं, मैं भविष्य में पश्चिम बंगाल के सभी जिलों में जाऊंगा. इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कौन मुझसे मिलने आता है और कौन नहीं. मैं राजनीतिक सर्कस में नहीं पड़ूंगा. मैं एक संवैधानिक पद पर हूं और इसके बावजूद कि कोई भी मुझसे क्या कहता है, मैं असहिष्णु नहीं हो सकता.”

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