कृषि विधेयकों पर विपक्ष ने मचाया शोर, YSRCP ने कांग्रेस को कहा ‘दलाल’, राज्यसभा में हुआ हंगामा

कांग्रेस सदस्य प्रताप सिंह बाजवा (Pratap Singh Bajwa) ने कहा कि ‘हम किसानों के इन मौत के वारंट पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे. जब भारत कोरोनावायरस महामारी (Coronavirus) और LAC पर तनाव का सामना कर रहा है, तब बिल लाने की जरूरत समझ से बाहर है.’

  • TV9 Hindi
  • Publish Date - 5:08 pm, Sun, 20 September 20

सरकार के रविवार को राज्यसभा में तीन में से दो विवादास्पद कृषि विधेयकों (Agricultural Bills) को पेश करने के बाद विपक्ष ने भारी हंगामा किया. सदन में बिल पर चर्चा के दौरान जोरदार हंगामे के बीच विधेयकों को राज्यसभा (Rajya sabha) में पास कर दिया गया. उच्च सदन में उस समय हंगामा हुआ, जब YSR कांग्रेस पार्टी के एक सदस्य ने विपक्षी कांग्रेस पार्टी के लिए ‘दलाल’ शब्द का इस्तेमाल कर दिया.

सदन में बोलते हुए YSRCP के सांसद वीवी रेड्डी (VV Reddy) ने कहा कि कांग्रेस के पास इन विधेयकों का विरोध करने की कोई वजह नहीं है. उन्होंने कांग्रेस को ‘दलालों की पार्टी’ कहा. इस टिप्पणी से, पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस सदस्य आनंद शर्मा (Anand Sharma) भड़क उठे और उन्होंने रेड्डी से माफी की मांग की. कांग्रेस ने विवादास्पद विधेयकों को किसानों के लिए ‘मौत का वारंट’ कहा.

‘इस समय इस बिल को लाने की क्या जरूरत’

कांग्रेस सदस्य प्रताप सिंह बाजवा (Pratap Singh Bajwa) जो पंजाब से आते हैं और बिल के सबसे मुखर विरोधियों में से एक हैं, ने कहा, “हम किसानों के इन मौत के वारंट पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे. कृषि बाजार (Agricultural Market) एक राज्य का विषय है.” उन्होंने लोकसभा के पारित विधेयकों के समय का मुद्दा भी उठाया, जिसमें कहा गया था कि जब भारत कोरोनावायरस महामारी (Coronavirus) और LAC पर तनाव का सामना कर रहा है, तब बिल लाने की जरूरत समझ से बाहर है.

CPI (M) ने बिलों को ‘कॉर्पोरेट की स्वतंत्रता’ कहा

इस बीच, माकपा (CPI-M) सांसद के के रागेश (KK Ragesh) ने विधेयकों को ‘कॉर्पोरेट की स्वतंत्रता’ कहा. उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को हमारे कॉर्पोरेट की दया पर छोड़ रही है. यह किसानों की नहीं बल्कि कॉर्पोरेट की आजादी है.

इससे पहले, केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (Narendra Singh Tomar) ने राज्यसभा में किसान उपज व्यापार और वाणिज्य (विस्तार और सरलीकरण) विधेयक, 2020 और किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक, 2020 पेश किए. उच्च सदन में उपस्थित होने के लिए BJP ने अपने सभी सदस्यों को 3-लाइन का व्हिप (Whip) जारी किया था.

इन बिलों से किसान की बढ़ेगी आमदनी : केंद्र

केंद्र सरकार का दावा है कि खेती से जुड़े प्रस्तावित कानून भारत में किसानों की आमदनी बढ़ाने में मदद करेंगे और उनका जीवन स्तर सुधरेगा. जब इन विधेयकों को अध्यादेश के रूप में लाया गया था तो आम तौर पर उनका स्वागत किया गया था, लेकिन अब जब उन्हें कानून का रूप देने की कोशिश की जा रही है तो विपक्षी पार्टियां इसे किसान विरोधी बता रही हैं. तोमर ने कहा कि किसान की भूमि के साथ कोई छेड़छाड़ न हो, इसका भी प्रावधान बिल में किया गया है. किसान को उसकी फसल का उचित मूल्य मिलेगा. (IANS)