जानिए, 41 ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों के 80 हजार से ज्यादा कर्मचारी क्यों हैं हड़ताल पर

बीस अगस्त से 19 सितंबर तक हड़ताल पर रहने का आह्वान तीन प्रमुख ट्रेड यूनियनों- अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ (एआईडीईएफ), भारतीय राष्ट्रीय रक्षा कर्मचारी महासंघ (आईएनडीडब्ल्यूएफ) और भारतीय मजदूर संगठन समर्थित भारतीय प्रतापी मजदूर संघ (बीपीएमएस) ने किया था.

नई दिल्ली: पूरे देश की अलग-अलग ऑर्डिनेंस फैक्ट्री के 80 हजार से ज्यादा कर्मचारी हड़ताल पर हैं. कर्मचारियों ने सेना तथा अन्य अर्द्धसैनिक बलों के लिए गोला बारूद बनाने वाले देश भर के आयुध कारखाने के निजीकरण योजना के विरोध में हड़ताल कर रहे हैं. कर्मचारियों का हड़ताल शुक्रवार को चौथे दिन भी जारी रही.

इन कारखानों की शीर्ष संस्था आयुध कारखाना बोर्ड (Ordnance Factories Board) के प्रस्तावित निजीकरण योजना के विरोध में विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने 20 अगस्त से एक माह के हड़ताल का आह्वान किया है. मंगलवार से जारी हड़ताल का साफ अंदाजा इन कारखानाओं में बुरी तरह प्रभावित उत्पादन को देखकर भी लगाया जा सकता है.

हड़ताल में कर्मचारी
हड़ताल में ना केवल 82 हजार स्थाई कर्मचारी शामिल हैं बल्कि इनके अलावा 40 हजार ठेका श्रमिक भी इसमें सक्रिय तौर पर भाग ले रहे हैं. कोलकाता में ओएफबी के अलावा तमिलनाडु, तेलंगाना, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार और चंडीगढ़ के आयुध कारखानों में हड़ताल पूरी तरह सफल है.

100 के अध्यादेशों में एक अध्यादेश ये भी
नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले 100 दिनों में लागू किए जाने वाले अध्यादेश में ये भी एक अध्यादेश था. संबंधित मंत्रियों के समूहों के परामर्श से सेक्टोरल ग्रुप ऑफ सेक्रेटरी की सिफारिशों के आधार पर ये विचार जुलाई के शुरुआत में प्रस्तावित किए गए थे.

रक्षा मंत्री का बयान
Ordnance Factories Board के शीर्ष अधिकारियों को 18 जुलाई को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बैठक के लिए बुलाया गया था, जिसके बाद योजना को अंतिम रूप देने का निर्णय लिया गया. अधिकारियों का कहना है कि कॉरपोरेटीकरण को प्रभाव देने के लिए एक कैबिनेट नोट तैयार किया गया था, और परामर्श के लिए हितधारक मंत्रालयों को परिचालित किया गया था.

OFB का बयान
रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि, “ओएफबी का कॉर्पोरेशन ओएफबी को रक्षा मंत्रालय के अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) के साथ सम्‍मिलित करेगा. यह ओएफबी के हित में है क्योंकि ये ओएफबी को परिचालन स्वतंत्रता और लचीलापन प्रदान करेगा वर्तमान में इसका अभाव है. इसके अलावा, श्रमिकों के हितों को विषय पर लिए गए किसी भी निर्णय में पर्याप्त रूप से सुरक्षित किया जाएगा.”

निजीकरण का डर
कर्मचारियों के डर का एक कारण निजीकरण है. कर्मचारियों को लग रहा है कि सरकार का निजीकरण की ओर एक कदम है. उन्हें नौकरी छूटने का डर है. वे यह भी तर्क देते हैं कि एक कॉर्पोरेट इकाई रक्षा उत्पादों के अद्वितीय बाजार वातावरण को नहीं बचा पाएगी.

बीस अगस्त से 19 सितंबर तक हड़ताल पर रहने का आह्वान तीन प्रमुख ट्रेड यूनियनों- अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ (एआईडीईएफ), भारतीय राष्ट्रीय रक्षा कर्मचारी महासंघ (आईएनडीडब्ल्यूएफ) और भारतीय मजदूर संगठन समर्थित भारतीय प्रतापी मजदूर संघ (बीपीएमएस) ने किया था.

हड़ताल से पहले ट्रेड यूनियनों और केंद्र सरकार के बीच सोमवार को आयुध कारखानों के निजीकरण के खिलाफ आयोजित बातचीत विफल रही थी. ट्रेड यूनियनों ने कहा कि ‘कॉरपोरेटाइजेशन’ प्रक्रिया को रोकने के उनके अनुरोध को केंद्र सरकार ने नहीं माना. इसलिए तीनों प्रमुख ट्रेड यूनियनों को हड़ताल का आह्वान करना पड़ा.