Happy Teachers’ Day: शिक्षक दिवस क्‍यों मनाते हैं? जानिए इसके पीछे की पूरी कहानी

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन एक महान शिक्षाविद थे. डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का मानना था कि शिक्षा का मतलब सिर्फ जानकारी देना ही नहीं होता

Happy Teachers’ Day: देश में हर साल 5 सितंबर को टीचर्स डे मनाया जाता है. आधुनिक समय से इस दिन स्टूडेंटस गिफ्ट देकर या मैसेज भेजकर अपने टीचर्स को विश करते है. लेकिन ऐसी क्या वजह है जो हर साल 5 सितंबर को ‘टीचर्स डे’ मनाया जाता है.

भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के मौके पर हर साल 5 सितंबर को उनकी याद में ‘टीचर्स डे’ (शिक्षक दिवस) मनाया जाता है. कहा जाता है कि एक बार डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के विद्यार्थी और दोस्तों ने मिलकर डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्मदिन सेलिब्रेट करने का सोचा. इस पर डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने कहा कि मेरा जन्मदिन अलग से मनाने के जगह मेरा जन्मदिन टीचर्स डे के रूप में मनाया जाएगा तो मुझे ज्यादा खुशी होगी. तभी से 5 सितंबर को टीचर्स डे रूप में मनाया जाता है.

ज्यादातर देशों में अलग अलग तारीखों पर टीचर्स डे मनाया जाता है. चीन में हर साल 10 सितंबर,  कनाडा में पांच अक्टूबर, यूनान में 30 जनवरी, मेक्सिको में 15 मई, पराग्वे में 30 अप्रैल, श्रीलंका में 6 अक्टूबर और थाईलैंड में 16 जनवरी को टीचर्स डे मनाया जाता है. वहीं अमेरिका में मई के पूर्ण सप्ताह के मंगलवार को टीचर्स डे मनाया जाता है. वैसे 5 अक्टूबर को इंटरनेशनल टीचर्स डे पूरी दुनिया में मनाया जाता है.

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन एक महान शिक्षाविद थे. डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का मानना था कि शिक्षा का मतलब सिर्फ जानकारी देना ही नहीं होता. डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का मानना था कि जब तक शिक्षक शिक्षा के प्रति समर्पित और प्रतिबद्ध नहीं होगा, तब तक शिक्षा को मिशन का रूप नहीं मिल पाएगा.

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर 1888 को तमिलनाडु के तिरुतनी ग्राम में हुआ था. डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन बाइबल और स्वामी विवेकानंद के दर्शन का अध्ययन 12 साल की उम्र में ही कर लिया था. डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने एमए दर्शन शास्त्र से किया था. डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने 40 वर्षों तक टीचर्स के रूप में काम किया था.

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन 1931 से 1936 तक आंध्र विश्वविद्यालय के कुलपति भी रह चुके हैं. इसके बाद डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन 1936 से 1952 तक ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में प्राध्यापक के पद पर भी रहे.

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन साल 1952 में भारत के पहले उपराष्ट्रपति बने. भारत के दूसरे राष्ट्रपति बनने के पहले डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति थे. डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को 1961 में जर्मनी के पुस्तक प्रकाशन द्वारा ‘विश्व शांति पुरस्कार’ से भी सम्मानित किया गया था.

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का निधन 17 अप्रैल 1975 को हुआ था.

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