आखिरकार तनिष्क को हटाना पड़ा दो धर्मों को मिलाने वाला वीडियो… इतना गुस्सा पालकर हम कहां जा रहे हैं?

वीडियो में एक समृद्ध मुस्लिम परिवार की हिंदू बहू की गोदभराई का सीन है, जिसमें हिंदू बहू अपनी मुस्लिम सासु मां से पूछती है कि ये रस्म तो आपके घर में तो होती भी नहीं है? तो सासु मां का जवाब होता है कि लेकिन बेटी को खुश रखने की रस्म तो हर घर में होती है.

  • TV9 Hindi
  • Publish Date - 5:51 pm, Tue, 13 October 20
वीडियो ग्रैब
तनिष्क के ऐड पर हुआ था विवाद

टाइटन ग्रुप के ज्यूलरी ब्रांड तनिष्क ने अपनी एक ज्यूलरी लाइन “एकत्वं” की मार्केटिंग के लिए एक वीडियो विज्ञापन 9 अक्टूबर को रिलीज किया. विज्ञापन में ड्रामा, सिनेमा और मार्केटिंग का अच्छा इस्तेमाल किया गया है और यह वीडियो देखने में लुभावना भी लगता है.

वीडियो में एक समृद्ध मुस्लिम परिवार की हिंदू बहू की गोदभराई का सीन है, जिसमें हिंदू बहू अपनी मुस्लिम सासु मां से पूछती है कि ये रस्म तो आपके घर में तो होती भी नहीं है? तो सासु मां का जवाब होता है कि लेकिन बेटी को खुश रखने की रस्म तो हर घर में होती है. फिर अंत में वीडियो खत्म होता है इस संदेश के साथ कि एक जो हुए हम, तो क्या न कर जाएंगे.

इतना अच्छा संदेश… तो हटाया क्यों?

आप सोचेंगे कि यह तो बड़ा अच्छा संदेश है जो हिंदू मुस्लिम एकता दर्शाता है, लेकिन इस वीडियो ने सोशल मीडिया पर रिलीज होने के बाद से ही बवाल मचा रखा है. प्रतिक्रियाएं इतनी तल्ख हो गईं कि तनिष्क ने इस वीडियो को बहुत से प्लेटफॉर्म्स पर अब अनुपलब्ध कर दिया है.

बहुत से हिंदू ट्विटरवीरों को यह वीडियो लव जिहाद फैलाने वाला लगा, वहीं दूसरी तरफ के मुस्लिम ट्विटरवीरों को यह हिंदू मुस्लिम सौहार्द का एक खूबसूरत उदाहरण लगा, लेकिन उन्होंने इसे अनुपलब्ध कर देने के लिए तनिष्क को आड़े हाथों लिया और कहा कि कंपनी आलोचना से डर गई. फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत ने अपनी प्रतिक्रिया ट्वीट में कहा कि उन्हें कॉन्सेप्ट से उतनी परेशानी नहीं हुई जितनी इसके एग्जिक्यूशन से हुई.

कंगना ने कहा कि डरी हुई हिंदू लड़की माफी मांगने के अंदाज में अपने ससुराल वालों से कृतज्ञता व्यक्त करती है कि उन्होंने उसके, यानि हिंदू बहू की आस्था को स्वीकार किया. कंगना पूछती है कि क्या लड़की घर की बहू नहीं है. वो अपने ससुराल वालों के रहमोकरमपर क्यों है. वो अपने ही घर में इतनी कमजोर और डरी हुई क्यों है? कंगना यह शर्मनाक है लिख कर ट्वीट खत्म करती हैं.

अगर इस कॉन्सेप्ट को पलट दिया जाता

ट्विटर पर प्रतिक्रिया देख कर लगता है बहुत से ट्विटरवीर संभवतः कंगना से सहमत होंगे, लेकिन हम पूछना चाहते हैं कि हम एक समाज के रूप में जब भी हिंदू मुस्लिम सौहार्द, दोस्ती या प्यार की अभिव्यक्ति देखते हैं तो नाराज क्यों हो जाते हैं. क्यों इस विषय में छोटी से छोटी बात हमें तल्ख कर देती है?

जरा सोचिए, अगर इस कॉन्सेप्ट को पलट दिया जाता – यानि किसी हिंदू परिवार में एक मुस्लिम बहू की गोदभराई दिखाई जाती तो हमारी प्रतिक्रिया क्या होती? मैं विश्वास से कह सकता हूं कि तब हिंदू ट्विटरवीरों को कोई परेशानी नहीं होती. लेकिन मुस्लिम ट्विटरवीर तब क्या कहते? जरा सोचिए!

