मरकज पर गहराते संकट के बीच एकजुट हो सकते हैं दोनों तबलीगी धड़े

बता दें कि मुंबई (Mumbai) में 17 से 20 मार्च तक शूरा (shura) की एक सभा आयोजित थी, लेकिन इसमें प्रतिभागियों और समर्थकों की सलाह के बाद हालात को देखते हुए कार्यक्रम को रद्द कर दिया था.

कोरोनावायरस (Coronavirus ) महामारी के बीच दिल्ली के निजामुद्दीन में बड़ा कार्यक्रम आयोजित करने वाला संगठन तबलीगी जमात (Tablighi Jamaat) विवादों में है. तबलीगी जमात कुछ साल पहले आंतरिक विवादों के कारण दो धड़ों में बंट गया था, जो इस संकट की घड़ी में दोबारा एक हो सकता है. मिली जानकारी के मुताबिक दोनों गुटों के साथ आने की प्रबल संभावना है, क्योंकि समर्थक भी ऐसा ही चाहते हैं.

लंबे समय से तबलीगी जमात से जुड़े जफर सरेशवाला (Zafar Sareshwala) ने मरकज प्रमुख और अमीर मौलाना मोहम्मद साद कांधलवी (Maulana Saad) का बचाव किया है. उन्होंने साद का बचाव करते हुए कहा, कार्यक्रम का आयोजन निर्णय की त्रुटि है और इसमें कोई दुर्भावना का इरादा नहीं है.

देखिये #अड़ी सोमवार से शुक्रवार टीवी 9 भारतवर्ष पर शाम 6 बजे

जमात की तमाम गतिविधियों में गुजरात गुट का काफी योगदान रहा है और इससे जुड़ी महत्वपूर्ण हस्तियां सूरत के मौलाना अहमद लाड और भरूच के इब्राहिम देवला रहे हैं. वहीं गुजरात और मुंबई में जमात के काम में चेलिया समुदाय सबसे आगे रहा है.

मौलाना यूसुफ (Maulana Yusuf) द्वारा राज्य में 50 के दशक की शुरुआत में शुरू किए गए काम के कारण तबलीगी ने अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप और अमेरिका में बसे प्रमुख गुजरातियों के नेतृत्व में विदेशों तक अपनी जड़ें जमा लीं है.

मौलाना लाड और यूसुफ देवला दोनों ही निजामुद्दीन मरकज में रहते थे, लेकिन मौलाना साद के साथ मतभेद के कारण बाद में जमात का विभाजन हो गया. जमात की उपस्थिति 150 से अधिक देशों में है.

बंटवारे के बाद बनाए गए शूरा गुट की तबलीगी जमात में करीब 60 फीसदी हिस्सेदारी मानी जाती है, जिसमें पाकिस्तान के मौलाना तारिक जमील भी शामिल हैं.

जफर सरेशवाला ने कहा, दोनों गुटों के बीच कोई वैचारिक अंतर नहीं है और व्यक्तिगत समस्याएं भी गहराई से नहीं हैं. उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि संकट के समय में दोनों धड़े एक साथ आ सकते हैं, लेकिन यह उनकी निजी राय है.

उत्तर प्रदेश, तेलंगाना और अन्य हिस्सों में साद गुट की पकड़ है, वहीं मुंबई और अन्य जगहों पर गुजरातियों की पकड़ है. जबकि ऑफ शोर लंदन सेंटर पाकिस्तान के शूरा के साथ है, ड्यूसबरी केंद्र को मौलाना साद द्वारा नियंत्रित किया जाता है. इसी तरह शिकागो साद के नियंत्रण में है और अफ्रीकी देश शूरा गुट के साथ हैं.

दिल्ली के दरियागंज में तुर्कमान गेट स्थित फैज-ए-इलाही मस्जिद शूरा का केंद्र है, जो लॉकडाउन की घोषणा के बाद से ही बंद है. जमात का उदय मुख्य रूप से गुजरात से आए योगदान के कारण हुआ, जहां संगठन की गहरी जड़ें हैं.

बता दें कि मुंबई (Mumbai) में 17 से 20 मार्च तक शूरा (shura) की एक सभा आयोजित थी, लेकिन इसमें प्रतिभागियों और समर्थकों की सलाह के बाद हालात को देखते हुए कार्यक्रम को रद्द कर दिया था. मौलाना साद को भी यही सलाह दी गई थी, लेकिन उन्होंने इस आयोजन को आगे बढ़ाया, जिसके परिणाम देश को अब भुगतना पड़ रहा हैं.

जफर सरेशवाला ने कहा, अभी भी देर नहीं हुई है. मौलाना साद (Maulana Saad) को बाहर आकर प्रेस और लोगों से बात करनी चाहिए, ताकि जमात के बारे में जो कुछ भी कहा गया है, उसका खंडन किया जा सके. (IANS)

देखिये परवाह देश की सोमवार से शुक्रवार टीवी 9 भारतवर्ष पर हर रात 10 बजे

Related Posts