World Population Day: क्या फेल हुआ ‘हम दो हमारे दो’ का नारा, 2027 तक चीन को पछाड़ेगा भारत

दुनिया भर में जनसंख्या (World Population) बढ़ती जा रही है. कई देशों के सामने जनसंख्या को नियंत्रित करने की बड़ी चुनौती है. खासकर विकासशील देशों में.
World Population Day, World Population Day: क्या फेल हुआ ‘हम दो हमारे दो’ का नारा, 2027 तक चीन को पछाड़ेगा भारत

आज है वर्ल्ड पॉपुलेशन डे (World Population Day) . हर साल दुनिया भर में 11 जुलाई को वर्ल्ड पॉपुलेशन डे मनाया जाता है. इस दिन का महत्व हर देश के लिए अलग अलग है. जैसे जनसंख्या का मतलब हर देश के लिए अलग है. जैसे कि देखा जा सकता है कि दुनिया भर में जनसंख्या (World Population) बढ़ती जा रही है. कई देशों के सामने जनसंख्या को नियंत्रित करने की बड़ी चुनौती है. खासकर विकासशील देशों में.

अलग-अलग देशों ने जनसंख्या को नियंत्रित करने के लिए कई कानून भी लागू किए. पर हुआ कुछ नहीं. न तो वे कानून ठीक से लागू हो पाए और न ही जनसंख्या को नियंत्रित किया जा सका. जनसंख्या को नियंत्रित करने के लिए हर साल 11 जुलाई को वर्ल्ड पॉपुलेशन डे के मौके पर कई कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को जागरूक किया जाता है.

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इस साल वर्ल्ड पॉपुलेशन डे की थीम

इस साल की थीम विशेष रूप से कोविड-19 महामारी के समय में दुनिया भर में महिलाओं और लड़कियों के स्वास्थ्य और अधिकारों की सुरक्षा पर आधारित है. हाल ही में यूनाइटेड नेशंस पॉपुलेसन फंड(UNFPA) के एक रिसर्च में कहा गया था कि अगर लॉकडाउन 6 महीने तक जारी रहता है और स्वास्थ्य सेवाओं में कमी आती है, तो कम और मध्यम आय वाले देशों में 47 मिलियन महिलाओं को आधुनिक गर्भ निरोधक नहीं मिल पाएंगे. इसलिए ही इस साल की थीम महिलाओं और लड़कियों पर केंद्रित है. वहीं साल 2019 की थीम फैमिली प्लानिंग: इम्पावरिंग पीपल, डिवेलपिंग नेशंस रखी गई थी.

कब हुई वर्ल्ड पॉपुलेशन डे की शुरुआत?

वर्ल्ड पॉपुलेशन डे की शुरुआत 1989 में यूनाइटेड नेशंस डेवलपमेंट प्रोग्राम की गवर्निंग काउसिल द्वारा की गई थी. दरअसल, 11 जुलाई, 1987 तक वर्ल्ड पॉपुलेशन का आंकड़ा 5 अरब के भी पार हो चुका था, जिसे देखते हुए वैश्व‍िक हितों को ध्यान में रखते हुए 11 जुलाई को वर्ल्ड पॉपुलेशन डे मनाने का फैसला लिया गया.

वर्ल्ड पॉपुलेशन डे के मौके पर जागरूकता फैलाने के लिए कई तरह के प्रोग्राम किए जाते हैं. इनमें सोशल मीडिया के जरिए जागरूक करना, विभिन्न समाजिक कार्यक्रमों व सभाओं का संचालन, प्रतियोगिताओं का आयोजन, रोड शो, नुक्कड़ नाटक अन्य कई तरीके शामिल हैं.

भारत की जनसंख्या को लेकर चिंता

यूनाइटेड नेशन के आर्थिक एवं सामाजिक मामलों के विभाग पॉपुलेशन डिविजन ने द वर्ल्ड पॉपुलेशन प्रोस्पेक्टस 2019 हाइलाइट्स के 26वें अंक में जनसंख्या संबंधी आंकड़ों में भारत को लेकर काफी चिंताएं व्यक्त की. रिपोर्ट के अनुसार, अगले 7 साल यानी 2027 तक भारत चीन को पछाड़ कर दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बन जाएगा.

विश्व भर में 137 करोड़ आबादी के साथ भारत दूसरे स्थान पर है. पहले स्थान पर 143 आबादी के साथ चीन है. जब भारत आजाद हुआ था तब यहां की जनसंख्या 33 करोड़ थी. वर्तमान में भारत में हर साल एक करोड़ साठ लाख लोग बढ़ रहे है. दुनिया भर की 18 प्रतिशत आबादी भारत की है. भारत में जनसंख्या नियंत्रण को लेकर कानून और नारे दिए गए. पर न तो कानून ठीक से लागू हुए और न ही नारों का लोगों पर असर हुआ. एक नारा दिया गया था- ‘हम दो, हमारे दो’. पर इसका असर भी कहीं दूर-दूर तक दिखाई नहीं दिया.

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