राज्यसभा में करनी थी बहस की तैयारी तो अरुण जेटली ने खरीदीं 35 हजार रुपये की किताबें

साल 2011 में राज्यसभा का एक दिन ऐसा हुआ जो कभी भुलाया नहीं जा सकता. कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश सौमित्र सेन के खिलाफ राज्यसभा में महाभियोग प्रस्ताव लाया गया था.

नई दिल्ली: गंभीर बीमारी से जूझ रहे पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने एम्स में आखिरी सांस ली. भाजपा के अग्रिम पंक्ति के नेता जेटली की ऐसी बहुत सी यादें हैं जोकि देशवासी हमेशा याद करेंगे. एक ऐसा ही किस्सा याद आता है जो ये बताता है कि जेटली राज्यसभा के विपक्ष की भूमिका कैसे निभाते थे.

साल 2011 में राज्यसभा का एक दिन ऐसा हुआ जो कभी भुलाया नहीं जा सकता. कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश सौमित्र सेन के खिलाफ राज्यसभा में महाभियोग प्रस्ताव लाया गया था. सौमित्र सेन देश के पहले ऐसे न्यायाधीश थे जिसके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पास होने वाला था.

जैसे ही मामले की सुनवाई शुरू हुई विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने बड़ी संख्या में पुस्तकों के साथ उच्च सदन में प्रवेश किया. जेटली के हाथों में जो किताबें थी वो बिल्कुल नई दिखाई दे रहीं थी. राज्यसभा में मौजूद सभी सांसदों की नजरें उनपर टिक गई. हालांकि किसी ने भी उनसे कुछ पूछा नहीं लेकिन बाद में उन्होंने जो खुलासा किया वो चौंकाने वाला था.

राज्यसभा में तीखी बहस शुरू हुई. प्रस्ताव पर बोलने वालों में विपक्ष के नेता अरुण जेटली के अलावा राम जेठमलानी, सीपीएम की बृंदा करात, सीपीआई के डी राजा, समाजवादी पार्टी के मोहन सिंह प्रमुख थे. सौमित्र सेन को हटाने के प्रस्ताव पर जेटली ने कहा कि बुधवार को उन्होंने ग़लतबयानी कर सदन को गुमराह किया है. उन्होंने कहा कि जस्टिस सेन पर जो आरोप हैं उसके आधार पर उन्हें हटाया जाना चाहिए और उन्हें हटाने की अनुशंसा सदन को राष्ट्रपति को भेजनी चाहिए.

जेटली ने ये भी कहा कि किसी भी जज की नियुक्ति से पहले वकील के रूप में उसके रिकॉर्ड और उसके द्वारा दिए गए फ़ैसलों की जांच की जानी चाहिए. अरुण जेटली ने चेक की फ़ोटोकॉपी दिखाते हुए कहा, “व्यक्ति झूठ बोल सकते हैं लेकिन चेक नहीं.”

राज्यसभा में बहस के बाद जेटली से जब रिपोर्टरों ने पूछा कि आप इतनी सारी किताबें लेकर क्यों आए हैं. तब जेटली ने उत्तर दिया. मैं राज्यसभा में बहस के लिए आ रहा था. यहां मुद्दा भी ऐसा भी ऐसा जोकि इतिहास में पहली बार होना था. मैंने बाजार से 35 हजार रूपये की किताबें खरीदी थी. जिसको मैंने पढ़ा भी है. तब जाकर आज मैं इस बहस में हिस्सा ले पाया हूं. ये जवाब सुनकर सभी रिपोर्टर हक्के-बक्के रह गए.