डॉक्टर की लालू ने एक ना सुनी! एक ही प्लेट में साथ खाई कलेजी, जानें कौन था वो?

लालू प्रसाद यादव के साथ मिलकर उनकी आत्मकथा लिखवाने वाले नलिन वर्मा ने बेहद दिलचस्प आंखों देखा किस्सा साझा किया है. अस्पताल में भर्ती लालू ने एक शख्स के साथ खाना खाने के चक्कर में डॉक्टर की हिदायतों को भी दरकिनार कर दिया था. जानिए कौन था वो शख्स.

लालू प्रसाद यादव की आत्मकथा ‘गोपालगंज टू रायसीना’ चर्चा में है लेकिन एक दिलचस्प किस्सा लेखक ने किताब में शामिल नहीं किया है. अब वो किस्सा किताब के ही सह लेखक नलिन वर्मा ने साझा किया है.

आप जानकर हैरान होंगे कि पिछले साल जब लालू मुंबई के एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट में इलाज करा रहे थे तब उन्होंने एक ऑटो ड्राइवर से कच्ची कलेजी मंगवाई और बनवाकर एक ही प्लेट में साथ मिलकर खाई.

अंग्रेज़ी अखबार द टेलीग्राफ में लिखे सह लेखक के बताते हैं कि पिछले साल 21 अगस्त 2018 को मैं बकरीद के दिन लालू प्रसाद यादव से मिलने के लिए बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स के एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट जा रहा था.तब तक मैं ‘गोपालगंज टू रायसीना’ की पांडुलिपि छपने के लिए जमा कर चुका था मगर कुछ तथ्यों की पुष्टि करने के लिए आरजेडी प्रमुख से मिलने जा रहा था.

नलिन वर्मा ने ये दिलचस्प किस्सा किताब प्रकाशित होने के बाद साझा किया है

मैंने एयरपोर्ट से ऑटोरिक्शा लिया और एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट चलने को कहा. मैंने उससे पूछा- ‘क्या तुम लालू प्रसाद यादव को जानते हो.’

उसने जवाब दिया- ‘हां, वो अभी अस्पताल में भर्ती हैं.’

थोड़े अचरज में मैंने उसे बताया कि मैं उनसे मिलने ही जा रहा हूं.

पूर्वी यूपी के रहनेवाले उस मुस्लिम ऑटो ड्राइवर ने अचानक ही ऑटोरिक्शा सड़क किनारे रोक दिया. उसने मुझसे कहा- ‘क्या आप लालू जी से मुझे मिलने में मदद कर सकते हैं? अगर आप मेरी मदद करेंगे तो मैं ऊपर वाले से आपके लिए दुआ करूंगा.’

मैं पसोपेश में था. मुझे नहीं मालूम था कि मैं उसे लालू जी से मिलवा सकूंगा या नहीं, और सच तो ये है कि ड्राइवर को उनसे मिलवाना मेरी प्राथमिकता था भी नहीं. स्थिति संभालने के लिए मैंने ड्राइवर से उसका नाम और फोन नंबर लिखवाकर ले लिया और वादा किया कि मैं कोशिश करूंगा.

ड्राइवर ने अपनी इच्छा बताते हुए कहा- ‘अगर मुझे अमिताभ बच्चन और लालू जी से एक ही वक्त पर मिलने का मौका मिले तो मैं लालूजी से मिलूंगा.’

उसने अपना नाम- अंसारी और फोन नंबर कागज के एक पुर्ज़े पर लिखकर मुझे थमाया जिसे मैंने जेब के हवाले कर दिया. मुझे अस्पताल के गेट पर छोड़कर उसने फिर दरख्वास्त की- ‘लालू जी से मुझे मिलवा देना बाबू. अल्लाह मेहरबान होगा.’

जैसे ही मैं अस्पताल परिसर में दाखिल हुआ उसका निवेदन भूल गया. लालू जी का एक सहयोगी जो लॉबी में मेरा इंतज़ार कर रहा था, मुझे  चौथी मंज़िल पर स्थित कमरे में ले गया. कुछ देर बाद रूपा पब्लिकेशन से रुद्र शर्मा भी वहां पहुंचे.

लालू जी की हालत खराब थी. उनके दिल की सर्जरी हुई थी. बीपी और शुगर अस्थिर थे. डॉक्टर और नर्स उन्हें घेर कर बता रहे थे कि क्या खाएं और क्या नहीं. वो बिस्तर पर चित थे मगर हमसे गर्मजोशी के साथ बात कर रहे थे. मैं और रुद्र उनके साथ कमरे में दो घंटे तक रहे और किताब की स्क्रिप्ट पर विस्तार से बात करते रहे. बीच-बीच में डॉक्टर और नर्स उनके बीपी और शुगर की जांच करते जाते थे. किसी किसी ने तो सेल्फी भी ली. इस दौरान हरियाणा से लालू के नातियों में से एक ने फोन भी किया और दो-तीन मिनट तक बातें की.

