LAC पर तैनात जिनपिंग की चॉकलेट सेना… हर हाल में गर्दन मरोड़ने के लिए तैयार भारतीय शूरवीर

LAC पर हर मौसम के लिए हथियार भेजे जा रहे हैं. हर मौसम के लिए सामान भेजे जा रहे हैं. ताकि चालबाज ड्रैगन कभी कोई चाल ना चल सके. मतलब सेना तैयार है अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए. एक-एक इंच से ड्रैगन को खदेड़ने के लिए. ड्रैगन का गुरूर तोड़ने के लिए. तैयारी पक्की है और एक्शन जरूरी है.
India China Tension, LAC पर तैनात जिनपिंग की चॉकलेट सेना… हर हाल में गर्दन मरोड़ने के लिए तैयार भारतीय शूरवीर

अरुणाचल प्रदेश के पास चीन की सेना का बड़ा मूवमेंट देखा गया है. अरुणाचल प्रदेश के सामने LAC के उस पार अंदर तक के इलाकों में सेना पहुंचाई जा रही है. सरकारी सूत्र बता रहे हैं कि असफिला, तूतिंग और फिश टेल-2 एरिया के सामने के वो इलाके हैं जहां चीन के सैनिकों की हरकत देखी जा रही है और उसकी सारी मूवमेंट LAC से सिर्फ 20 किलोमीटर दूर चल रही है. जिसे देखते हुए भारत ने सेना को हाई अलर्ट पर रख दिया है.

सूत्रों का कहना है कि गलवान घाटी में हुई हार का बदला लेने के लिए चीन कोई भी गड़बड़ी कर सकता है. भारत को युद्ध के लिए उकसा सकता है और ऐसी हर परिस्थिति से निपटने के लिए भारत के जवान मुस्तैद हैं. डटे हुए हैं. हिंदुस्तान इस बार चीन के खिलाफ इतनी बड़ी तैयारी के साथ सीमा पर डटा हुआ है कि वो अपने किसी भी गलत इरादे में कामयाब नहीं हो सकता.

LAC पर हर मौसम के लिए हथियार भेजे जा रहे हैं. हर मौसम के लिए सामान भेजे जा रहे हैं. ताकि चालबाज ड्रैगन कभी कोई चाल ना चल सके. मतलब सेना तैयार है अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए. एक-एक इंच से ड्रैगन को खदेड़ने के लिए. ड्रैगन का गुरूर तोड़ने के लिए. तैयारी पक्की है और एक्शन जरूरी है.

जिनपिंग की चॉकलेट सेना

जिनपिंग की डरपोक चॉकलेट सेना में भारतीय जवानों जैसा दम नहीं है. भारतीय जवानों जैसी देशभक्ति नहीं है और सर्वोच्च बलिदान का जज्बा नहीं है. हालात ऐसे हैं कि LAC पर चीनी अफसर काउंटर अटैक करने की हिम्मत नहीं जुटा पाते. पहाड़ों पर चढ़ाई का हौसला नहीं जुटा पाते और युद्द की गर्मी में चॉकलेट की तरह पिघल जाते हैं.

अब पैंगोंग झील में उत्तर से दक्षिण तक हर एक स्ट्रैटेजिक पॉइंट पर भारत ने अपनी स्थिति मजबूत कर ली है. अब चुशूल-डेमचोक मार्ग पर नजर रखना PLA के फौजियों के बूते की बात नहीं है. पूर्वी लद्दाख में अहम चोटियों पर कब्जे से भारतीय सेना ने चीनी सैनिकों पर बढ़त हासिल कर ली है. इस बढ़त के पीछे भारतीय सैनिकों का फौलादी दमखम है. पहाड़ी इलाकों में लड़ने की चट्टानी क्षमता है. जबकि LAC पर अबतक चीन की सेना चॉकलेट सोल्जर्स साबित हुई है.

अब आप सोच रहे होंगे कि हम चीन की सेना को बार-बार चॉकलेट सोल्जर क्यों कह रहे हैं. तो सुनिए LAC पर आलम ये है कि जब भारतीय सैनिकों ने अगस्त के आखिर में चीन की घुसपैठ को नाकाम कर रिज लाइन पर कब्जा किया, तब एक चीनी अफसर ने काउंटर अटैक तक से इनकार कर दिया. जबकि PLA की घुसपैठ पर भारतीय सैनिक देशभक्ति से भरे थे और वो अदम्य साहस के साथ लड़े थे.

