महिला मजिस्ट्रेट ने आरोपी को नहीं दी जमानत तो 12 वकीलों ने धमकाया, मामला दर्ज

राज्य अधिकारी संघ इस मामले को केरल उच्च न्यायालय ले गया था, जहां उसने अदालत से तुरंत दखल देने और अधिकारियों के लिए निडर होकर काम करने का माहौल सुनिश्चित करने का अनुरोध किया.

तिरुनंतपुरम: एक आरोपी की जमानत खारिज करने वाली एक महिला मजिस्ट्रेट को धमकाने और रास्ता रोकने वाले 12 आरोपी वकीलों के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है. राज्य अधिकारी संघ इस मामले को केरल उच्च न्यायालय ले गया था, जहां उसने अदालत से तुरंत दखल देने और अधिकारियों के लिए निडर होकर काम करने का माहौल सुनिश्चित करने का अनुरोध किया.

मजिस्ट्रेट दीपा मोहन ने बुधवार को कर्नाटक राज्य परिवहन निगम के एक ड्राइवर की जमानत याचिका खारिज कर दी थी. पुलिस के एक अधिकारी ने शुक्रवार को बताया कि मजिस्ट्रेट की शिकायत पर त्रिवेंद्रम बार संघ के अध्यक्ष और सचिव समेत 12 वकीलों के खिलाफ लोक सेवक को कर्तव्य निर्वहन से रोकने के लिए आपराधिक बल प्रयोग समेत कई आरोपों में मामला दर्ज किया गया है.

मामले के मुख्य आरोपी त्रिवेंद्रम बार एसोसिएशन के अध्यक्ष केपी जयचंद्रन हैं. वकीलों के खिलाफ आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज हुआ है. उन पर गैरकानूनी ढंग से जमा होने,दंगा करने, आपराधिक धमकी देने और बंधक बनाने का आरोप है. वकीलों पर सरकारी नौकर के साथ मारपीट के आरोप में धारा 353 के भी मामला दर्ज हुआ है. यह एक गैर जमानतीय धारा है.

प्रथम श्रेणी की न्यायिक मजिस्ट्रेट दीपा मोहन ने कुछ वकीलों के ‘उपद्रवी’ बर्ताव के खिलाफ मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को लिखित में शिकायत दी. इस शिकायत को पुलिस के पास भेजा गया. इस बीच, न्यायिक अधिकारी संघ ने घटना के बारे में केरल उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को शिकायत भेजी.

इसमें कहा गया कि तिरुवनंतपुरम बार संघ के कुछ सदस्यों ने मजिस्ट्रेट को अपमानित किया जो गैरकानूनी तरीके से कैद में रखने, आपराधिक धमकी देने तथा सरकारी ड्यूटी निभाने में बाधा डालने के बराबर है. तिरुवनंतपुरम बार संघ अपने सदस्यों के खिलाफ शिकायत के विरोध में शुक्रवार को जिला अदालतों का बहिष्कार कर रहा है.