केजरीवाल, सभरवाल और सुनील यादव में कौन कितना भारी, पढ़ें- नई दिल्ली सीट की पूरी जानकारी

नई दिल्ली सीट के उम्मीदवारों को और बेहतर तरीके से जानने के लिए हम कुछ पैमानों पर उनकी तुलना करते हैं कि तीनों उम्मीदवारों में कौन, किस पर, कितना भारी है?
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राष्‍ट्रीय राजधानी दिल्ली की नई दिल्ली विधानसभा सीट की देश की राजनीति में खास पहचान है. नई दिल्ली लोकसभा क्षेत्र में आने वाले इस विधानसभा इलाके में इंडिया गेट, संसद भवन समेत लगभग पूरा सेंट्रल विस्टा आता है. साल 2013 से इस सीट का प्रतिनिधित्व आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल कर रहे हैं.

नई दिल्ली विधानसभा सीट का इतिहास

साल 1993 में दिल्ली विधानसभा चुनाव के बाद 2002 में परिसीमन आयोग का गठन किया गया था. आयोग की सिफारिशों के बाद साल 2008 में नई दिल्‍ली विधानसभा सीट गठित हुई थी. साल 2008 के पहले चुनाव में यहां से कांग्रेस की शीला दीक्षित विधायक चुनी गईं. उन्‍होंने तब बीजेपी के उम्मीदवार विजय जॉली को हराया था.

साल 2013 के चुनाव में इस सीट पर आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल ने कांग्रेस की दिग्‍गज नेता शीला दीक्षित को हरा दिया था. साल 2015 के चुनाव में भी इस सीट से केजरीवाल ने जीत हासिल की और दोबारा दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री बने. 2015 में उन्होंने बीजेपी उम्मीदवार नुपूर शर्मा को हराया था.

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नई दिल्ली सीट का गणित

साल 2015 के विधानसभा चुनाव के आंकड़ों के आधार पर इस क्षेत्र में कुल मतदाताओं की संख्या 137924 है. इनमें पुरुष मतदाता 76061 और महिला मतदाताओं की संख्या 61855 हैं. पिछले चुनाव में इस विधानसभा सीट पर 64.72 फीसदी वोटिंग हुई थी. इस बार पूरी दिल्ली में 8 फरवरी को मतदान होनेवाला है. वोटों की गिनती 11 फरवरी को होगी.

केजरीवाल-यादव-सभरवाल त्रिकोणीय संघर्ष

दिल्ली की सबसे हाई प्रोफाइल नई दिल्ली सीट से बीजेपी और कांग्रेस ने नामांकन से एक दिन पहले सोमवार को देर रात अपने-उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की. आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ बीजेपी से सुनील यादव और कांग्रेस ने रोमेश सभरवाल मैदान में उतारे गए हैं. मंगलवार को बीजेपी की ओर से इस सीट पर उम्मीदवार बदलकर पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतीश उपाध्याय को उतारे जाने की अफवाह भी सामने आई थी.

नतीजे तो 11 फरवरी को आएंगे और इसके लिए 8 फरवरी को इस विधानसभा के वोटर फैसला करेंगे. इससे पहले अपने उम्मीदवारों को और बेहतर तरीके से जानने के लिए हम कुछ पैमानों पर उनकी तुलना करते हैं कि तीनों उम्मीदवारों में कौन, किस पर, कितना भारी है ? इसके जरिए हम यह भी जानेंगे कि बीजेपी और कांग्रेस की ओर से केजरीवाल को वॉकओवर दिए जाने की चल रही चर्चा में कितना दम है?

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लोकप्रियता

– अन्ना हजारे के लोकपाल आंदोलन के बाद अरविंद केजरीवाल दिल्ली में आम लोगों के बीच पहचाने जाने लगे. खबर लिखे जाने तक फेसबुक पर उनके वेरिफाइड पेज पर 7.5 मिलियन लाइक हैं. वहीं ट्विटर पर 16.4 मिलियन फॉलोवर्स हैं. इसके अलावा पिछले चुनाव में उन्हें 57 हजार से ज्यादा वोट मिले थे.

– सुनील यादव भारतीय जनता युवा मोर्चा के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष हैं. यह बीजेपी की युवा ईकाई है. इसके अलावा उन्होंने पार्टी में दूसरी जिम्मेदारी भी निभाई है. फेसबुक प्रोफाइल पर उनके साथ केजरीवाल के मुकाबले काफी कम फ्रेंड्स हैं. वहीं पेज पर एक लाख से ज्यादा लाइक हैं. ट्विटर पर उनके 16,900 फॉलोवर्स हैं.

– कांग्रेस की छात्र ईकाई एनएसयूआई के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रोमेश सभरवाल लोकप्रियता के मामले में केजरीवाल और सुनील यादव से पीछे हैं. फेसबुक और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उनकी उपस्थिति सामान्य है.

