बेटी के कत्ल के आरोप में गिरफ्तार महिला की गवाही चिदंबरम को पड़ी भारी, जानिए कौन है वो?

चिदंबरम अदालत से लेकर सीबीआई हेडक्वार्टर के चक्कर काट रहे हैं लेकिन ये सब एक महिला की गवाही से संभव हो सका. कौन है वो महिला और इस केस से उसका क्या संबंध है?

पूरा देश पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम की सीबाआई हिरासत पर नज़रें गढ़ाए बैठा है लेकिन उनके शिकंजे में फंसने के पीछे एक ऐसी महिला का हाथ है जो पहले से जेल में है. इस महिला ने आज से ठीक चार साल पहले टीवी-अखबार की सुर्खियों में जगह पाई थी. ये महिला है इंद्राणी मुखर्जी.

अचरज ही है कि इंद्राणी मुखर्जी अपनी बेटी की हत्या के एक केस में खुद सीबीआई के हाथों आरोपी बनी हैं तो चिदंबरम परिवार के खिलाफ भ्रष्टाचार के दूसरे केस में सरकारी गवाह हैं. आइए आपको दोनों ही केस की इस मुख्य किरदार और दोनों मामलों में उसकी भूमिका बताते हैं.

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इंद्राणी मुखर्जी और पीटर मुखर्जी

शीना बोरा मर्डर केस में इंद्राणी का रोल

देश को इंद्राणी मुखर्जी का परिचय जानने का मौका तब मिला था जब अगस्त 2015 में उन्हें मुंबई पुलिस ने अपनी बेटी शीना बोरा के कत्ल के मामले में पकड़ा. इंद्राणी मुखर्जी और उनके प्रेमी सिद्धार्थ दास की बेटी शीना बोरा की हत्या का केस सीबीआई के पास पहुंचा तो उसने इंद्राणी को ही आरोपी बनाया. सिद्धार्थ दास और इंद्राणी के संबंध 1986 से 1989 के बीच कायम थे. 1993 में इंद्राणी ने पहली शादी संजीव खन्ना नाम के शख्स से की जो 2002 तक चली. दूसरी शादी पीटर मुखर्जी से की जिनकी अपनी भी दूसरी शादी थी. ये शादी 2002 से 2017 तक चली. पीटर मुखर्जी 1997 से 2007 तक स्टार इंडिया के सीईओ रह चुके हैं.

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पीटर मुखर्जी

2007 में उन्होंने इंद्राणी के साथ मिलकर आईएनएक्स मीडिया की शुरूआत की लेकिन 2009 में दोनों ने कंपनी छोड़ दी. इस काम से पहले इंद्राणी मुखर्जी एचआर कंसल्टेंट और मीडिया एक्जीक्यूटिव रह चुकी थीं जबकि इस काम के बाद वो लाइज़नर बन गईं.

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शीना बोरा

पीटर मुखर्जी का एक बेटा राहुल मुखर्जी था. राहुल और शीना में करीबी हो गई जिसने इंद्राणी और पीटर को परेशान कर दिया था. शीना मुंबई मेट्रो में काम करती थी और अचानक ही 24 अप्रैल 2012 को गायब हो गई. 23 मई 2012 को उसका शव रायगढ़ जिले के पेन थानांतर्गत जंगल में स्थानीय लोगों को मिला. जानकारी पर स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और पोस्टमार्टम करके शव को फिर दफना दिया. शव की शिनाख्त नहीं हो सकी लेकिन 2015 में मामला दर्ज होने के बाद उस शव की शिनाख्त भी हुई. मामला दर्ज होने के बाद इंद्राणी और पीटर के साथ उनका ड्राइवर भी गिरफ्तार किया गया. सीबीआई ने कहा कि शीना अपनी मां से मुंबई में एक फ्लैट मांग रही थी और इस बात के लिए उसे ब्लैकमेल कर रही थी कि वो सबको बता देगी कि इंद्राणी और वो बहन नहीं बल्कि मां-बेटी हैं. साथ ही राहुल के साथ शीना के संबंधों पर भी इंद्राणी और पीटर नाराज थे. आखिरकार केस में 50 से ज्यादा गवाह पेश हुए और अब तक दोनों आरोपी जेल में बंद हैं.

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INX मीडिया केस में इंद्राणी की भूमिका

वैसे तो इस मामले में भी इंद्राणी आरोपी बनती लेकिन सीबीआई ने उन्हें गवाह बना लिया है. इंद्राणी मुखर्जी और पीटर मुखर्जी ने सीबीआई और ईडी को बताया कि उन्होंने 2006 में तत्कालीन वित्तमंत्री पी चिदंबरम से मुलाकात की थी. तब उन्होंने अपने बेटे कार्ति चिदंबरम के बिज़नेस में मदद करने को कहा था. हालांकि कार्ति चिदंबरम पति-पत्नी से मिलने की बात पर आज भी इनकार कर रहे हैं.

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बहरहाल, चिदंबरम के खिलाफ मामले की सबसे मज़बूत कड़ी इंद्राणी की गवाही ही है. 17 फरवरी 2018 को उन्होंने अपना बयान कोर्ट में दर्ज करा दिया है. तब इंद्राणी ने बताया था कि कार्ति चिदंबरम ने उनसे 10 लाख डॉलर की रिश्वत मांगी थी. दिल्ली के हताय होटल में मुलाकात भी हुई. रिश्वत की रकम देने के लिए इंद्राणी पहले कार्ति की कंपनी में शामिल हुईं. इसके बाद फर्ज़ी मुआवज़े के तौर पर कार्ति की कंपनी ASCPL  और उससे जुड़ी कंपनियों ने INX  मीडिया के लिए 7 लाख डॉलर के चार चालान तैयार किए और भुगतान किया. यही वो मामला था जिसमें कार्ति चिदंबरम की गिरफ्तारी फरवरी 2018 में हुई थी.

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कार्ति चिदंबरम

सीबीआई के मुताबिक मार्च 2017 में INX  मीडिया को कथित रूप से 305 करोड़ रुपए का विदेशी निवेश मिला जबकि अनुमति महज़ 5 करोड़ की थी. कहा गया कि इसे भी कार्ति ने अपने पिता के प्रभाव से आसान बना दिया.

ज़ाहिर है, शीना बोरा का मामला हो या फिर INX  मीडिया में घपले बाज़ी का, दोनों ही हाईप्रोफाइल हैं. इंद्राणी मुखर्जी दोनों में ही शामिल हैं, बस उनका रोल बदल गया है. कांग्रेस ने तो यहां तक कह दिया कि सीबीआई ने एक ऐसी महिला की गवाही मानी है जो अपनी बेटी के कत्ल में गिरफ्तार है. अब देखना ये है कि अदालत की ज़िरह में इंद्राणी के चिदंबरम पर आरोप कितने टिक पाते हैं. शीना बोरा का मामला तो चल ही रहा है जिसमें फैसले का इंतज़ार देश को है.