कौन हैं उपमुख्यमंत्री अजित पवार? जिन्होंने रातोंरात बदल दी महाराष्ट्र सियासत की तस्वीर

अपने चाचा शरद पवार के नक्शेकदम पर चलते हुए अजित पवार ने राजनीति में एंट्री की थी और 1990 से अब तक 7 बार वह बारामती के विधायक नियुक्त हो चुके हैं.

महाराष्ट्र की सियासत (Maharashtra Politics) में अब तक शरद पवार और उद्धव ठाकरे की खूब चर्चा हो रही थी लेकिन अचानक एक और नाम सुर्खियों में आ गया है. वो नाम है अजित पवार (Ajit Pawar) का. अजित पवार ने शनिवार को महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है. हम आपको बताएंगे अजित पवार के बारे में वह बातें जो आपके लिए दिलचस्प होंगी.

‘दादा कहकर बुलाते हैं लोग’

अजित पवार को पूरा नाम अजित अनंतराव पवार है और वह महाराष्‍ट्र के बारामती क्षेत्र का प्रतिनिधित्‍व करते हैं. बारामती हमेशा से पवार फैमिली का गढ़ रहा है. 22 जुलाई 1959 को अहमदनगर जिले के देवलाली में जन्‍में अजित पवार को उनके समर्थक और करीबी लोग दादा कहकर बुलाते हैं जिसका मलतब होता है बड़ा भाई.

एनसीपी प्रमुख शरद पवार के भतीजे

अजित पवार के पिता यानी शरद पवार के बड़े भाई अनंतराव पवार मशहूर फिल्‍म निर्मात वी शांताराम के राजकमल स्‍टूडियो में काम किया करते थे. वह एनसीपी प्रमुख शरद पवार के भतीजे हैं.

20 साल की उम्र में शुरू की राजनीति 

अजित पवार ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 1982 में की थी जब वह केवल 20 साल की उम्र में थे. उन्होंने राजनीति में पहले कदम के रूप में एक चीनी सहकारी संस्था के लिए चुनाव लड़ा. इसके बाद आता है साल 1991 जिसमें, वह पुणे जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष बनते हैं और वह 16 साल तक इस पद पर रहे.

नरसिम्हा राव सरकार में रक्षा मंत्री

अजित 1991 में बारामती निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए, लेकिन उन्होंने अपने चाचा शरद पवार के लिए सीट खाली कर दी, जो उस समय पी.वी. नरसिम्हा राव सरकार में भारत के रक्षा मंत्री थे.

फिर वह उसी वर्ष महाराष्ट्र विधानसभा के लिए चुने गए और नवंबर 1992 से फरवरी 1993 तक कृषि और बिजली राज्य मंत्री रहे. तब तक अजित पवार राजनीति में धीरे-धीरे एक बड़ा नाम बन चुके थे.

पहले भी बन चुके उपमुख्यमंत्री

साल 1995, 1999, 2004, 2009 और 2014 में बारामती निर्वाचन क्षेत्र से वह लगातार जीतते रहे. उनके अब तक के महत्वपूर्ण पदों में कृषि, बागवानी और बिजली राज्य मंत्री, जल संसाधन मंत्री (कृष्णा घाटी और कोकन सिंचाई, तीन बार) और वह 29 सितंबर 2012 से 25 सितंबर 2014 महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री भी रहे.

अपने चाचा शरद पवार के नक्शेकदम पर चलते हुए अजित पवार ने राजनीति में एंट्री की थी और 1990 से अब तक 7 बार वह बारामती के विधायक नियुक्त हो चुके हैं.

सिंचाई घोटाले के मामले में आरोपी

अजित पवार महाराष्ट्र में 1500 करोड़ रुपये के सिंचाई घोटाले के मामले में आरोपी भी हैं. अजित पवार कई बार अपने विवादित बयानों को लेकर भी चर्चा में रह चुके हैं. इस साल सितंबर में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने महाराष्ट्र कार्पोरेशन बैंक से जुड़े घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था. इसमें अजित पवार का भी नाम था.

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