 

उम्र

– अरविंद केजरीवाल अभी 51 साल के हैं.

– सुनील यादव की उम्र 50 साल से कम है.

– रोमेश सभरवाल की उम्र 60 वर्ष से ज्यादा बताई जा रही है.

 

शैक्षणिक जीवन

– अरविंद केजरीवाल ने आईआईटी खड़गपुर से बीटेक करने के बाद यूपीएससी की परीक्षा पास की. कुछ वर्षों तक भारतीय राजस्व सेवा में काम करने के बाद वह पूरी तरह सार्वजनिक जीवन में आ गए. उनके पास स्वयंसेवी संगठनों में भी काम करने का अनुभव है.

– सुनील यादव ने लॉ की पढ़ाई की है. पेशे से वकील हैं. इसके अलावा वह शुरुआत से ही सामाजिक कामों में रूचि लेते रहे हैं.

– रोमेश सभरवाल ने पॉलीटेक्निक और ईंजीनियरिंग में डिप्लोमा की पढ़ाई की है. इसेक बाद उन्होंने एमबीए की पढ़ाई भी की है.

सार्वजनिक जीवन

– अरविंद केजरीवाल ने भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारी पद को छोड़ने के बाद सूचना का अधिकार और बाद लोकपाल कानून के लिए सड़क पर संघर्ष किया. इसके अलावा शुरू से ही वैकल्पिक राजनीति को लेकर मुखर रहे हैं.

– सुनील यादव बीजेपी की राजनीति के अलावा कई दिल्ली के कई स्थानीय संगठनों से जुड़कर सामाजिक कार्य करते हैं. सुनील DDCA में भी डायरेक्टर के तौर पर जुड़े रहे हैं

– रोमेश सभरवाल शीला दीक्षित सरकार में दिल्ली टूरिज्म एंड ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन के अध्यक्ष चुने गए थे. इसके बाद सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के चेयरमैन की जिम्मेदारी भी संभाली. इतना ही नहीं डीडीए की मास्टर प्लान समूह के सदस्य भी रहे हैं.

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राजनीतिक कद

– अरविंद केजरीवाल में इस मामले में सबसे नए हैं. हालांकि उनका प्रशासनिक अनुभव मुख्यमंत्री बनने के बाद बढ़ गया है. केजरीवाल साल 2011 में अन्ना आंदोलन के बाद राजनीतिक जीवन में आए. इसके साथ ही उन्होंने आम आदमी पार्टी की स्थापना की. शुरू से ही वह इस पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक हैं. विधानसभा चुनाव के अलावा उन्होंने साल 2014 में वाराणसी सीट से बीजेपी के पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़कर शर्मनाक हार का मुंह देखा था.

– सुनील यादव ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत भारतीय जनता युवा मोर्चा में मंडल अध्यक्ष के तौर पर किया था. बाद में वह युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष और युवा मोर्चा के प्रदेश महासचिव चुने गए थे. बीजेपी युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष बनने से पहले वह दिल्ली बीजेपी में सचिव पद पर भी रहे हैं.

इससे पहले 2013 और 2015 के विधानसभा चुनावों में सुनील यादव को टिकट मिलने की चर्चा थी, लेकिन आखिरी समय में खेल बदल गया था और उन्हें टिकट नहीं मिल पाया. साल 2017 में उन्हें बीजेपी ने एंड्रयूज गंज से नगर निगम पार्षद का उम्मीदवार बनाया था, लेकिन वो इस चुनाव में हार गए थे

– रोमेश सभरवाल एनएसयूआई के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं. वह प्रदेश अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा के करीबी तो पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन के प्रतिद्वंदी माने जाते हैं. नई दिल्ली सीट से 2015 में भी सभरवाल टिकट मांग रहे थे, लेकिन पार्टी ने शीला दीक्षित की सीट से पूर्व मंत्री किरण वालिया पर दांव लगाया था.

रोमेश सभरवाल ने छात्र जीवन से ही राजनीति में कदम रख दिया था. 1981 से 1983 तक वो दिल्ली पॉलिटेक्निक छात्रसंघ के संयुक्त सचिव रहे और बाद में अध्यक्ष चुने गए थे. इसके बाद उन्होंने कांग्रेस के छात्र ईकाई एनएसयूआई से जुड़ गए और दिल्ली के सचिव बने फिर 1987 में दिल्ली के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाली.

वह 1992 में यूथ कांग्रेस के प्रवक्ता रहे और बाद में दिल्ली कांग्रेस प्रदेश कमेटी के संयुक्त सचिव बने. 2002-04 में दिल्ली कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली. रोमेश सभरवाल दिल्ली पर्यटन के चेयरमैन, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के डायरेक्टर के अलावा भी वे लगभग दो दर्जन पदों पर रह चुके हैं.

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