पितृपक्ष क्‍या है? जानिए इसका महत्‍व और पुरखों के तर्पण का सही तरीका

मान्‍यता है कि पितृपक्ष के दौरान पूर्वजों को पृथ्वी पर आकर परिवार के लोगों से मिलने का मौका मिलता है. इस दौरान कोई भी नया काम नहीं शुरू किया जाता.

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार पितृपक्ष अश्विन मास के कृष्ण पक्ष में पड़ते हैं. इस महीने की शुरुआत पूर्णिमा से होती है और इसकी समाप्ति अमावस्या पर होती है. इस बार पितृपक्ष 14 सितम्बर से शुरू होकर 28 सितम्बर तक रहेंगे. मान्‍यता है कि पितृ पक्ष के दौरान कोई भी नया काम नहीं शुरू किया जाता, ना ही नए कपड़ो की खरीदारी होती है.

पुराणों के अनुसार, पितृपक्ष के दौरान परलोक सिधार गए पूर्वजों को पृथ्वी पर अपने परिवार के लोगों से मिलने का अवसर मिलता है. वह पिंडदान, अन्न एवं जल ग्रहण करने की इच्छा से अपनी संतानों के पास आते हैं. इन दिनों मिले अन्न जल से पितरों को बल मिलता है और इसी से वह परलोक के अपने सफर को तय करते हैं. अन्न-जल की इसी शक्ति से वह अपने परिवार के सदस्यों का कल्याण कर पाते हैं.

पितृपक्ष तर्पण विधि

पितरों को जल देने की विधि को तर्पण कहते हैं. तर्पण कैसे करना चाहिए, कौन से मंत्र पढ़ने चाहिए और कितनी बार पितरों के नाम से जल देना चाहिए आइए अब इसे जानें. हाथों में कुश लेकर दोनों हाथ जोड़कर पितरों का ध्यान करें और उन्हें इस मंत्र के जरिए आमंत्रित करेंः- ‘ओम आगच्छन्तु मे पितर एवं ग्रहन्तु जलान्जलिम’ इस मंत्र का अर्थ है, हे पितरों, पधारिये और जलांजलि ग्रहण कीजिए.

पितृपक्ष में क्या करें, क्‍या ना करें

  • पितृपक्ष में तिल का दान अच्छा माना गया है.
  • पितृपक्ष में गुड़ का दान भी शुभ माना जाता है.
  • पितृपक्ष में नमक का दान देने से पितृ खुश होते हैं.
  • अनाज के रूप में चावल गेहूं और अन्य अनाज का दान संकल्प के साथ करना चाहिए.
  • श्राद्ध करने वाला यदि पितृपक्ष में चांदी का दान करता है तो पितृ उन्हें आशीर्वाद देते हैं.
  • पितृपक्ष में गाय के घी का दान शुभ माना गया है. किसी बर्तन में गाय के घी को दान करना चाहिए.
  • पितृपक्ष में गाय का दान महादान कहा गया है. इसलिए ऐसा माना भी गया है कि पिंडदान में गाय का दान अहम है.
  • पितृपक्ष में सोने का दान शुभ माना गया है. अगर श्राद्ध करने वाला सोना दान करने में योग्य नहीं है तो ऐसे में उसे सोने के बदले में किसी पंडित को दक्षिणा देना चाहिए.
  • पितृपक्ष में कपड़ों का दान देना चाहिए और ब्राह्मण को कपड़ो का दान करते समय इन बातों का खास ध्यान रखना चाहिए कि कपड़े न तो कही से फटा हो और न ही इस्तेमाल किया गया हो.
  • अगर श्राद्ध कर्ता जमीन दान करने योग्य है तो ऐसे में उसे जमीन का छोटा सा टुकड़ा किसी गरीब को दान करना चाहिए. श्राद्ध करने वाले के लिए यदि छोटा सा जमीन का टुकड़ा दान करना संभव नहीं है तो ऐसे में उसे थोड़ी सी मिट्टी दान की जा सकती है. पिंडदान के लिए श्राद्ध कर्ता को मिट्टी को थाली में रखकर, संकल्प के साथ दक्षिणा सहित किसी ब्राह्मण को देना चाहिए.