क्यों सोनिया गांधी को भी बजानी पड़ गई गडकरी के लिए तालियां?

Share this on WhatsAppदेश में किसी के हों या ना हों लेकिन नितिन गडकरी के अच्छे दिन ज़रूर चल रहे हैं. क्या सत्ता पक्ष, क्या विपक्ष और क्या मीडिया हर कहीं उनकी तारीफों के पुल बंध रहे हैं, इमारतें खड़ी हो रही हैं और सड़कें बिछ रही हैं. वैसे अब तो विपक्षियों के मुंह से अपनी […]

देश में किसी के हों या ना हों लेकिन नितिन गडकरी के अच्छे दिन ज़रूर चल रहे हैं. क्या सत्ता पक्ष, क्या विपक्ष और क्या मीडिया हर कहीं उनकी तारीफों के पुल बंध रहे हैं, इमारतें खड़ी हो रही हैं और सड़कें बिछ रही हैं.

वैसे अब तो विपक्षियों के मुंह से अपनी तारीफ सुनना नितिन गडकरी के लिए नया तजुर्बा नहीं रहा लेकिन संसद सत्र के अंतिम दिन जब पक्षविपक्ष एकदूसरे की हर बात के खिलाफ बोल रहे थे तब एक मौका ऐसा भी आया जब हर किसी ने मिलकर मेजें थपथपाईं.

सदन को एकमत होने का मौका दिया सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने.

गडकरी के काम पर पक्षविपक्ष एकमत

संसद में प्रश्नकाल के दौरान नितिन गडकरी भारतमाला परियोजना से संबंधित सवाल का जवाब दे रहे थे. गडकरी ने अपने जवाब के  दौरान कहामेरी ये विशेषता है और मैं इसके लिए खुद को भाग्यवान समझता हूं कि हर पार्टी के सांसद कहते हैं कि उनके क्षेत्र में अच्छा काम हुआ है.

जल संसाधन और गंगा संरक्षण मंत्रालय का प्रभार संभालनेवाले गडकरी ने उत्तराखंड के चारधामों को जोड़नेवाली परियोजना पर भी जवाब दिया. इस दौरान गंगा का ज़िक्र हुआ. उन्होंने कहा कि प्रयाग में पहली बार गंगा इतनी निर्मल और अविरल है. लगे हाथ गडकरी ने लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन से भी कहा, “अध्यक्ष महोदया, आप एक बार जाकर देखिए कि गंगा के लिए भी कितना काम हुआ है.’’

इस पर सुमित्रा महाजन ने भी माना कि काम हुआ है. उन्होंने कहा कि ‘‘हमारा आशीर्वाद आपके साथ है.’’  

चौतरफा तारीफों के बीच बीजेपी सांसद गणेश सिंह ने लोकसभा अध्यक्ष से इस बीच अनुरोध किया कि गडकरी ने देश में इतना काम किया जिसके लिए सदन को धन्यवाद प्रस्ताव पारित करना चाहिए. उनकी बात पर बीजेपी की ओर से मेजें थपथपाने की आवाज़ आई, तो कांग्रेसी भी पीछे नहीं रहे. यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी और सदन में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने बेहिचक मेजें थपथपाकर गडकरी की प्रशंसा का समर्थन किया.

विरोधियों संग गडकरी की अजब जुगलबंदी

बीजेपी के विरोधी नेताओं और गडकरी की ये जुगलबंदी आजकल लोगों को हैरानी में डाले हुए है. नितिन गडकरी के बयान और काम दोनों ही इस जुगलबंदी का आधार हैं. गडकरी के बयान लाग-लपेट के बिना आते हैं और कभी-कभी विरोधियों को मस्त और अपनों को पस्त कर जाते हैं.

