किसानों के लिए क्या चाहते थे स्वामीनाथन? हरियाणा चुनाव के बहाने इनेलो ने फिर दिलाई याद

भारत के कृषि पुनर्जागरण ने स्वामीनाथन को ‘कृषि क्रांति आंदोलन’ के वैज्ञानिक नेता के रूप में पहचान दिलाई.

  • Deepak Singh Svaroci
  • Publish Date - 2:43 pm, Sat, 12 October 19
what is swaminathan report
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हरियाणा में किसानों का मुद्दा हमेशा से काफी बड़ा रहा है. चौधरी देवीलाल की पहचान ही बड़े किसान नेता के तौर पर रही है और इसी पहचान की वजह से वो वीपी सिंह और चंद्रशेखर के समय में देश के उप-प्रधानमंत्री बने थे. इससे पहले वो दो बार हरियाणा के मुख्यमंत्री भी रहे थे.

साल 1987 में इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) की स्थापना का आधार भी किसानों के मुद्दे थे. भूपेंद्र सिंह हुड्डा भी आगे चलकर किसानों के मुद्दे पर राज्य के मुख्यमंत्री रहे. यानी संक्षेप में समझने की कोशिश की जाए तो हरियाणा में किसानों का मुद्दा ही सबसे बड़ा मुद्दा है.

हरियाणा विधानसभा में मुख्य विपक्षी पार्टी इनेलो के अध्यक्ष अभय चौटाला ने एक बार फिर से किसानों का मुद्दा उठाया है. चंडीगढ़ स्थित पार्टी मुख्यालय में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बीएस ढालिया ने घोषणा पत्र जारी किया. घोषणा में प्रदेश के किसानों को स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार न्यूनतम समर्थन मूल्य देने का वादा किया गया है.

इसके अलावा ग़रीब परिवार की लड़की की शादी में 5 लाख रुपये का कन्यादान देने, बेरोजगार युवाओं को 15 हजार रुपये का प्रतिमाह भत्ता, 5 हजार रुपये प्रतिमाह का बुढ़ापा सम्मान पेंशन और हर घर में एक नौकरी आदि का वादा किया गया है.

सवाल यह उठता है कि आख़िर स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट में ऐसा क्या था जो 13 साल के बाद भी लागू नहीं हो पाया. जबकि सभी राजनीतिक पार्टियां इसकी बात कर सत्ता में आई.

प्रोफ़ेसर स्वामीनाथन (swaminathan) का पूरा नाम एमएस स्वामीनाथन है और ये पौधों के जेनेटिक वैज्ञानिक हैं जिन्हें भारत की हरित क्रांति का जनक माना जाता है. उन्होंने 1966 में मैक्सिको के बीजों को पंजाब की घरेलू किस्मों के साथ मिश्रित करके उच्च उत्पादकता वाले गेहूं के संकर बीज विकिसित किए.

भारत के कृषि पुनर्जागरण ने स्वामीनाथन को ‘कृषि क्रांति आंदोलन’ के वैज्ञानिक नेता के रूप में ख्याति दिलाई. उनके द्वारा सदाबाहर क्रांति की ओर उन्मुख अवलंबनीय कृषि की वकालत ने उन्हें अवलंबनीय खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में विश्व नेता का दर्जा दिलाया. स्वामीनाथन को ‘विज्ञान एवं अभियांत्रिकी’ के क्षेत्र में ‘भारत सरकार’ द्वारा सन 1967 में ‘पद्म श्री’, 1972 में ‘पद्म भूषण’ और 1989 में ‘पद्म विभूषण’ से सम्मानित किया गया था.

क्या है स्वामीनाथन आयोग की सिफ़ारिश? (swaminathan commission report)

नवंबर 2004 में प्रोफ़ेसर स्वामीनाथन की अध्यक्षता में नेशनल कमीशन ऑन फारमर्स (राष्ट्रीय किसान आयोग) बनाया गया था. आयोग बनने के दो साल बाद ही इन्होंने छह रिपोर्ट तैयार की. इस रिपोर्ट में मुख्यत: किसानों की स्थिति और खेती के तरीकों में सुधार की बात कही गई.

मुख्य बातें

  • किसानों को खेती में मदद करने के लिए सरकार की तरफ से कर्ज़ की व्यवस्था की जाए और ब्याज दर कम करके चार फीसदी किया जाए.
  • किसानों को अच्छी पैदावार के लिए बेहतर क्वालिटी के बीज कम से कम दामों में मुहैया कराए जाएं.
  • किसानों को फ़सल उत्पादन में लगने वाले असल मूल्य से पचास प्रतिशत ज़्यादा दाम दिए जाएं.
  • देश के सभी किसानों को हर फ़सल के लिए फ़सल बीमा की सुविधा मिले.
  • किसानों को प्राकृतिक आपदाओं की वजह से होने वाले आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए कृषि ज़ोखिम फंड बनाया जाए.
  • प्राकृतिक आपदा या संकट से जूझ रहे इलाकों के किसानों के लिए हालात सामान्य होने तक कर्ज वापसी में राहत दी जाए.
  • बार-बार प्राकृतिक आपदाओं के हालात में एग्रिकल्चर रिस्क फंड का गठन किया जाए, जिससे हमारे देश के किसानों की आर्थिक मदद हो पाए.
  • किसानों की पैदावार बढ़ाने से जुड़ी ज़रूरी ज्ञान हेतु गांवों में विलेज नॉलेज सेंटर या ज्ञान चौपाल का निर्माण किया जाए.
  • महिलाओं को खेती के लिए प्रोत्साहित करने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड जारी करें.
  • सरप्लस और इस्तेमाल नहीं हो रही ज़मीन के टुकड़ों का भूमिहीन लोगों के बीच वितरण किया जाए.
  • खेती वाली ज़मीन और जंगल की भूमि को कॉरपोरेट आदि काम के लिए नहीं दिया जाए.
  • देश में ग़रीबी रेखा से नीचे रह रहे 28 फीसदी भारतीय परिवारों के लिए खाद्य सुरक्षा का इंतज़ाम किए जाए.