पश्चिम बंगाल, पंजाब और केरल का नागरिकता संशोधन बिल लागू करने से साफ इनकार

नागरिकता संशोधन बिल सोमवार दरम्यानी रात को लोकसभा में पास हो गया था. जिसके बाद इस बिल को बुधवार के दिन चर्चा के लिए राज्यसभा में पेश किया गया. जहां दिनभर हुई चर्चा के बाद रात को इस बिल को पास करा लिया गया.

नागरिकता संशोधन बिल संसद के दोनों सदनों से पास हो चुका है. अब राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह कानून में परिवर्तित हो जाएगा. हालांकि इसको लेकर विरोध कम नहीं होते दिख रहा है. एक तरफ जहां पूर्वोत्तर में असम और त्रिपुरा में बिल के खिलाफ सड़कों पर प्रदर्शन हो रहे हैं, तो वहीं तीन राज्य सरकारों ने इस बिल को अपने-अपने राज्यों में लागू न करने की बात कही है.

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने तो बिला पारित होने के पहले ही साफ कर दिया था कि वो इसका जमकर विरोध करेंगी और इसे पश्चिम बंगाल में लागू नहीं होने देंगी. ममता बनर्जी ने साफ कहा था कि वह किसी भी कीमत पर एक भी नागरिक को शरणार्थी नहीं बनने देंगी और न ही इसे पश्चिम बंगाल में लागू होने देंगी.

ममता बनर्जी के बाद केरल और पंजाब से भी ऐसे ही सुर सुनाई दे रहे हैं. पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह नागरिकता संशोधन बिल को देश के धर्मनिर्पेक्ष चरित्र पर हमला करार दिया है. इसी के साथ कैप्टन अमरिंदर सिंह ने साफ कर दिया है कि वह इस कानून को पंजाब में लागू नहीं होने देंगे.

पश्चिम बंगाल और पंजाब के अलावा केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने भी अपने राज्य में नागरिकता संशोधन बिल न लागू करने की बात कही है. विजयन ने कहा, ‘केरल इस बिल को कबूल नहीं करेगा. ये बिल असंवैधानिक है. केंद्र सरकार भारत को धार्मिक आधार पर बांटने की कोशिश कर रही है. यह समानता और धर्मनिर्पेक्षता को खत्म करने के लिए उठाया गया कदम है.’

मालूम हो कि नागरिकता संशोधन बिल सोमवार दरम्यानी रात को लोकसभा में पास हो गया था. जिसके बाद इस बिल को बुधवार के दिन चर्चा के लिए राज्यसभा में पेश किया गया. जहां दिनभर हुई चर्चा के बाद रात को इस बिल को पास करा लिया गया. इस बिल के तहत पड़ोसी देश पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में प्रताड़ना झेल रहे छह धर्म के लोगों को भारत में नागरिकता दिलाने वाले नियमों को आसान किया गया है.

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