आर्थिक मंदी को लेकर प्रियंका गांधी ने कसा तंज, निगाहों में क्रिकेट, निशाने पर केंद्र सरकार

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऑटो मोबाइल सेक्टर में सुस्ती का कारण ओला ऊबर को बताया था. जिस पर प्रियंका गांधी ने ट्वीट कर तंज कसा है.

नई दिल्ली: पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बाद अब कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने भी अर्थव्यवस्था की सुस्ती पर केंद्र सरकार पर हमला बोला है. हालांकि प्रियंका का अंदाज बिल्कुल अलग था. प्रियंका ने क्रिकेट का उदाहरण देकर सरकार पर व्यंगात्मक वार किया.

प्रियंका गांधी ने एक वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड किया है. जिसमें बल्लेबाज एक हेलीकॉप्टर शॉट से मिलता जुलता शॉट खेलता है. ये शॉट बाउंड्री तक जाता है लेकिन फील्डर चुस्ती के साथ बाउंड्री पर कैच लपक लेता है. इस वीडियो को ट्वीट करते हुए प्रियंका लिखती हैं “सही कैच पकड़ने के लिए अंत तक गेंद पर नजर और खेल की सच्ची भावना होनी जरुरी है, वरना आप सारा दोष #gravity, गणित, ओला-उबर और इधर-उधर की बातों पर मढ़ते रहेंगे. भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए जनहित में जारी.”

गौरतलब है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऑटो मोबाइल सेक्टर में सुस्ती का कारण ओला ऊबर को बताया था. उनका कहना था कि लोग अब ओला ऊबर जैसी कंपनियों की कैब ले रहे हैं जबकि वो कार नहीं खरीद रहे हैं इस वजह से इस सेक्टर में मंदी आ रही है. वित्त मंत्री के इस बयान का खंडन खुद मारूती सुजुकी ने कर दिया था. मारूती की ओर से कहा गया कि केवल ओला ऊबर ही आर्थिक मंदी का कारण नहीं है.

एक इंटरव्यू के दौरान मनमोहन सिंह ने भी केंद्र सरकार पर हमला बोला था. उन्होंने कहा था, ‘हम इस बात से इनकार नहीं कर सकते हैं कि देश आर्थिक संकट से जूझ रहा है. पहले ही, काफी सारा समय निकल चुका है. हर क्षेत्र को राहत देने के लिए अलग-अलग उपाय करने के दृष्टिकोण में राजनीतिक ताकत का व्यर्थ इस्तेमाल करने या नोटबंदी जैसी ऐतिहासिक गलती करने के बजाय सरकार के लिए अगली पीढ़ी का स्ट्रक्चरल रिफॉर्म करने का सही वक्त आ गया है.’

केंद्र सरकार को मिले भारी जनादेश पर पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा, ‘यह याद रखना जरूरी है कि यह एक ऐसी सरकार है, जिसे भारी जनादेश मिला है वह भी एक बार नहीं, बल्कि लगातार दो-दो बार. जब मैं वित्त मंत्री बना था या प्रधानमंत्री बना था, तब हमें इतना बड़ा जनादेश नहीं मिला था. इसके बावजूद, हमने काफी उपलब्धियां हासिल कीं और देश को 1991 के संकट और 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट से सफलतापूर्वक बाहर निकाला.’