मुंबई के एशियन हार्ट हॉस्पिटल में लालू ने दिल की सर्जरी कराई थी

डॉक्टर और नर्स लालू से किसी प्यारे बुजुर्ग की तरह व्यवहार कर रहे थे. जबकि वो भी उनसे परिवार के सदस्य की तरह बातें कर रहे थे. दर्द में होने के बावजूद सभी लालू जी की बातें सुनकर खुश थे.

‘तुम्हें शादी कर लेनी चाहिए’ लालू जी ने एक नर्स को कहा- ‘शादी में अब देरी मत करो. तुम्हें अपने माता-पिता और परिवार के दूसरे बुजुर्गों की सेवा करनी चाहिए.’

नर्स मुस्कुरा दी.

करीब छह बजे हम निकलने की तैयारी करने लगे कि तभी मुझे ऑटो ड्राइवर की याद आ गई और मैंने लालू जी को वाकया बता दिया.

बिहार और महाराष्ट्र के कुछ वरिष्ठ नेता हम लोगों के जाने का इंतज़ार बाहर बैठकर कर रहे थे ताकि वो लालू जी से मिल सकें. उधर जैसे ही लालू जी ने ऑटो ड्राइवर की इच्छा सुनी वो बेचैन हो उठे.

‘क्या आपने उसका फोन नंबर लिया था ? मुझे दे दीजिए.’ उन्होंने आदेश दिया.

मैंने जेबें खंगालीं और पुर्ज़ा लालू जी को दे दिया. उन्होंने पार्टी विधायक भोला यादव से ड्राइवर को फोन मिलाने के लिए कहा. भोला ने उन्हें फोन मिलाकर दिया. लालू ने फोन पर अंसारी को कहा- आपका नाम क्या है? आप जल्दी हमसे मिलने आ जाओ. ढाई सौ ग्राम कच्चा कलेजी भी लेते आना. आज बकरीद का दिन है. कुर्बानी वाला कलेजी लाना.

फोन कटने के बाद लालू ने भोला से कहा कि बाहर बैठे नेताओं से कह दें कि वो किसी और दिन मिलने के लिए आएं. इसके बाद उन्होंने भोला से बाहर जाकर ऑटो ड्राइवर को अंदर लाने को भी कहा. आधे घंटे बाद सफेद पॉलिथीन में मीट लपेटकर ऑटो ड्राइवर ले आया. वो भावुकता में बुरी तरह रो रहा था.

लालू ने अंसारी को कहा- ‘रोइए मत. लक्ष्मण (लालू के एक और सहयोगी) के साथ जाकर कलेजी को सरसों के तेल, अदरक, हरी मिर्च, काली मिर्च, पैपर और नमक के साथ पका कर लाइए. साथ में खाते हैं.’

उस कमरे के बराबर में बनी स्पेशल किचन तक लक्ष्मण अंसारी को ले गया, जिसे अस्पताल प्रशासन ने लालू के लिए खास तौर पर बनवाया था. लक्ष्मण और अंसारी प्लेट में पका हुआ मीट ले आए. लालू बिस्तर पर बैठे और अंसारी को प्लेट में खाने का न्यौता दिया.

‘हुजूर आपकी प्लेट में कैसे खाऊं. मैं गरीब आदमी हूं. ऑटोरिक्शा चलाता हूं. आपसे मिल लिया, मुझे सबकुछ मिल गया’- अंसारी ने हाथ जोड़कर कहा.

लालू ने उसे प्यार से झिड़कते हुए कहा- ‘चुपचाप आकर साथ में खाओ नहीं तो दो थप्पड़ मारूंगा’

अंसारी चुपचाप लालू जी की प्लेट में से ही खाने लगा.

तभी एक नर्स आकर लालू जी को टोकने लगी- ‘आप मीट क्यों खा रहे हैं. डॉक्टर ने आपको सख्ती से खाने के लिए मना किया था ना!’

लालू मुस्कुराकर बोले- ‘डॉक्टर साहब भोले हैं. उनको पता नहीं है कि अंसारी के मीट में जितना फायदा है उतना फायदा पूरे अस्पताल की दवाई में नहीं. ये कुर्बानी का मीट है.’

वो पलटकर हमसे बोले- ‘मुझे गरीबों से बहुत प्यार मिला है. मुझे इससे ज्यादा क्या चाहिए. मैं मौत और बीमारी की नहीं सोचता. ज़िंदगी भगवान के हाथ में है.’

फिर उन्होंने ऑटो ड्राइवर से कहा- ‘अंसारी अब जाओ. कोई तकलीफ होगा तो बताना, फिर मिलना.’

बहुत भावुक अंसारी ने रोते हुए विदा ली- ‘या अल्लाह, लालूजी को आबाद रख.’

उसके जाने के बाद लालू हमसे मुखातिब हुए- ‘आठ बज गए हैं. मैं आप लोगों के साथ मीट इसलिए नहीं खा सका क्योंकि ये चार-पांच लोगों के लिए कम पड़ता. आप लोग होटल पहुंचिए और अच्छा खाना-शराब लीजिए. बिहार में तो शराबबंदी है.’

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