धर्म के आधार पर लोगों को बांटने के लिए लाया गया CAA, CWC बैठक में बोलीं सोनिया गांधी

सोनिया गांधी ने कहा, "हजारों युवाओं, युवतियों और खास तौर से छात्रों ने इस बात को महसूस किया है कि सीएए के लागू होने से कितना बड़ा नुकसान होगा."

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने शनिवार को नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को भेदभावपूर्ण और विभाजनकारी बताया. उन्होंने कहा कि धर्म के आधार पर लोगों में भेदभाव करने के मकसद से भी सीएए को लाया गया.

उन्होंने जोर देकर कहा कि एनआरसी को राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) के रूप में लाया जा रहा है.

सोनिया गांधी ने नई दिल्ली में कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में ये बातें कहीं. उन्होंने कहा, “हजारों युवाओं, युवतियों और खास तौर से छात्रों ने इस बात को महसूस किया है कि सीएए के लागू होने से कितना बड़ा नुकसान होगा. लोग भीषण ठंड के बावजूद सड़कों पर निकले. साथ ही पुलिस के अत्याचारों का भी सामना किया.”


उन्होंने कहा, “हम मांग करते हैं कि सीएए विरोधी प्रदर्शनों से जुड़े मामलों की जांच के लिए उच्च स्तरीय कमीशन का गठन किया जाए. साथ ही प्रभावितों के साथ न्याय हो.”

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि छात्रों का प्रदर्शन जिस तरह से जोर पकड़ रहा है उससे साफ है कि सरकार हिल रही है. ऐसा एक भी दिन नहीं गुजरता है कि जब गृहमंत्री और कुछ दिन प्रधानमंत्री खुद उकसावे भरे बयान नहीं देते.

उन्होंने कहा कि ‘कुछ राज्यों के हालात सचेत करने वाले हैं, कई राज्य पुलिस राज्य में तब्दील हो रहे हैं. इनमें उत्तर प्रेदश और केंद्रशासित प्रदेश दिल्ली प्रमुख हैं. हमें किसी तरह के भ्रम में रहने की जरूरत नहीं है, एनपीआर एक शॉफ्ट एक्सरसाइज है.’

उन्होंने कहा कि एनपीआर 2020 अपने स्वरूप और विषय में एनआरसी ही है.

सोनिया गांधी ने इस दौरान देश की अर्थव्यवस्था और जम्मू-कश्मीर के हालात को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा, “यह पीड़ा और दुख की बात है कि जम्मू-कश्मीर में लोगों को लगातार उनके मौलिक अधिकारों से वंचित किया जा रहा है. वहीं सरकार हालात सामान्य होने के झूठे दावे कर रही है और दिशानिर्देशित राजदूतों की व्यवस्था कर रही है.”

कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पी चिदंबरम, आनंद शर्मा, एके एंटनी, केसी वेणुगोपाल, प्रियंका गांधी वाड्रा, ज्योतिरात्दिय सिंधिया समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे.

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