निर्भया गैंगरेप: फांसी में देरी पर SC पहुंची सरकार, कहा- दया याचिका दाखिल करने को मिले 7 दिन

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से मांग रखी है कि रिव्यू और क्यूरेटिव पिटीशन दायर करने के लिए भी एक समयसीमा निर्धारित की जाए.

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केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में मौत की सजा पाए दोषियों की दया याचिका की समयसीमा को लेकर याचिका दायर की है. इसमें कहा गया है कि दया याचिका दायर करने की समयसीमा को 14 दिन से घटाकर 7 दिन कर दिया जाए.

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से यह मांग भी रखी है कि इन मामलों में रिव्यू और क्यूरेटिव पिटीशन दायर करने के लिए भी एक समयसीमा निर्धारित की जाए.

2012 निर्भया गैंगरेप में मौत की सजा पाए चारों दोषियों को फांसी पर चढ़ाया जाना अभी बाकी है. पूरे देश में इन दरिंदों को जल्द से जल्द फांसी दिए जाने की मांग उठ रही है.

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से साल 2014 में शत्रुघ्न चौहान केस में दिए फैसले में बदलाव करने का अनुरोध किया है. चौहान मामले में कोर्ट ने दया याचिका को सालों तक लटकाए जाने पर नरम रुख अपनाया था. साथ ही कहा था कि यह इंतजार कैदी के लिए एक सजा ही है.

कोर्ट ने जेल प्रशासन को आदेश दिया था कि यह सुनिश्चित किया जाए कि दया याचिका के खारिज होने और फांसी दिए जाने के दिन के बीच 14 दिन का अंतर हो. न्यायधीशों ने कहा था कि हमारे लोक्रतांत्रिक देश में प्रतिकार की कोई जगह नहीं है.

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने याचिका में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट दोषियों को क्यूरेटिव पिटीशन दायर करने के लिए एक निश्चित समयसीमा तय करे. साथ ही यह भी तय किया जाए कि मौत की सजा की घोषणा हो जाने के सात दिन के अंदर दोषी दया याचिका दायर कर सकें.

केंद्र सरकार ने ये भी मांग की है कि कोर्ट के साथ-साथ राज्य सरकार और जेल अधिकारी को भी डेथ वारंट जारी करने का अधिकार दिया जाए. फिलहाल सिर्फ मजिस्ट्रेट ही डेथ वारंट जारी कर सकते हैं.

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