जब सुषमा स्‍वराज ने अजीत अंजुम से पूछा- कंचन अब खुश हैं न? और सब हैरान रह गए!

'हुआ यूं कि बनारस में रहने वाली रिश्ते की एक बहन के पति अपनी शिपिंग कंपनी के जहाज में नाइजीरिया गए थे. वहां नाइजीरियन लुटेरों ने उनके जहाज पर कब्जा कर लिया.'

नई दिल्‍ली: पूर्व विदेश मंत्री और बीजेपी की वरिष्‍ठ नेता सुषमा स्‍वराज का मंगलवार रात (6 अगस्‍त 2019) दिल्‍ली के एम्‍स अस्‍पताल में निधन हो गया. सुषमा स्‍वराज विदेश मंत्री के कार्यकाल के दौरान सोशल मीडिया पर शिकायतों को सुनने और उनके निपटारे के लिए काफी लोकप्रिय रहीं. सुषमा स्‍वराज की भाषण शैली बेहद मुखर थी, लेकिन उनका ह्रदय उतना ही कोमल था. वह बेहद संवेदनशील थीं. सुषमा स्‍वराज की संवेदनशीलता एक वाकया साल 2016 का है, जिसे पढ़कर सहज ही यह एहसास हो जाता है कि वह कितनी बड़ी शख्सियत थीं.

मैं ट्वीटर पर सुषमा स्वराज की सक्रियता देखकर अपनी टाइम लाइन पर कई बार उनके बारे में लिख चुका था. तब मुझे पता नहीं था कि एक दिन ऐसा भी आएगा कि मुझे उनकी सख्त जरूतत पड़ जाएगी. हुआ यूं कि बनारस में रहने वाली रिश्ते की एक बहन के पति अपनी शिपिंग कंपनी के जहाज में नाइजीरिया गए थे. वहां नाइजीरियन लुटेरों ने उनके जहाज पर कब्जा कर लिया और मेरी बहन के पति समेत पांच लोगों को किडनैप करके साथ ले गए.

sushma swaraj, जब सुषमा स्‍वराज ने अजीत अंजुम से पूछा- कंचन अब खुश हैं न? और सब हैरान रह गए!

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शिपिंग कंपनी से मेरी बहन को जानकारी मिली. परिवार में हाय-तौबा मच गई. पता नहीं क्या होगा…? जिंदा वापस लौट पाएंगे भी या नहीं … नाइजीरियन लुटेरों से शिपिंग कंपनी के लोग डील करने में जुटे थे, लेकिन मोटी रकम का मामला था या कुछ और… कोई रास्ता नहीं निकल रहा था. मैंने यूं ही ट्वीटर पर सुषमा जी से संपर्क किया और बनारस में रहने वाली अपनी फुफेरी बहन कंचन भारद्वाज की व्यथा उन तक पहुंचा दी. कुछ ही मिनटों के भीतर टवीटर पर ही उनका जवाब आया. मुझसे उनके अधिकारियों ने कंचन का नंबर मांगा. उनकी तरफ से कंचन से भी संपर्क किया गया और कुछ दिनों की मशक्कत के बाद उसके पति नाइजीरियन लुटेरों से आजाद होकर सकुशल घौर लौट आए. हालांकि इसमें तीन –चार हफ्तों का वक्त लगा. मेरी बहन परेशान होती रही और सुषमा जी की तरफ से भरोसा मिलता रहा कि उसका पति सुरक्षित घर लौटेगा.

मैं चौंक तो तब गया जब कई हफ्तों बाद केन्द्रीय मंत्रियों के साथ टीवी संपादकों की एक बैठक के बाद सुषमा जी ने मुझसे पूछा –और कंचन भारद्वाज कैसी है. अब खुश है न, मुझे बहुत सुखद आश्चर्य हुआ कि इतने दिनों बाद भी उन्हें उस लड़की का पूरा नाम याद है. मेरे साथी संपादक भी चौंके कि किस कंचन के बारे में सुषमा जी पूछ रहीं थीं? मैंने जब उन्हें उन्हें पूरी बात बताई तो वो भी सुषमा की तारीफ करने लगे… ये उनकी खासियत है.

सुषमा स्वराज जब गंभीर बीमारी की वजह से अस्पताल में थीं, तब भी वह लोगों की मदद के लिए उपलब्ध थीं. कभी ऐसा हुआ है कि कोई मंत्री अपनी गंभीर बीमारी के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती हो फिर भी दूसरों की मदद के लिए हर वक्त सक्रिय हो. तभी तो जब उन्हें किडनी की जरूरत पड़ी तो कई शहरों से अनाम किस्म के लोगों ने अपनी किडनी देने की पेशकश कर दी. सुषमा स्‍वराज ने बीते दो सालों में जो कमाया है, वो उनकी ऐसी पूंजी है, जिसके सामने सत्ता और कुर्सी सब फेल है. सुषमा स्‍वराज आज इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन सदियों तक जमाना याद रखेगा कि ऐसी भी कोई मंत्री थी.