जानिए संशोधन के बाद कितना मजबूत होगा NIA बिल?

आतंकी हमले जांच करने वाली इस एजेंसी का गठन 26/11 मुंबई हमले के बाद 2009 में किया गया था.

देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी में शामिल NIA हाल ही देश में चर्चा का विषय बनी हुई है. लोकसभा में इस बिल को लेकर अमित शाह और असदुद्दीन ओवैसी के बीच जमकर बहस हुई.

क्या है NIA और NIA संशोधन बिल 2019?

आतंकी हमले जांच करने वाली इस एजेंसी का गठन 26/11 मुंबई हमले के बाद 2009 में किया गया है. इस हमले में करीब 166 लोगों की जाने गई थी. जिसके बाद मौजूद कांग्रेस सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए इसका गठन किया था. मोदी सरकार की ओर इस जांच एजेंसी के अधिकार क्षेत्र में बढ़ोत्तरी के लिए संसद में NIA संशोधन बिल 2019 संसद पेश किया है. फिलहाल लोकसभा में यह बिल पास हो चुका है, जिसे जल्द ही राज्यसभा में पेश किया जाएगा.

NIA संशोधन बिल में होने वाले प्रमुख संशोधन?

आसान भाषा में समझा जाए तो इस बिल का मुख्य उद्देश्य NIA जांच एजेंसी के मौजूद अधिकार क्षेत्र में वृद्धि करना है.  मौजूद संशोधन बिल के बाद मुख्य रूप तीन बदलाव किए जाएंगे.

पहला, मौजूद नियमों अनुसार NIA फिलहाल गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम,1967 और परमाणु ऊर्जा अधिनियम,1962 से जुड़ें मामलों की जांच कर सकती है. इस बिल के पास होने के बाद वह मानव तस्करी, जाली नोट, अवैध हथियारों के निर्माण/बिक्री, साइबर क्राइम सहित कई अन्य मामलों की जांच कर सकेगी.

दूसरा, NIA जांच एजेंसी भारत की सीमा के बाहर और किसी अन्य देश में होने वाले होने वाले अपराध और मामलों की जांच कर सकेगी. अक्टूबर 2009, अफगानिस्तान के भारतीय दूतावास में जब हमला हुआ तब NIA इस मामले में जांच करने में असमर्थ थी. क्योंकि यह मामला भारत की सीमा के बाहर का था. लेकिन मौजूद संशोधन के बाद इस तरह मामलों में NIA जांच कर सकेगी.

तीसरा, मौजूद नियमों के अनुसार केंद्र NIA ट्रायल के लिए स्पेशल कोर्ट गठन कर करती है. इस संशोधन के बाद, केंद्र के पास विशेषाधिकार होगा जिसके बाद वह सेशन कोर्ट को NIA ट्रायल के लिए स्पेशल कोर्ट के रूप में गठन कर सकती है.

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