भारतीय सेना और चीनी सैनिकों में फर्क

ये फर्क है भारत और चीन की सेना में. दुनिया जानती है चीन के नागरिकों के लिए सेना में भर्ती होना जरूरी है देशभक्त होना नहीं. चीन की सेना में लोग पैसे और सुविधाओं के लिए भर्ती होते हैं और गोली का सामना करने से डरते हैं. उन्हें ही चॉकलेट सोल्जर कहा जाता है. PLA में अफसर से सिपाही तक इससे अलग नहीं हैं. उन्हें युद्ध की गर्मी में पिघलने का खौफ रहता है.

पीएलए के जनरल भी इस हकीकत को जानते हैं. शहरी इलाकों और अमीर घरों से आने वाले सैनिक सुख-सुविधाओं में जीने वाले होते हैं. चीनी सैनिक युद्ध नहीं लड़ सकते. ऐसे सैनिक फौज में 5 साल का वक्त गिनते हैं. ये कभी नहीं सोचते कि उनकी जान अपने घरों से दूर पहाड़ों में चली जाए. ऐसा ख्याल ही उनकी रूह कंपा देता है. यही वजह है हिंदुस्तान चीन के इन फौजियों को चॉकलेट सोल्जर्स कहता है. जॉर्ज बर्नार्ड शॉ ने भी अपने नाटक आर्म्स एंड द मैन में ऐसे जवानों को चॉकलेट सैनिक कहा था. चीनी सैनिक शॉ की इस थ्योरी पर 100 फीसदी सच साबित होते हैं.

हर हाल में दुश्मन की गर्दन मरोड़ना जानते हैं भारतीय शूरवीर

वहीं माउंटेन वार में भारतीय सेना का जवाब नहीं है. वो मानते हैं ज्यादा पसीना बहाएंगे तो युद्ध में अपना खून कम बहेगा. वो पहाड़, जंगल, रेगिस्तान और गुरिल्ला वार में एक्सपर्ट हैं. वो हर हाल में दुश्मन की गर्दन मरोड़ना जानते हैं. भारत के पास पहाड़ी और ज्यादा ऊंचाई पर लड़ने के लिए दुनिया की सबसे बड़ी और ट्रेन सेना है. जो फिलहाल लद्दाख में मौजूद है.

चीन से लगी 3488 किलोमीटर लंबी LAC पर स्पेशल माउंटेन फोर्स के जवान तैनात है. इन जवानों को गुरिल्ला युद्ध की खास ट्रेनिंग दी गई है. पहले भी कारगिल युद्ध में ये अपना कमाल दिखा चुके हैं. भारतीय सैनिकों ने सियाचिन की बर्फीली हवाओं में भी युद्ध किया है और कई हमलों को नाकाम किया है. उन्हें -50 डिग्री में भी युद्ध करने का प्रशिक्षण दिया गया है. रेगिस्तान की तपा देने वाली गर्मी और पहाड़ों की जमा देने वाली ठंड में भी वो युद्ध करते हैं. उनकी रगों में देशभक्ति का जज्बा बहता है.

देश, रेजीमेंट और बटालियन के लिए अपनी जान तक कुर्बान करते हैं. उनका जयघोष हिंद की जीत होता है. ऐसे देशभक्त जवानों का मुकाबला चीन के चॉकलेट फौजी नहीं कर सकते. मंगलवार को संसद में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने वास्तविक नियंत्रण रेखा पर जारी गतिरोध पर बयान दिया और चीन की हरकतों के बारे में पूरे देश को बताया.

राजनाथ सिंह ने सदन में बताया कि- चीन को गलवान घाटी में हुई खूनी झड़प में भारी नुकसान हुआ था और अब वो बॉर्डर पर भारी तादाद में गोला-बारूद जमा कर रहा है. उन्होंने ये भी बताया कि चीन ने समझौतों का सम्मान नहीं किया, जिससे तनाव बढ़ा. इसके बाद 29-30 अगस्त की रात पैंगोंग त्सो इलाके में चीन ने दोबारा घुसपैठ की कोशिश की, लेकिन चीन ने अभी भी चाल नहीं छोड़ी है. वो LAC पर एक नई साजिश रच रहा है और ये साजिश है फाइबर केबल की.