  •  कुछ ही दिन पहले दिल्ली में आयोजित नमामि गंगे परियोजना के कार्यक्रम में गडकरी और दिल्ली के सीएम केजरीवाल का आमनासामना हुआ था. यमुना एक्शन प्लान तीन की परियोजनाओं को शुरू करने के मौके पर केजरीवाल ने खुलकर कहा कि गडकरी ने जितना प्यार आम आदमी पार्टी को दिया, उतना प्यार भाजपाइयों को भी नहीं दिया. उनका सहयोग दिल्ली सरकार को हमेशा मिलता रहा. कमाल की बात है कि ये बात उन केजरीवाल के मुंह से निकली जो केंद्र सरकार पर काम ना करने देने के आरोप लगातार लगाते रहे हैं.
  • दिल्ली के उसी कार्यक्रम में एक वक्त ऐसा आया जब केजरीवाल के भाषण के दौरान कुछ लोगों ने खांसने की आवाज़ निकाल कर उन्हें चिढ़ाना चाहा. ऐन मौके पर गडकरी ने खड़े होकर लोगों से शांत होने का आग्रह किया और उसी के बाद केजरीवाल अपना भाषण निर्विघ्न पूरा कर सके. ये गडकरी ने उन केजरीवाल के लिए किया जिन्होंने उन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए थे और बाद में चिट्ठी लिखकर माफी भी मांगी थी.
  • नितिन गडकरी ने पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के खराब प्रदर्शन पर भी बयान दिया था. उन्होंने कहा था कि नेतृत्व को हार और विफलताओं की भी ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए. हालांकि हंगामा हुआ तो उन्होंने सफाई दी मगर दो दिन बाद ही उन्होंने अपनी बात फिर दोहरा दी. तब उन्होंने कहा कि अगर सांसद -विधायक बेहतर काम नहीं कर रहे तो ये ज़िम्मेदारी पार्टी प्रमुख की है.
  • काफी पहले उन्होंने एक मराठी कॉमेडी शो में बीजेपी के चुनावी वादों पर ऐसा बयान दिया था कि बीजेपी नेता सकते में आ गए थे. उन्होंने कहा था कि, ‘हमें भरोसा नहीं था कि हम सत्ता में आएंगे इसलिए हमने बड़े- बड़े वादे कर लिए थे.’ बाद में हंगामा होने पर उन्होंने कहा कि उनका बयान मोदी सरकार या पंद्रह लाख के वादे पर नहीं महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव पर था.
  • एबीवीपी के एक कार्यक्रम में दिए गए नितिन गडकरी के बयान ने भी काफी सुर्खियां बटोरी थीं. उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को पहले अपनी घरेलू ज़िम्मेदारी का निर्वहन करने की नसीहत देते हुए कहा था कि जो लोग अपना घर नहीं देख सकते वो देश को नहीं संभाल सकते. बीजेपी के विरोधियों ने उनके इस बयान का निशाना पीएम मोदी को माना.
  • खुद राहुल गांधी भी नितिन गडकरी की तारीफ कई बार कर चुके हैं, हालांकि ये तारीफ पीएम मोदी को घेरने की रणनीति का हिस्सा है या फिर जेनुइन, इस पर बहस होती रहती हैं. दूसरी तरफ खुद नितिन गडकरी सरकार के शायद अकेले मंत्री हैं जिन्होंने नेहरू और इंदिरा की तारीफ की है.

पिछले कुछ दिनों से एकाएक नितिन गडकरी को पीएम पद का दावेदार माना जा रहा है. ना सिर्फ बीजेपी के खेमे से ऐसी बातें दबे-छिपे हो रही हैं बल्कि विरोधी भी इसे हवा देने में जुटे हैं. माहौल ऐसा है कि शायद खुद गडकरी नहीं समझ पाते होंगे कि विरोधियों की तारीफ को सियासी साज़िश मानें या ना मानें. बहरहाल चाहे जो हो, फिलहाल गडकरी के दिन अच्छे चल रहे हैं और मोदी सरकार पर ज़ोरदार हमलों के बीच वो खुद को सुरक्षित महसूस कर सकते हैं.