अंडर ग्रेजुएट कोर्स में हिंदी अनिवार्य करने के परिपत्र को वापस ले UGC: CPI-M

"भाषा और संस्कृति में समृद्ध विविधता के आधार पर केवल ऐसे प्रयासों से हमारे लोगों की एकता बाधित होगी."

नई दिल्ली: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी-मार्क्सवादी (CPI-M) ने मंगलवार को एक यूजीसी के परिपत्र को वापस लेने की मांग की, जिसमें कहा गया कि वह देश भर के सभी अंडर ग्रेजुएट कोर्स में हिंदी को एक अनिवार्य विषय के रूप में लाना चाहता है.

CPI-M के एक बयान में कहा गया है कि वो यूजीसी के इस प्रस्ताव से बहुत चिंतित थे.

CPI-M ने कहा, “केंद्र सरकार ने इस विवाद को निपटाने के लिए एक स्पष्टीकरण जारी किया. इसलिए, यूजीसी स्वतंत्र रूप से इस एजेंडे को आगे नहीं बढ़ा सकता है,”

“भारत भाषा और संस्कृति में विविधता वाला देश है. एक विशिष्ट राष्ट्रीय भाषा को लागू करने के लिए एक उचित कार्यवाही के बिना किया जा रहा ये प्रयास  विवाद पैदा करने वाला है.

“भाषा और संस्कृति में समृद्ध विविधता के आधार पर केवल ऐसे प्रयासों से हमारे लोगों की एकता बाधित होगी.”

CPI-M ने सभी से जनमत जुटाने का आग्रह किया और सरकार को यह सुनिश्चित करने के लिए मजबूर किया कि UGC परिपत्र वापस ले.