चीन की नई चाल, बॉर्डर पर बिछा रहा है फाइबर केबल

चीन पूर्वी लद्दाख में तेजी से फाइबर केबल बिछा रहा है. ये चीन के मिशन अक्टूबर का हिस्सा है. कहते हैं कि जंग शौर्य, साहस और पराक्रम से जीती जाती है. ना कि अपनी कमजोरी और चोरी से, लेकिन चालबाज चीन है कि मानता नहीं. 15 जून से लेकर अब तक बार-बार हिंद के पर्वतवीरों से पिटने के बाद भी अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा. पूरे देश की फौज को LAC पर बुला रहा है और चीन के सारे असलहे पूर्वी लद्दाख के पार जुटा रहा है. जिसके कारण भारतीय सुरक्षा बल भी करीब चार हजार किलोमीटर लंबी चीन बॉर्डर पर हाई अलर्ट मोड में है.

पिछले तीन महीने में ड्रैगन आर्मी हिमालय पर हड़पे अपने हिस्से को गवां चुकी है. हिमालय की शीर्ष चोटी को हिंद के वीरों ने हथिया लिया है. करीब दो-तीन किलोमीटर नीचे बैठी चीनी सेना हाथ-पैर पटक रही है. हजारों की संख्या में लाल सेनाओं की भीड़ बढ़ा रही है. चीन पहले ही लद्दाख में -20 और -30 डिग्री वाली सर्दी के सामने सरेंडर कर चुका है, लेकिन अब उसकी एक नई साजिश खुलासा हुआ है.

चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी LAC पर अपने संचार तंत्र को मजबूत करने के लिए ऑप्टिकल फाइबर केबल्स का नेटवर्क बिछा रही है. चीन की ये हरकत पैंगोंग लेक के दक्षिणी हिस्से में देखी गई है. भारत के सीनियर अधिकारियों के मुताबिक सैटेलाइट तस्वीरों में पैंगोंग झील के दक्षिणी हिस्से की रेत वाली जगहों पर असामान्य लाइनें नजर आई हैं. इसके बाद इस गतिविधि के बारे में संबंधित अधिकारियों को अलर्ट कर दिया गया है.

बैक टू बैक हार मिलने के बाद चीन का बहाना

29 अगस्त की रात भारतीय सेना ने पैंगोंग के दक्षिण की चोटी ब्लैक टॉप, हेलमेट टॉप और गुरुंग हिल्स से चीनी सैनिकों को खदेड़ा. 7 सितंबर को PLA के सैनिकों से करीब तीन हजार फीट ऊंची चोटी मुखपरी पर भारतीय सैनिक जा बैठे. चार कैंप बना लिए और होवित्जर तोप तैनात कर दी. पहली बार भारत के इतने कड़े एक्शन से जिनपिंग की जमीन हिल गई है. चीनी सैनिकों की साख दांव पर लग गई है और ड्रैगन के LAC हड़पने का पूरा गेम बदल गया है. हालत ये है कि विश्वशक्ति का दंभ भरने वाली कम्युनिस्ट सरकार की फजीहत, घर में ही होने लगी है. घबराहट के मारे चीन ने LAC पर पूरी पलटन उतार दी है और तरह-तरह के चाल चल रही है.

बैक टू बैक हार मिलने के बाद चीन ने पहले बहाना बनाया कि -20 डिग्री की ठंड सैनिक नहीं झेल पाएंगे. इसीलिए दोनों देशों की सैनिकों को नीचे बुलाना होगा. लेकिन विदेश मंत्रियों की मुलाकात में एस जयशंकर ने साफ कर दिया है कि चीन जबतक LAC के विवादित क्षेत्र से पूरी तरह नहीं हटेगा. भारतीय सैनिक भी डटे रहेंगे. भारत के कड़े रुख के बाद चीन ने घुमाकर बयान दिया कि सर्दी में भारतीय सैनिक, चीनी सैनिकों का मुकाबला नहीं कर पाएंगे. जबकि सच्चाई ये है कि चीनी सैनिक 15-17 हजार फीट ऊंचाई पर लंबे समय तक नहीं रह सकते हैं.

Related Posts