पाक सरज़मीं पर जाकर बोली थीं सुषमा- कश्मीर पर तल्ख जवाब दे सकती हूं लेकिन बेअदबी मुल्क ने सिखाई नहीं

डेढ़ दशक पहले पाकिस्तान के राष्ट्रीय चैनल पर इंटरव्यू के दौरान हंसती-मुस्कुराती सुषमा स्वराज ने तल्ख से तल्ख जवाब देकर एंकर को निरुत्तर कर दिया था. आज भी उनकी हाज़िरजवाबी के मुरीद भारत और पाकिस्तान दोनों में हैं.

सुषमा स्वराज की वाक् पटुता का हर कोई कायल था. संसद हो, राजनीतिक रैली हो या फिर पाकिस्तानी चैनल का स्टूडियो. सुषमा जी को जहां जो कहना था पूरी ठसक से और साफ-साफ कहती थीं.

अब जब सुषमा स्वराज हमारे बीच नहीं हैं तब उनसे जुड़ी हर बात याद आ रही है. इसी सिलसिले में उनका पाकिस्तान के पीटीवी को दिया ऐसा इंटरव्यू भी याद आ रहा है जो उन्होंने आज से 17 साल पहले साल 2002 में दिया था. मार्च महीने में पाकिस्तान की राजधानी सार्क की मेजबान थी. तब भारत में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी और सुषमा स्वराज सरकार में सूचना एवं प्रसारण मंत्री का दायित्व संभाल रही थीं. पाकिस्तान में परवेज़ मुशर्रफ वर्दी उतारकर राष्ट्रपति बन चुके थे. सिर्फ तीन महीने पहले भारत की संसद ने आतंकवादी हमला झेला था जिसके बाद सरहदों पर फौज की तैनाती बढ़ जाने से हवा में तनाव था. दोनों देशों के बीच चल रही हर तरह की बातचीत ठप्प पड़ गई थी. पाकिस्तान चाहता था कि भारत फिर बातचीत की मेज़ पर आ जाए लेकिन वाजपेयी सरकार घाटी में आतंक के पूरी तरह खात्मे से पहले टूटे सिलसिले को जोड़ना नहीं चाहती थी. फिर सार्क के तले सूचना एवं प्रसारण मंत्रियों की बैठक का आयोजन हुआ. भारत ने पूरे उपमहाद्वीप के हितों को दरकिनार करना उचित नहीं समझा और पाकिस्तान की धरती पर अपने प्रतिनिधि को भेजने का फैसला लिया. ज़ाहिर था, सार्क बहुराष्ट्रीय मंच था इसलिए फोकस भारत-पाकिस्तान रिश्तों पर नहीं था मगर जब पाकिस्तानी चैनल ने सुषमा स्वराज को दावत दी तो उन्होंने ना सिर्फ इंटरव्यू दिया बल्कि कई मर्यादाओं का पालन करते हुए भारत का पक्ष साफ-साफ रखा.

इस इंटरव्यू (8 मार्च 2002) को देखते हुए हमें ये बात याद रखनी चाहिए कि जब औपचारिक बातचीत ना चल रही हो तब सुषमा स्वराज का एक-एक शब्द भारत और पाकिस्तान दोनों के लिए बेहद अहम था. संबंधों में खटास का अनुमान आप यूं लगा लीजिए कि सुषमा स्वराज को दिल्ली से इस्लामाबाद जाने के लिए दुबई का रास्ता लेना पड़ा क्योंकि दोनों देशों के बीच वायु, सड़क और ट्रेन मार्ग अवरुद्ध कर दिया गया था.

पीटीवी के एंकर तलत हुसैन ने अपने कार्यक्रम में सुषमा जी से कहा था कि पाकिस्तानी राष्ट्रपति ने हवाई जहाजों के आने-जाने और वीज़ा पर लगी पाबंदियों को हटा लिया है इस पर आपकी हुकूमत का क्या कहना है. तब सुषमा स्वराज ने नहले पर दहला मारते हुए कहा कि परवेज़ मुशर्रफ खुदमुख्तार हैं, कहीं भी फैसला ले सकते हैं, कहीं भी उसका एलान कर सकते हैं लेकिन हिंदुस्तान में जम्हूरियत है. प्रधानमंत्री को भी संसद और कैबिनेट की प्रक्रिया से गुज़रना होता है.

इसके अलावा सुषमा स्वराज ने सरहदों पर फौज की मौजूदगी के सवाल पर पाकिस्तान को उसी की धरती पर आईना दिखाते हुए कहा कि हमने सरहद पर सेना लगाई हैं तो उसकी कुछ वजहें हैं. उन्होंने दोटूक कहा कि भारत सरकार ने कुछ चीज़ें पाकिस्तान को करने के लिए कही हैं और अगर वो हो जाती हैं तो सरहद पर सेना लगाना किसी को अच्छा नहीं लगता. एंकर ने जब कहा कि कौन तय करेगा कि वो चीज़ें हुई या नहीं तो सुषमा जी ने प्रत्युत्तर दिया कि जब करने को हमने कहा है तो ये भी हम ही बताएंगे कि वो हुआ या नहीं.

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एंकर तलत ने दोनों देशों के विवाद में किसी तीसरे मध्यस्थ की बात छेड़ी तो सुषमा जी ने भारत सरकार की पुरानी लाइन लेते हुए समझा दिया कि ये सहमति भारत-पाकिस्तान में पहले से बनी है कि वो किसी भी तीसरे को बीच में नहीं लाएंगे. इस पर एंकर तलत ने कहा कि भारत ने आतंकवाद का मुद्दा अनेक फोरम पर उठाया है इसलिए ये कहना तो गलत होगा कि भारत सरकार तीसरे देश को बीच में नहीं ला रहा. सुषमा जी ने इस सवाल का जवाब देते हुए कश्मीर मुद्दे और आतंकवाद के मुद्दे के बीच का फर्क समझाया. जब पहलू बदलते हुए एंकर ने सुषमा जी से पूछ लिया कि क्या कश्मीर में जो हो रहा है वो सब पाकिस्तान का किया-धरा है तो उन्होंने मुस्कुराकर कहा कि सवाल का जवाब बहुत सीधा है लेकिन मुझे उसके लिए तल्ख होना पड़ेगा और चूंकि मैं यहां मेहमान की हैसियत से आई हूं तो अदब इसकी इजाज़त नहीं देता और बेअदबी मेरे मुल्क की तहज़ीब ने सिखाई नहीं.

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