नीतीश कुमार को आख़िर क्यों नहीं सुहा रहे प्रशांत किशोर, कहीं वजह ये तो नहीं

जनता दल यूनाइटेड ने बुधवार को प्रशांत किशोर और पवन वर्मा को पार्टी से बाहर कर दिया है.
why Prashant Kishor expelled from Janata Dal United, नीतीश कुमार को आख़िर क्यों नहीं सुहा रहे प्रशांत किशोर, कहीं वजह ये तो नहीं

“पार्टी का अनुशासन, पार्टी का निर्णय एवं पार्टी नेतृत्व के प्रति वफादारी ही दल का मूल मंत्र होता है.” इन्हीं लाइन्स के साथ शुरुआत होती है उस पत्र की जिसमें जनता दल यूनाइटेड के उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर को पार्टी से बाहर निकालने का फरमान छपा है. यूं तो ये लाइन्स संक्षेप में बयां कर ही देती हैं कि आखिर क्यों पार्टी ने प्रशांत को बाहर का रास्ता दिखाया. हालांकि इसकी भूमिका कैसे-कैसे बंधी और क्या इसके पुख्ता कारण थे, उसपर प्रकाश डालने का प्रयास हमने किया है.

पिछले कई महीनों से पार्टी के पदाधिकारी रहते हुए प्रशांत किशोर ने कई विवादित बयान दिए. विवादित से ज्यादा ये उनकी निजी राय होती थी, जो अमूमन पार्टी की सोच और निर्णय से मेल नहीं खाती थी. उदाहरण के तौर पर, जनता दल यूनाइटेड ने एनआरसी का विरोध किया, लेकिन पार्टी नागरिकता कानून पर केंद्र के फैसले के समर्थन में थी. वहीं पार्टी के उपाध्यक्ष पूरी तरह से इस कानून के विरोध में दिखे. यह सबसे बड़ा कारण था उन्हें पार्टी से मुक्त किए जाने का.

दूसरे कारण का जिक्र भी पार्टी ने उस पत्र में किया है, जिसके बिनाह पर प्रशांत किशोर को निलंबित किया गया. केसी त्यागी के हस्ताक्षर वाले इस पत्र में लिखा है, “पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने उनके (प्रशांत किशोर) स्वेच्छाचारी वक्तव्यों को दरकिनार करते हुए कहा, ‘उनकी इच्छा पर निर्भर है कि पार्टी में रहें… अगर नहीं रहना हो तो जहां इच्छा हो जाने के लिए स्वतंत्र हैं’ इसकी प्रतिक्रिया स्वरूप उन्होंने राष्ट्रीय अध्यक्ष के विरुद्ध अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया, जो अपने आप में स्वेच्छाचारिता है. किशोर और ज्यादा नहीं गिरें, इसके लिए आवश्यक है कि वे पार्टी से मुक्त हों.”

दरअसल नीतीश कुमार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ये बातें कही थीं. इसी के साथ पार्टी प्रमुख ने वो राज भी खोल था, जिसके चलते प्रशांत किशोर को उन्होंने पार्टी की सदस्यता के साथ उपाध्यक्ष का पद भी दे दिया था. नीतीश ने बताया कि उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह के कहने पर प्रशांत किशोर को जनता दल यूनाइटेड में शामिल किया था. जेडीयू प्रमुख के इस बयान पर पलटवार करते हुए प्रशांत ने उन्हें झूठा करार दिया और कहा कि ‘कैसे कोई मान लेगा कि आप आज भी गृह मंत्री द्वारा भेजे किसी व्यक्ति की बात न मानें.’

पार्टी की राय के और खासतौर पर पार्टी प्रमुख के खिलाफ बोलने का अंजाम क्या होता है, उसका नतीजा तो प्रशांत किशोर ने महज 24 घंटों के भीतर ही देख लिया. प्रशांत के अलावा पूर्व राजदूत और जनता दल यूनाइटेड के जनरल सेक्रेटरी रह चुके पवन वर्मा को भी पार्टी की सोच से इतर राय रखने का नतीजा झेलना पड़ा. पवन वर्मा को भी पार्टी ने बाहर का रास्ता दिखाया है. उन्होंने भी नागरिकता कानून पर पार्टी लाइन से हटकर नीतीश कुमार के नाम खुला खत लिख दिया था. अब पार्टी ने भी एक खत में उनका नाम लिखा है, जिसके चलते अब वह पार्टी की सदस्यता खो चुके हैं.

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