वैसे मार्केटिंग करने वालों को भी विचार करना चाहिए कि अधिकतर विज्ञापनों में दिखाई जाने वाली हिंदू मुसलमान शादियों में लड़की ही हिंदू क्यों होती है. इसका विपरीत भी तो सच और तथ्यात्मक हो सकता है. हजारों साल से चली आ रही हमारी आस्था और विश्वास क्या इतने कमजोर हैं कि एक विज्ञापन उन पर कुठाराघात कर सकता है?

आंकड़ों के हिसाब से भी देख लेते हैं.

भारत में हिंदुओं और मुसलमानों के बीच शादियां होती हैं, लेकिन इस तादाद में हरगिज नहीं कि हिंदुओं की जनसंख्या को चुनौती देने लगे. 1991 से 2001 के बीच भारत में मुस्लिमों की जनसंख्या बढ़ने की दर 29.5 प्रतिशत थी, जबकि हिंदुओं की जनसंख्या बढ़ने की दर 19.9 फीसदी थी. लेकिन, 2001 से 2011 के बीच मुस्लिम जनसंख्या बढ़ने की दर गिरी और 24.6 प्रतिशत हो गई, तब मुसलमान भारत की जनसंख्या का लगभग 14.2 फीसदी थे. अब यह संख्या लगभग 18 फीसदी होगी ऐसा माना जाता है.

हिंदू भारत की जनसंख्या का लगभग 80 फीसदी हैं और भले ही मुस्लिम समुदाय में जनसंख्या में लगातार इजाफा हो रहा हो, लेकिन साल 2050 में भी पिउ रिसर्च सेंटर के अनुसार भारत में हिंदुओं की संख्या 1 अरब 300 करोड़ होगी और मुस्लिम समुदाय की 31 करोड़ 10 लाख. यानि साल 2050 में 76.7 फीसदी लोग, यानि हर 4 में से 3 भारतीय हिंदू होंगे और देश में हिंदुओं की जनसंख्या दुनिया के 4 सबसे बड़े मुसलमान मुल्कों – पाकिस्तान, इंडोनेशिया, नाइजीरिया और बांग्लादेश – की जनसंख्याओं को मिला कर भी उससे अधिक होगी.

इतना गुस्सा पाल कर हम कहां जा रहे हैं?

इसलिए हमें सोचने की जरूरत है कि इतना गुस्सा पाल कर हम कहां जा रहे हैं? अगर ऐसे ही चलता रहा तो आगे चल कर दीवारें कहीं इतनी ऊंची न हो जाएं कि समाज में हम एक दूसरे को देखना भी गवारा न करें. सच्चाई यह है कि कोई भी व्यवस्था तब तक ठीक से नहीं चल सकती, जब तक सभी तबकों में एक दूसरे के प्रति आदर और सहिष्णुता न हो और एक तथ्य यह भी है की हर हिंदू लव जिहाद में विश्वास नहीं करता. ट्विटर पर ही एक कमेंट इस बात की तस्दीक करता है.

इस ट्वीट में कहा गया है कि यह देखना दुखद है कि हम किस प्रकार का देश बनते जा रहे हैं. एक विज्ञापन जो दो धर्मों का मिलन दर्शाता था उसे हटाना पड़ा, उस देश में जिसे शाश्वत समय से धर्मनिरपेक्ष कहा गया है. खैर, गनीमत यह है कि यह विचारों की लड़ाई फिलहाल डिजिटल जमीन पर लड़ी जा रही है, वास्तविक जमीन पर नहीं जहां लहू बहने का खतरा होता है.

यही ठीक भी है, अगर सारे वाद विवाद डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर ही निपटा लिए जाएं तो यह देश निश्चित ही भाग्यशाली कहा जाएगा. और एक बात, तनिष्क ने भले ही इस विज्ञापन को अनुपलब्ध कर दिया हो, लेकिन पिछले 5 दिनों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ही उसे इतना एक्सपोजर मिल चुका है जो शायद अन्य मीडिया माध्यमों पर विज्ञापन दे कर भी नहीं मिलता. यानि इस विवाद ने तनिष्क का संदेश बहुत से लोगों के माइंडस्पेस में अच्छे से बिठा दिया है. ट्विटरवीरों को भी इस बात पर विचार करना चाहिए.

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