नागरिकता संशोधन बिल में मुसलमानों को क्यों नहीं दी जगह, अमित शाह ने दिया जवाब

गृह मंत्री अमित शाह ने यह भी साफ किया कि आखिर रोहिंग्याओं को इस बिल में जगह क्यों नहीं दी गई है.

लोकसभा में नागरिकता संशोधन बिल पास होने के बाद बुधवार को इसे राज्यसभा में पेश किया गया. राज्यसभा में तीखी बहस के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने सांसदों के तमाम सवालों के जवाब दिए. इसी दौरान अमित शाह ने साफ किया कि इस बिल में मुसलमानों को शामिल क्यों नहीं किया गया.

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि अगर धर्म के आधार पर इस देश का विभाजन नहीं हुआ होता तो हमें यह बिल नहीं लाना पड़ता. उन्होंने कहा कि हमारे तीन पड़ोसी देशों में धर्म के आधार पर लोगों को प्रताड़ित किया जा रहा है, इसलिए हमें इस बिल को लाने की जरूरत पड़ी.

शाह ने बताया कि तीनों पड़ोसी देशों में राज्य धर्म इस्लाम है ऐसे में यहां मुसलमानों के खिलाफ धार्मिक हिंसा नहीं हो सकती है. जबकि अन्य धर्मों के अल्पसंख्यकों के साथ इन देशों में अत्याचार होते रहे हैं. इस दौरान अमित शाह ने नेहरू-लियाकत समझौते की भी बात कही. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इस समझौते पर खरा नहीं उतरा.

गृह मंत्री अमित शाह ने यह भी साफ किया कि आखिर रोहिंग्याओं को इस बिल में जगह क्यों नहीं दी गई है. अमित शाह ने कहा कि रोहिंग्या बांग्लादेश के जरिए घुसपैठ कर के भारत में आते हैं इसलिए उन्हें इस बिल में जगह नहीं दी गई है. मालूम हो कि इस बिल में छह धर्मों के लोगों को शामिल किया गया है.

नागरिकता विधेयक मुसलमानों को नुकसान पहुंचाने वाला नहीं

राज्यसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक पर विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए गृह मंत्री ने कहा, “आज जो बिल लाए हैं, उसमें निर्भीक होकर शरणार्थी कहेंगे कि हां हम शरणार्थी हैं, हमें नागरिकता दीजिए और सरकार नागरिकता देगी. जिन्होंने जख्म दिए वही आज पूछते हैं कि ये जख्म क्यों लगे.”

अमित शाह ने कहा, “इस बिल की वजह से कई धर्म के प्रताड़ित लोगों को भारत की नागरिकता मिलेगी, लेकिन विपक्ष का ध्यान सिर्फ इस बात पर है कि मुसलमानों को क्यों नहीं लेकर आ रहे हैं. आपकी पंथनिरपेक्षता सिर्फ मुस्लिमों पर आधारित होगी लेकिन हमारी पंथ निरपेक्षता किसी एक धर्म पर आधारित नहीं है. इस बिल में उनके लिए व्यवस्था की गई है जो पड़ोसी देशों में धार्मिक आधार पर प्रताड़ित किए जा रहे हैं, जिनके लिए वहां अपनी जान बचाना, अपनी माताओं-बहनों की इज्जत बचाना मुश्किल है. ऐसे लोगों को यहां की नागरिकता देकर हम उनकी समस्या को दूर करने के प्रयास कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि हमारे लिए प्रताड़ित लोग प्राथमिकता हैं जबकि विपक्ष के लिए प्रताड़ित लोग प्राथमिकता नहीं हैं.”

भारत में संरक्षण तो पाकिस्तान में हुआ अल्पसंख्यकों पर अत्याचार

उन्होंने कहा, “नेहरू-लियाकत समझौते के तहत दोनों पक्षों ने स्वीकृति दी कि अल्पसंख्यक समाज के लोगों को बहुसंख्यकों की तरह समानता दी जाएगी, उनके व्यवसाय, अभिव्यक्ति और पूजा करने की आजादी भी सुनिश्चित की जाएगी, ये वादा अल्पसंख्यकों के साथ किया गया, लेकिन वहां लोगों को चुनाव लड़ने से भी रोका गया, उनकी संख्या लगातार कम होती रही और यहां राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, चीफ जस्टिस जैसे कई उच्च पदों पर अल्पसंख्यक रहे. यहां अल्पसंख्यकों का संरक्षण हुआ.

उन्होंने कहा, “बंटवारे के बाद जो परिस्थितियां आईं, उनके समाधान के लिए मैं ये बिल आज लाया हूं. पिछली सरकारें समाधान लाईं होती तो ये बिल न लाना होता.” नागरिकता संशोधन विधेयक लोकसभा से पारित हो चुका है. बुधवार को राज्यसभा में इस विधेयक को पेश किया गया. इस विधेयक को लेकर देश के कुछ हिस्सों में विरोध-प्रदर्शन हुए हैं. असम में विरोध प्रदर्शन में आगजनी और तोड़-फोड़ की गई, जिसके बाद वहां 24 घंटे के लिए 10 जिलों में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं.

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