आर्मी चीफ जनरल नरवणे बोले- पूर्वोत्तर और कश्मीर में सुधरे हालात, घटाई जाएगी सेना

जनरल नरवणे ने कहा कि दो बटालियनों को पहले ही वापस बुला लिया गया है. वहीं असम के बोडोलैंड मामले के जुन-जुलाई तक पूरा होने के बाद अगली वापसी की जाएगी.

आतंकवाद और उग्रवाद से लड़ाई के साथ ही आंतरिक सुरक्षा के मद्देनजर देश के पूर्वोत्तर राज्यों में तैनात सेना के जवानों की संख्या कम की जाएगी. सेना प्रमुख (Army Chief) जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने मंगलवार को कहा कि अगले 18-20 महीने में ऐसा करेंगे और सेना के जवानों को वापस पारंपरिक युद्ध जैसे प्रशिक्षण पर केंद्रित किया जाएगा.

जनरल नरवणे ने कहा कि दो बटालियनों को पहले ही वापस बुला लिया गया है. वहीं असम के बोडोलैंड मामले के जुन-जुलाई तक पूरा होने के बाद अगली वापसी की जाएगी. उन्होंने कहा कि एनडीएफबी के 600 से ज्यादा उग्रवादियों के सरेंडर करने के बाद पूर्वोत्तर में सुरक्षा की हालत में सुधार हुआ है. पूर्वोत्तर के राज्यों में शांति और बेहतरी बढ़ रही है. हम वहां रेग्युलर ड्यूटी में लगे सेना के जवानों को अगले 18-20 महीने में वापस बुलाएंगे.

उन्होंने कहा कि जवानों को पारंपरिक युद्ध जैसे इलाकों में ही फोकस रखने की कोशिश करेंगे. हमें लंबे समय के लक्ष्य के लिए प्रतिबद्ध रहना होगा. उन्होंने कहा कि हम कश्मीर घाटी में भी सेना के जवानों को कम करेंगे. क्योंकि आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद वहां की हालत भी सुधर रही है. पाकिस्तान कितनी भी कोशिश करे, लेकिन कश्मीर में पत्थरबाजी, आईडी धमाके और सेना पर हमले कम हुए हैं.

दूसरी ओर आर्मी चीफ ने कहा कि भारतीय सेना ने बीते दो वर्षों में गोला बारूद जैसे हथियारों की कमी पूरी कर ली है. बाकी हथियार की खरीद भी तेजी से हो रही है. हथियारों की कमी अब बीते दिनों की बात है. हमारे भंडार फिलहाल भरे हुए हैं और स्टॉक का लेवल भी ऊंचा है. 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक कीमत की हथियार खरीद पूरी कर ली गई है. उन्होंने बताया कि छह अपाचे हेलीकॉप्टर खरीदने की प्रक्रिया जारी है. उम्मीद है कि इस साल जुलाई तक हम खरीद का आदेश जारी कर देंगे.

जनरल नरवणे ने कहा कि बजट हमारी प्राथमिकता है और उम्मीद है कि अगले आवंटन में सेना की जरूरतों को पूरा किया जाएगा. उन्होंने कहा कि सेना ने अपनी आवश्यकताओं के बारे में सरकार को बता दिया है और आशा है कि बजट में मौजूदा जरूरतों के अनुसार आवंटन किया जाएगा. चिंतित होने की कोई बात नहीं है, हम हमेशा सभी ऑपरेशनों और जरूरतों के लिए तैयार हैं.

उन्होंने कहा कि भारतीय सेना भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए कई मोर्चों पर जमकर तैयारी कर रही है. एक तरफ जहां सेना के भीतर ढांचागत बदलाव हो रहे हैं, वहीं बदलती तकनीक की वजह से सामरिक तैयारियों को भी नए सिरे से तय किया जा रहा है. भविष्य के युद्ध आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक से लड़े जाएंगे. इसमें क्वांटम कंप्यूटिंग, बिग डाटा, रोबोट, ड्रोन वगैरह का बहुत ज्यादा इस्तेमाल होगा.

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