जिस कांग्रेसी मंत्री का PM मोदी ने लोकसभा में किया जिक्र, पढ़ें उनके बारे में

राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद हुई चर्चा में पीएम मोदी ने बताया कि एक कांग्रेसी मंत्री ने शाह बानो मामले के दौरान कहा था कि "अगर मुसलमान गटर में रहना चाहते हैं तो उन्हें वहीं रहने दो."
आरिफ मोहम्मद, जिस कांग्रेसी मंत्री का PM मोदी ने लोकसभा में किया जिक्र, पढ़ें उनके बारे में

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को संसद में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण की चर्चा के जवाब में एक टीवी न्यूज चैनल का जिक्र करते हुए कांग्रेस के मुस्लिमों के प्रति रवैए का जिक्र किया. उन्होंने टीवी न्यूज चैनल के शो का हवाला देते हुए बताया था कि एक कांग्रेसी मंत्री ने शाह बानो मामले के दौरान कहा था कि “अगर मुसलमान गटर में रहना चाहते हैं तो उन्हें वहीं रहने दो.”

प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस के उस नेता का नाम तो नहीं किया लेकिन मामला बढ़ने के बाद खुद कांग्रेस के शासन काल में मंत्री रहे आरिफ मोहम्मद ने इस मंत्री के नाम का खुलासा कर दिया. इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में चार बार सांसद रह चुके आरिफ मोहम्मद ने कहा, “मुझे लगता है उन्होंने (पीएम मोदी) जो किया वह सही था क्योंकि यह उन सभी कार्यों के पीछे की मंशा को उजागर करता है, जो मूल रूप से समाज को विभाजित करने के लिए थे.”

उन्होंने ये बयान देने वाले मंत्री के नाम का खुलासा करते हुए बताया कि पीएम ने जिस टीवी इंटरव्यू की बात कही वह सात-आठ साल पहले शाह बानो से जुड़े एक एपिसोड के दौरा दिया गया था. आरिफ मोहम्मद ने बताया कि यह बयान तत्कालीन गृह मंत्री पीवी नरसिम्हा राव ने दिया था.

सरकार के कदम से नाराज आरिफ ने दे दिया था इस्तीफा

अपने इस्तीफे के बाद हुई घटनाओं के बारे में बताते हुए आरिफ ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व द्वारा उन्हें पद पर बने रहने के लिए मनाने का प्रयास किया जा रहा था. उन्होंने कहा, “जिस दिन मैंने शाम को इस्तीफा दिया, उस दिन मैं घर पर नहीं रुका. मैं एक दोस्त के यहां चला गया ताकि कोई मुझसे संपर्क न कर सके. मोबाइल फोन तब नहीं थे. लेकिन अगली सुबह, जब मैं करीब 10 बजकर 45 मिनट पर संसद पहुंचा, तो अरुण सिंह मेरा इंतजार कर रहे थे.”

आरिफ ने आगे कहा “वह (अरुण सिंह) मुझे प्रधानमंत्री के वेटिंग रूम में ले गए. उन्होंने मेरी प्रशंसा की और कहा, ‘कोई भी आपको दोष नहीं दे सकता, लेकिन क्या आप इस्तीफा देने के अपने निर्णय पर पुनर्विचार कर सकते हैं?”

आरिफ मोहम्मद ने कहा, “उस दिन मुझसे कई लोग मिले और मैंने वही तर्क दिया. पहले अरुण सिंह, फिर अरुण नेहरू, फिर एम एल फोतेदार, फिर तीन वरिष्ठ मंत्री जिनके तहत मैंने जूनियर मंत्री के रूप में काम किया था. उन्होंने बहुत प्यार दिखाया और मुझे मनाने की कोशिश की और आखिरकार नरसिम्हा राव आए. राव ने मुझसे कहा, ‘तुम इतने युवा, उज्ज्वल, इतने अच्छे वक्ता, तुम्हारा करियर तुम्हारे आगे है, तुम कैसे इस्तीफा दे सकते हो?’ फिर, उन्होंने मुझे बताया कि शाह बानो ने भी अपना रुख बदल लिया है, जो कि उनके अनुसार सही था?”

आरिफ मोहम्मद, जिस कांग्रेसी मंत्री का PM मोदी ने लोकसभा में किया जिक्र, पढ़ें उनके बारे में
पी वी नरसिम्हा राव

उन्होंने कहा, “मैंने कहा कि मैं शाह बानो के लिए नहीं लड़ रहा हूं. मैं अपनी व्यक्तिगत ईमानदारी के लिए लड़ रहा हूं. 55 मिनट के लिए, मैंने संसद में प्रधान मंत्री (राजीव गांधी) द्वारा मुझसे पूछे जाने के बाद शाह बानो पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का बचाव किया. अब जब विधेयक पेश किया गया था, तो कानून मंत्री ने कहा कि विधेयक का उद्देश्य शाह बानो मामले में दिए गए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटना है.”

कानून मंत्री की इस टिप्पणी के जवाब में आरिफ ने कहा, “मैंने कहा कि मैं अकबर का बीरबल नहीं हूं. फिर, उन्होंने (नरसिम्हा राव) मुझसे कहा कि तुम मूर्ख बन रहे हो. वह बहुत ही सामान्य लहजे में ऐसा कह रहे थे, लेकिन फिर, उन्होंने मुझसे कहा,, समझने की कोशिश करो. हम समाज सुधारकों की पार्टी नहीं हैं. अगर मुसलमान गटर में रहना चाहते हैं, तो उन्हें रहने दें. आप इस्तीफा क्यों दे रहे हैं?”

राजीव सरकार ने पलट दिया था सुप्रीम कोर्ट का फैसला

मालूम हो कि 1986 के अपने ऐतिहासिक फैसले में, सुप्रीम कोर्ट ने शाह बानो के लिए गुजारा भत्ता के अधिकार को बरकरार रखा था. जबकि राजीव गांधी सरकार ने मुस्लिम महिलाओं (तलाक अधिनियम पर संरक्षण) को पारित कर दिया, जिसने फैसले को पलट दिया.

इसके बाद आरिफ मोहम्मद खान को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया, जिसके बाद वह वी पी सिंह के जन मोर्चा के संस्थापक सदस्यों में से एक बन गए. बाद में इसका जनता दल में विलय हो गया. 2007 में पार्टी से इस्तीफा देने से पहले खान बीएसपी और आखिरकार बीजेपी में शामिल हो गए.

ये भी पढ़ें: कश्‍मीर के लिए नई सुबह लेकर आ सकता है अमित शाह का यह दौरा

Related Posts