कातिलों ने बार-बार मौके दिए, लेकिन एमपी-यूपी की पुलिस बच्चों को बचा नहीं पाई

अपहरणकर्ताओं का पहला फोन भी बांदा से आया और 13 दिन बाद बच्चों की लाश भी बांदा से ही मिली. ऐसे में ये क्यों न माना जाए कि मध्य प्रदेश के साथ-साथ यूपी की पुलिस भी संवेदनहीन बनकर बस तमाशा देखती रही?

अपराधियों ने बार-बार मौके दिए, लेकिन एमपी-यूपी की पुलिस बच्चों को बचा नहीं पाई . इससे बड़ी काहिली और क्या हो सकती है? इसके बाद अगर सरकारों और सिस्टम पर से पब्लिक का भरोसा उठता चला जाए, तो दोष किसका है? 2 बच्चे अगवा किए गए. फिरौती भी दी गई. लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी. ऐसा तब हुआ, जबकि अपराधियों ने बार-बार मौके दिए.

कहा जा रहा है कि फिरौती मिलने के बावजूद बच्चों की हत्या इसलिए कर दी गई, क्योंकि अपराधियों को पहचाने जाने के डर था. गिरफ्तार आरोपियों से एक पिस्टल और 17.67 लाख फिरौती की रकम बरामद की गई है. शुरुआती जांच में कहा गया है कि बच्चों की पानी मे डुबोकर हत्या की गई. इसके लिए उन्हें जंजीर में बांधकर उनके शरीर से पत्थर बांध दिया और पानी मे डूबोकर जान ले ली. वारदात के सिलसिले में अब तक जिन 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, उनमें से एक रामकेश
यादव नाम का आरोपी बच्चों को ट्यूशन पढ़ाता था.

बाकी 5 आरोपियों के नाम राजू द्विवेदी, पदम शुक्ला, लकी सिंह तोमर, रोहित द्विवेदी और पिंटू यादव है. लेकिन सबसे गंभीर और चिंता की बात ये रही कि 12 फरवरी से शुरू हुई इस वारदात में कई बार ऐसे मोड़ आए, जब बच्चे को सकुशल बचाया जा सकता था, लेकिन हर बार एमपी और यूपी की पुलिस नाकाम ही रही.

दो मासूमों की हत्या पर 5 हालात, 5 गंभीर सवाल

12 फरवरी को दोपहर 12.30 बजे सद्गुरू पब्लिक स्कूल के यूकेजी में पढ़ने वाले प्रियांश
और श्रेयांश को कट्टे की नोक पर कैंपस के अंदर स्कूल बस से अपहरण किया गया.

सवाल: इतने बड़े स्कूल में सुरक्षा के इतने लचर इंतजाम क्यों थे?

घटना के 2 दिन बाद 2 करोड़ की फिरौती के लिए बच्चों के पिता बृजेश यादव के पास फोन आया, फोन यूपी के बांदा से आना ट्रेस हुआ.

सवाल: यूपी पुलिस बांदा में घेरेबंदी कर अपराधियों को क्यों नहीं पकड़ पाई?

आरोपियों ने कई बार राह चलते लोगों से फोन लेकर फिरौती के लिए फोन किया.
सवाल: बदमाशों ने बार-बार मौका दिया, फिर भी दोनों राज्यों की पुलिस क्यों सोती रही?

20 फरवरी की रात पुलिस को बिना जानकारी दिए परिजनों ने 20 लाख रुपये अपहरणकर्ताओं को पहुंचाए, लेकिन बच्चे नहीं मिले.
सवाल: 8 दिन इंतजार के बाद परिवार का धैर्य टूटने की बात समझी जा सकती है. तो क्या ये समझा जाए कि पुलिस बच्चे को ढूंढने को लेकर हाथ खड़े कर चुकी थी?

24 फरवरी को बच्चों के शव यूपी के बांदा जिले के बबेरू थानाक्षेत्र में यमुना नदी में मिले.
सवाल: अपहरणकर्ताओं का पहला फोन भी बांदा से आया और 13 दिन बाद बच्चों की लाश भी बांदा से ही मिली. ऐसे में ये क्यों न माना जाए कि मध्य प्रदेश के साथ-साथ
यूपी की पुलिस भी संवेदनहीन बनकर बस तमाशा देखती रही?

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सनसनीखेज आरोप लगाया है कि विपक्ष के कई लोग इस वारदात में शामिल हैं.