पब्लिक सेफ्टी एक्‍ट के तहत हिरासत में लिए गए फारूक अब्‍दुल्‍ला, जानें क्‍या है ये कानून

पब्लिक सेफ्टी एक्‍ट के तहत किसी भी व्यक्ति को बिना किसी मुकदमे के दो साल तक हिरासत में रखा जा सकता है.

जम्मू एवं कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला को सोमवार को पब्लिक सेफ्टी एक्‍ट (PSA) के तहत हिरासत में ले लिया गया. इतना ही नहीं, जिस स्थान पर अब्दुल्ला को रखा जाएगा, उसे एक आदेश के जरिए अस्थायी जेल घोषित कर दिया गया है. अब मौजूदा व्यवस्था के तहत 2 साल तक वह डिटेंशन में रह सकते हैं जिसमें उन्हें कुछ रियायत मिल सकती है.

अधिकारिक रूप से अब यह उनका डिटेंशन है. श्रीनगर से लोकसभा सांसद फारूक अब्दुल्ला 5 अगस्त से घर में नजरबंद हैं, जब भारत सरकार ने कश्मीर को विशेष अधिकार देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त कर दिया था.

हाल ही में, नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसदों को फारूक और उनके बेटे उमर अब्दुल्ला से मिलने की अनुमति दी गई थी, लेकिन इस प्रतिबंध के साथ कि वे मुलाकात के बाद मीडिया के साथ बातचीत नहीं कर सकते.

न्यायाधीश संजीव कुमार ने सांसदों जस्टिस (रिटायर्ड) हसनैन मसूदी (अनंतनाग) और अकबर लोन (बारामूला) द्वारा दायर की गई याचिका के बाद अनुमति दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र और जम्मू एवं कश्मीर प्रशासन को नेशनल कॉन्फ्रेंस प्रमुख की नजरबंदी पर नोटिस भी जारी किया.

क्‍या है पब्लिक सेफ्टी एक्‍ट (PSA)?

8 अप्रैल, 1978 को अस्तित्‍व में आए पब्लिक सेफ्टी एक्‍ट को टिम्‍बर की तस्करी रोकने हथियार बताकर लाया गया था. इस कानून के तहत, किसी भी व्यक्ति को बिना किसी मुकदमे के दो साल तक हिरासत में रखा जा सकता है.

हिरासत में लेने वाली संस्था को वजह नहीं बतानी पड़ती. इस कानून का 1990 तक धड़ल्‍ले से दुरुपयोग हुआ. राजनीतिक विरोधियों को काबू में रखने के लिए PSA अमल में लाया जाता रहा. घाटी में आतंकवाद पनपने के साथ ही अलगाववादियों पर शिकंजा कसने को इसका इस्‍तेमाल होने लगा. 2018 में इसमें बदलाव हुआ कि राज्‍य के बाहर भी व्‍यक्तियों को हिरासत में लेने का प्रावधान हो गया.

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